
गजेंद्रसिंह दहिया/जोधपुर. राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (एनएलयू) जोधपुर में इस साल भी राजस्थानी छात्रों को आरक्षण नहीं मिलेगा। एनएलयू कंसोर्टियम की ओर से क्लैट-2020 की घोषणा हो चुकी है, लेकिन एनएलयू ने इस साल भी अपने यहां राजस्थानी छात्रों को 25 प्रतिशत आरक्षण का ब्रोशर नहीं भेजा। एनएलयू जोधपुर ने दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जज मंजू गोयल की एक सदस्यीय कमेटी बनाकर मामले को ठण्डे बस्ते में लटका रखा है।
कमेटी ने सवा साल बाद भी रिपोर्ट नहीं दी है। ऐसे में पिछले 20 साल से खुद का विश्वविद्यालय होने के बावजूद राजस्थानी छात्र ठगा सा महसूस कर रहे हैं। गौरतलब है कि देश के 22 एनएलयू में से करीब 18 एनएलयू में संबंधित राज्य के छात्रों का आरक्षण है।
एनएलयू जोधपुर की स्थापना 1999 में राजस्थान विधानसभा एक्ट से हुई। उस समय राज्य सरकार ने विवि की 115 सीटों पर किसी तरह का आरक्षण नहीं दिया था लेकिन बाद में छात्र-छात्राओं की ओर से आवाज उठाने के बाद तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री किरण माहेश्वरी ने 5 मार्च 2018 को विधानसभा में एनएलयू संशोधन विधेयक पेश कर 25 प्रतिशत राज्य आरक्षण पास कर दिया, तब तक क्लैट-2018 की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी।
ऐसे में राज्य सरकार ने अगले साल इसे लागू करने के लिए एनएलयू जोधपुर की एग्जीक्यूटिव काउंसिल (सिण्डीकेट) को भेजा लेकिन एनएलयू जोधपुर ने इसे काउंसिल में रखने की बजाय जानबूझकर जांच कमेटी बनाकर मामला को रफा-दफा कर दिया। वर्ष 2019 के बाद अब 2020 में भी एनएलयू जोधपुर में राजस्थानी छात्रों को आरक्षण नहीं मिलेगा। एनएलयू भोपाल, एनएलयू रायपुर और एनएलयू गांधीनगर जैसे लॉ स्कूलों में तो स्थापना के साथ ही संबंधित राज्यों के छात्रों को आरक्षण दे दिया गया था। एनएलयू उड़ीसा, एनएलयू बेंगलुरू, एनएलयू जोधपुर और एनएलयू दिल्ली को छोडकऱ तकरीबन सभी लॉ स्कूल्स में संबंधित राज्यों के छात्र-छात्राओं के लिए सीटें आरक्षित है।
हम बाद में ब्रोशर में जुड़वा देंगे
जस्टिस मंजू गोयल कमेटी जनवरी में अपनी रिपोर्ट सौंप देंगी। हम बाद में एनएलयू कंसोर्टियम को ब्रोशर भेजकर उसमें आरक्षण जुड़वा देंगे।
सोहनलाल शर्मा, रजिस्ट्रार, एनएलयू जोधपुर
राजस्थान एक्ट का विवि है, मैं मामला दिखवाता हूं
एनएलयू भी राजस्थान एक्ट का विवि है। इसमें भी स्टेट कोटा होना चाहिए। मैं मामले की जांच करवाता हूं।
- भंवर सिंह भाटी, उच्च शिक्षा मंत्री राजस्थान