जोधपुर

निगहबान- सृजन पर सन्नाटा क्यों?

टाउन हॉल का मिनी ऑडिटोरियम और सूचना केंद्र स्थित जनकवि गणेशीलाल व्यास मिनी ऑडिटोरियम भी गैर-कार्यशील है, जिससे शहर की सृजनात्मकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

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Feb 06, 2026
जयनारायण व्यास स्मृति टाउन हॉल। फोटो- पत्रिका

संदीप पुरोहित
जयनारायण व्यास स्मृति टाउन हॉल के बंद रहने से जोधपुर की कला एवं सांस्कृतिक गतिविधियां ठप हो गई है। सन्नाटा पसरा हुआ है। कलाकारों से मंच छिन गया है। यह मारवाड़ की सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यह चूने पत्थर की इमारत नहीं, बल्कि साहित्य, संगीत, रंगमंच और सामाजिक संवाद की जीवंत परंपरा का प्रतीक रहा है। खामोशी ओढे खड़ा यह टाउन हॉल टकटकी लगाए अपने खोए हुए वैभव को लौटने का इंतजार कर रहा है। पर लालफीताशाही, प्रशासनिक अर्कमण्यता राजनीतिक इच्छा शक्ति के अभाव में करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद भी जर्जर होने की कगार पर जा रहा है।

पिछली राज्य सरकार ने इसके सुधार का जिम्मा जोधपुर विकास प्राधिकरण को सौंपा। 11.5 करोड़ रुपए की लागत से तैयार यह टाउन हॉल उत्तर भारत के अत्याधुनिक, हाईटेक सभागार होने का दावा किया गया। दावे बड़े थे, आगामी 50 वर्ष की जरूरतों को ध्यान में रखकर लाइट और साउंड सिस्टम लगाए गए। 200 विशेष लाइटों पर ही करीब 2.5 करोड़ रुपए खर्च हुए, पर विडंबना यह है कि इसे आज तक इसे फिटनेस सर्टिफिकेट भी नहीं मिला है। तंत्र भ्रष्टाचार में डूबा हुआ है। काम की गुणवत्ता पर सवाल़ खड़े हो रहे हैं। इसकी हालत खस्ता है।

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इतना ही नहीं, टाउन हॉल का मिनी ऑडिटोरियम और सूचना केंद्र स्थित जनकवि गणेशीलाल व्यास मिनी ऑडिटोरियम भी गैर-कार्यशील है, जिससे शहर की सृजनात्मकता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। इससे सब वाकिफ हैं, पर सरकार और सिस्टम दोनों अनभिज्ञ बने हुए हैं। लचर प्रशासन की हठधर्मिता से लोगों में भारी निराशा है। उनकी उम्मीद की किरण न्यायालय ही है। न्याधीश डॉ. पुष्पेंद्र ङ्क्षसह भाटी व न्यायाधीश संदीप शाह की खंडपीठ ने स्वत: संज्ञान याचिका पर माननीय उच्च न्यायलय ने राज्य सरकार को 15 जनवरी तक शपथ पत्र देने को कहा है। जनता का पैसा खर्च हो चुका है पर कोई सार्थक परिणाम सामने नहीं आया है। टाउन हॉल के बंद होने से सबसे अधिक नुकसान स्थानीय कलाकारों, रंगकर्मियों, साहित्यकारों, विद्यार्थियों और सामाजिक संस्थाओं को हो रहा है। जो मंच कभी युवा प्रतिभाओं को पहचान देता था, अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम था। समाज को आईना दिखाता था, आज वह वीरान खड़ा है। इससे न केवल सांस्कृतिक गतिविधियां ठप हुई हैं, बल्कि शहर की रचनात्मक ऊर्जा भी प्रभावित हुई है।

यदि भवन में तकनीकी या संरचनात्मक खामी है तो उनके समाधान के लिए त्वरित कार्यवाही क्यों नहीं की जा रही? प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री जयनारायण व्यास के नाम से जुड़ा यह टाउनहॉल केवल एक भवन नहीं, बल्कि मारवाड़ का सृजन शक्तिपीठ है। सरकार की सभी एजेंसियों से अपेक्षा है कि वे इस विषय को गंभीरता से लें, शीघ्र आवश्यक सुधार कराएं। दोषियों के खिलाफ कार्रवाई हो। हमारी अभिव्यक्ति के सामाजिक सांस्कृतक संवाद केंद्र :की प्रतिष्ठा के पुर्न स्थापन में अब और देरी नहीं होनी चाहिए।

sandeep.purohit@epatrika.com

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