
जोधपुर / बीकानेर .
ऐसे नेता कम ही होंगे, जो अपने क्षेत्र के कार्यभार को इतना करीब से देखते होंगे। लेकिन केन्द्रीय कृषि राज्यमंत्री गजेन्द्रसिंह शेखावत कुछ हटकर निकले हैं। वेे अपने कामकाज को बारिकी से देखते हैं, खुद करने की कोशिश भी करते हैं और उसे पूरी तरह से सीखते भी हैं। कहते हैं सीखने की कोई उम्र नहीं होती। और शेखावत हमेशा कुछ नया करने में सबसे आगे रहते हैं।
हाल ही कृषि राज्यमंत्री शेखावत बीकानेर स्थित राष्ट्रीय उष्ट्र अनुंसधान केन्द्र में पशुपालक कृषक-वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम में भाग लेने गए थे। यहां मंत्री ने उष्ट्र संग्रहालय, डेयरी, फीड टेक्नोलॉजी आदि का निरीक्षण भी किया। इस दौरान मंत्री शेखावत ने राष्ट्रीय उष्ट्र अनुंसधान केन्द्र में ऊंटनी के दूध को दूहने की प्रक्रिया देखी और खुद ने ऊंटनी के दूध का निकाला। इसके बाद शेखावत ने एक गिलास में ऊंटनी के दूध को पीया। यूं कहे तो अतिश्योक्ति नहीं होगी कि कृषि मंत्री ने ऊंटनी का दूध खुद निकालकर और मौके पर दूध पीकर एक मिसाल पेश की। मंत्री के इस अंदाज की लोग सराहना भी करते दिखाई दिए। इस मौके पर मंत्री ने केमल सफारी भी की।
औषणीय गुणों से भरपूर हैं ऊंटनी का दूध
केन्द्रीय कृषि मंत्री गजेन्द्रसिंह शेखावत ने कहा कि राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र ने ऊंट को बचाने के लिए इसे एक दूधारू पशु के रूप में बेहतर विकल्प सुझाया है। ऊंटनी के दूध के औषधीय गुणों का भी पता लगाया है। ऊंटों की संख्या तेजी से घट रही है, ऐसे में दूध का व्यावसायीकरण जरूरी है।
केन्द्र निदेशक डॉ. एनवी पाटिल ने कहा कि केन्द्र ऊंटनी के दूध पर अनुसंधान कर इसका महत्व साबित कर चुका है, अब इसका विपणन किया जाना है। इसके लिए नीतिगत सहयोग की आवश्यक है। इस अवसर पर केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान के निदेशक डॉ. पीएल सरोज ने भी विचार रखे। कार्यक्रम में प्रो. एके गहलोत, क्यूआरटी के अध्यक्ष, प्रगतिशील उष्ट्र पालक जगमाल सिंह राईका, शंकर रेबारी, श्रेयकुमार आदि उपस्थित थे।
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