
जोधपुर। नगर निकाय चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी में टिकट वितरण की प्रक्रिया निर्णायक दौर में है। दावेदार भी पूरा दमखम लगा रहे हैं। प्रत्याशियों की योग्यता, राजनीतिक सक्रियता, जीत की संभावना, युवाओं को अवसर जैसे मुद्दे चर्चा के केंद्र में हैं। इस बीच केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने नगर निकाय चुनावों से जुड़े विभिन्न सवालों पर खुलकर अपनी राय रखी। उनका दावा है कि इस बार नगर निगम में भाजपा का बोर्ड बनेगा।
प्रस्तुत हैं संदीप पुरोहित की केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत से बातचीत के प्रमुख अंश
Q. जोधपुर नगर निगम की कार्यशैली और शहर के आधारभूत ढांचे को आप किस नजर से देखते हैं ?
A. नगर निगम शहर के विकास की महत्वपूर्ण संस्था है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में कई कमियां हैं। करीब तीस वर्षों में मुझे कई देशों में जाने का अवसर मिला और वहां की अर्बन गवर्नेस को देखने का मौका मिला। उसकी तुलना में हम अभी काफी पीछे हैं। इसका बड़ा कारण यह है कि हमारे शहरी निकायों के पास पर्याप्त अधिकार नहीं हैं और जो अधिकार हैं, उनके इस्तेमाल का सिस्टम भी प्रभावी नहीं है। विकसित देशों में कई जगह मेयर की सरकार होती है, जो शहर से जुड़े अधिकांश निर्णय स्वयं लेती है और उसके पास पर्याप्त अधिकार व संसाधन होते हैं। हमारे यहां शहरी निकाय राजस्थान सरकार पर अधिक निर्भर हैं। जहां तक इस बार बोर्ड बनाने का सवाला है, इस बार भाजपा दो तिहाई मतों से बोर्ड बनाएगी।
Q. पिछले चुनाव में हारने वाले प्रत्याशियों को इस बार मौका मिलेगा ?
A. राजनीति में किसी चुनाव में हार जाने के कारण किसी व्यक्ति को हमेशा के लिए बाहर नहीं किया जाता। लोकतांत्रिक व्यवस्था में बहुत सी चीजें परिस्थितियों पर निर्भर करती हैं। इस बार नए सीमांकन के बाद हम नए निगम में चुनाव लड़ रहे हैं। कोई व्यक्त्ति दो-तीन बार जीत चुका है तो उसे लगातार अवसर देने पर विचार हो सकता है।
Q. नगर निगम चुनाव में प्रत्याशी के चयन में शिक्षा को कितना महत्व दिया जाएगा? पिछली बार 160 में से 82 पार्षद केवल मैट्रिक पास थे।
A. शिक्षा एक क्राइटेरिया जरूर होना चाहिए, लेकिन केवल डिग्री को योग्यता का पैमाना नहीं माना जा सकता। कोई व्यक्ति मैट्रिक, हायर सैकंडरी, सीनियर सैकंडरी या ग्रेजुएट हैं, मात्र इससे उसका विजडम अच्छा हो, ऐसा नहीं है। आज की शिक्षा व्यवस्था को देखकर कई बार आश्चर्य होता है। पढ़े-लिखे बच्चे और शिक्षक भी व्यावहारिक कामों में कठिनाई महसूस करते हैं। मेरे पास शिक्षक के ट्रांसफर की अर्जी आती है तो कई बार व्यक्ति अपने लिए आवेदन तक ठीक से नहीं लिख पाता और उसमें अनेक अशुद्धियां होती हैं।
Q. युवा/जेन-जी के लिए टिकटों में कोई अलग अनुपात तय किया गया है?
A. ऐसा कोई अलग अनुपात तय नहीं है। लेकिन कोशिश है कि कुछ युवाओं को अवसर दिया जाए। राजनीति की पहली सीढ़ी स्थानीय निकाय से शुरू होती है।
Q. आपके और अशोक गहलोत के बीच रिश्तों में इतनी दूरी क्यों आई?
A. 2014 में उन्होंने अपने पुत्र को मेरे सामने चुनाव लड़ाया। जनता का आदेश था कि नरेन्द्र मोदी प्रधानमंत्री बनें, इसलिए मैं जीता और उनके पुत्र को बड़ी हार मिली। इसके बाद करीब साढ़े चार साल गहलोत ने जिस तरह व्यक्तिगत रिवेंज के एटीट्यूड के साथ काम किया, उससे राजस्थान के हितों को नुकसान हुआ। यदि उस समय राजस्थान के हितों को प्राथमिकता मिलती तो प्रदेश को काफी कुछ दिया जा सकता था। मैंने हमेशा उनसे व्यक्तिगत संबंध निभाए। उनके सुख-दुख में शरीक हुआ हूं। वे राजस्थान के बड़े नेता और मारवाड़ के लिए असेट हैं।
Q. क्या भाजपा और कांग्रेस में पंच से विधायक व मेयर तक गहलोत और शेखावत ही तय करते हैं?
A. मैं कांग्रेस के बारे में नहीं कह सकता कि वहां क्या होता है। भाजपा में किसी एक व्यक्ति के स्तर पर निर्णय नहीं होता। राज्य और राष्ट्रीय स्तर के पदाधिकारी तथा पार्टी की निर्धारित प्रक्रिया के तहत टिकट तय होते हैं। मेयर और डिप्टी मेयर को लेकर भी पार्टी स्तर पर निर्णय होता है।
Q. क्या टिकट चयन में संघ की भूमिका रहेगी?
A. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भाजपा का पैतृक संगठन है और मार्ग दर्शक है। समय-समय पर विभिन्न मुद्दों पर, इनमें चुनाव भी एक है, मार्ग दर्शन लेते रहते हैं। इसमें गलत क्या है।