जोधपुर

जिसकी दहाड़ से कपकपाता था माचिया, वहीं दहाड़ आज कराह रही दर्द से

चलने फिरने में असमर्थ हुई माचिया की लाडली 'लक्ष्मी '
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Jun 19, 2018
Machiya Zoological Park : Lioness Moaning
Machiya Zoological Park : Lioness Moaning

-इन्फ्रारेड लैम्प से नियमित शेक , मोतियाबिन्द के कारण आंखों की रोशनी भी हुई कमजोर

जोधपुर. माचिया जैविक उद्यान में दीपावली की रात जन्म के तुरंत बाद ही मौत से संघर्ष कर नया जीवन पाने वाली 'लक्ष्मी ' को अब नई परेशानी ने घेर लिया है। आंख में मोतियाबिन्द होने से पहले ही कमजोर नजर के कारण परेशान शेरनी को नहलाने के दौरान उसका पैर फिसलने से पिछले बाएं पैर में मोच आ गई थी। चलने फिरने में लाचार शेरनी की 24 घंटे देखरेख की जा रही है। माचिया जैविक उद्यान के चिकित्सक के अनुसार शेरनी 'लक्ष्मी ' को दर्द निवारक दवाइयों के साथ इन्फ्रारेड लैम्प से नियमित शेक किया जा रहा है। यह प्रक्रिया दिन में दो बार दोहराई जा रही है। गुजरात के सक्करबाग जू के लॉयन विशेषज्ञ डॉ. रियाज कड़ीवार सहित अन्य लॉयन विशेषज्ञों से सलाह लेकर 'लक्ष्मी ' का उपचार किया जा रहा है। चिकित्सक के अलावा चिकित्सक सहायक महेन्द्र गहलोत, केयर टेकर भी देखरेख कर रहे हैं।

जन्म से ही जीवन के लिए संघर्ष
माचिया जैविक उद्यान में दीपावली की रात महालक्ष्मी पूजन के दौरान सिंह लग्न में जन्मी 'लक्ष्मी' जन्म के तुरंत बाद से ही मौत से संघर्ष करते हुए बड़ी हुई है। दरअसल माचिया जैविक उद्यान में जूनागढ़ से लाई गई मादा एशियाटिक लॉयन आरटी ने 19 अक्टूबर 2017 को दीपावली की रात एक साथ दो शावकों को जन्म दिया। इनमें शेरनी आरटी द्वारा नर शावक को मुंह में गलत तरीके से पकडऩे की वजह से कुछ देर बाद ही मौत हो गई थी। मां के दूध से वंचित मादा शावक 'लक्ष्मी ' को डिहाइड्रेशन से बचाने के लिए मां से अलग कर बचाया गया। उसका अमरीका से आयातित दूध पिलाकर पालन पोषण किया गया।

विशेषज्ञों ने की थी जांच

माचिया जैविक उद्यान के लॉयन कैलाश, रियाज और लक्ष्मी की आंखों की नजर कमजोर होने पर वन अधिकारियों ने बीकानेर से विशेषज्ञ चिकित्सकीय टीम को जोधपुर बुलाया। बीकानेर वेटनरी कॉलेज सर्जरी विभाग से सेवानिवृत्त हेड ऑफ डिपार्टमेंट प्रो. टीके गहलोत व वेटनरी कॉलेज के सहायक प्रोफेसर डॉ. सुरेश कुमार झीरवाल के नेतृत्व में टीम के सदस्यों ने 6 अप्रेल 2018 को सभी शावकों के आंखों की विस्तृत जांच कर जल्द ऑपरेशन की सलाह दी थी।
आब्जर्वेशन में रखा ।

शेरनी 'लक्ष्मी ' के पैर में चोट की वास्तविक जगह का पता चलने के कारण अभी तक एक्स-रे नहीं करवाया गया है। आब्जर्वेशन में रखने के बाद नियमित शेक व भोजन के साथ दर्द निवारक दवाइयां दी जा रही है। उम्मीद है जल्द ही चलने फिरने में समर्थ हो जाएगी। यदि परिणाम सकारात्मक नहीं हुए तो एक्स-रे करवाया जाएगा। आंखों में मोतियाबिन्द का ऑपरेशन शीतकाल में किया जाएगा।
-डॉ.श्रवणसिंह राठौड़, वन्यजीव चिकित्सक माचिया जैविक उद्यान

Published on:
19 Jun 2018 06:10 pm