
Nepal Flood : नेपाल में भीषण बाढ़ में कम से कम 469 लोगों की मृत्यु हो गई है, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं। राजस्थान सहित पूरे भारत में भी तमाम लोग परेशान हैं। इसी बीच तिब्बत से खुशखबर आई। नेपाल तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ से भारी तबाही के बीच कैलाश यात्रा पर गए जोधपुर के सभी यात्री सुरक्षित बताए जा रहे हैं। हालांकि, यात्रियों में भय बना हुआ है। परिजन भी चिंतित है। ट्रेवलर रविंद्र सोलंकी के अनुसार, जोधपुर से तीन ग्रुप कैलाश यात्रा पर गए है। फिलहाल तीनों समूह तिब्बत में है और सभी यात्री सुरक्षित है।
ट्रेवलर रविंद्र सोलंकी के अनुसार जिस समय नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में बाढ़ की भयावह स्थिति बनी, उस दौरान उनका ग्रुप कैलाश पर्वत की परिक्रमा कर रहा था। वहीं, अन्य दो समूह सागा में मौजूद थे। तीनों समूहों के यात्रियों से संपर्क बना हुआ है और सभी सुरक्षित बताए गए है। बाढ़ की जानकरी सामने आने के बाद जोधपुर सहित राजस्थान के कई परिवारों में अपने परिजनों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई थी। यात्रियों के सुरक्षित होने की सूचना मिलने के बाद परिजनों ने राहत की सांस ली।
रविंद्र सोलंकी ने बताया कि आपदा से आस-पास के क्षेत्रों में हुए नुकसान और लोगों के लापता होने की खबर से यात्रा पर मौजूद यात्री भी चिंतित है। उन्होंने आपदा में प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना जताते हुए उम्मीद की कि राहत एवं बचाव दल जल्द लापता लोगों को सुरक्षित बाहर निकालेंगे।
नेपाल में हाल ही में आई प्राकृतिक आपदा और कठिन परिस्थितियों के बीच राजस्थान की भजनलाल शर्मा सरकार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए एक बड़ा और अहम निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री वरिष्ठ नागरिक तीर्थ यात्रा योजना के तहत नेपाल के प्रसिद्ध पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शनों के लिए जाने वाले बुजुर्ग तीर्थयात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए इस यात्रा को फिलहाल 5 दिनों के लिए स्थगित कर दिया गया है। देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देशानुसार काठमांडू (नेपाल) की इस हवाई यात्रा को 27 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक के लिए रोक दिया गया है।
देवस्थान मंत्री जोराराम कुमावत ने कहा राज्य सरकार के लिए अपने वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और सेहत सबसे पहली प्राथमिकता है। नेपाल में आई इस भीषण त्रासदी के बाद वहां के हालात और बुनियादी ढांचा प्रभावित हुआ है। ऐसी स्थिति में बुजुर्गों को किसी भी प्रकार की असुविधा या जान-माल का खतरा न हो, इसलिए बेहद सतर्कता बरतते हुए यात्रा को अस्थायी रूप से रोकने का संवेदनशील निर्णय लिया गया है।