
महेश कुमार सोनी/फलोदी. धार्मिक व वेद पाठियों की नगरी फलोदी का अपना एक गौरवमयी इतिहास है। पहले विजयनगर फिर विजयपाटन और फिर फलवृद्धि नाम से जाने गए इस शहर का नाम फलोदी फलवृद्धि का अपभ्रंश है। कालांतर में नमक मिला तो पूरे देश में इसकी पहचान साल्टसिटी के रूप में हो गई। अब सूरज की तेज तपिश ने इस क्षेत्र को सौर ऊर्जा का हब बना दिया है। खीचन में मेहमान पक्षी कुरजां के शीतकालीन प्रवास ने फलोदी को अंन्तरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई है। बहुआयामी पहचान के बीच राजस्थान विघानसभा का एक महत्ती निर्वाचन क्षेत्र भी फलोदी है। हर चुनाव के वक्त वादों-दर-वादों के बीच यहां के मतादाताओं की अपेक्षाएं और समस्याएं बरकरार हैं।
पत्रिका टीम ने इसे जानने का प्रयास किया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। चाहे यातायात हो, सफाई व्यवस्था और जनोपयोगी सुविधाएं फलोदी वासियों की इनसे जुड़ी समस्याओं से कभी निजात नहीं मिली। इसे जिला बनते देखने की हसरत तो आज भी अधूरी है। हमारा यह सफर मां लटियाल के मंदिर से शुरू हुआ, जहां श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच आरती गूंज रही थी। संकरी गलियों के बीच वहां से गुजरने वाले लोग एक दूसरे को ‘जय श्री मां लटियाल’ कहकर अभिवादन कर रहे थे। सब्जी मण्डी पहुंचे तो आवारा पशुओं का जमावड़ा नजर आया। सब्जी मंडी तो केन्द्र है, पूरे शहर में आवारा पशुओं से लोग परेशान है। अब तक कई लोगों को आवारा पशु घायल कर चुके हैं। प्राचीन किले के पीछे पंहुचे, तो देखा कि यहां विरासत अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रही है। किले के पश्चिम की तरफ एक हिस्सा धराशायी हो रखा है। किले को जीर्णाेद्धार की दरकार है। वैदों का वास क्षेत्र में पहुंचे, वहां भी अधिकांश कलात्मक हवेलियां सूनी ही नजर आई। किले व हवेलियों का हाल सुधरे तो शहर में पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है।
त्रिपोलिया बाजार की तरफ जाते वक्त पत्थर रोड पर जगह-जगह नालियां कहीं सडक़ से ऊपर है, तो कहीं नीचे। इन पर लगवाई गई जालियां ही गायब मिली और गाड़ी हिचकोले खाती चलती रही। अव्यवस्थित सफाई का यह नमूना शहर के कई अन्य इलाकों में भी नजर आता है। पालीवाल छात्रावास के पास बहते नल से आ रहा मिट्टीयुक्त पानी पूरे शहर की इस समस्या की कहानी बयां कर रहा था। रास्ते में जगह-जगह विद्युत पोल पर बेतरतीब लाइनों के जाल हादसे को आमंत्रित करते नजर आए। समझ में आ गया कि शहर में बार-बार बत्ती गुल का कारण क्या है।
रेलवे स्टेशन पंहुचकर देखा तो सुबह जैसलमेर से जोधपुर जाने वाली रेलगाड़ी के आने का समय था। स्टेशन पर यात्रियों की भारी भीड़ थी, लेकिन छाया में खड़े हो इंतजार के लिए पर्याप्त टीनशेड नहीं थे। न तो पूछताछ केन्द्र था और ना ही एक्सप्रेस गाडिय़ों के लिए कोच इंडीकेटर। सामने स्थित राजकीय चिकित्सालय में रिक्त पदों के चलते मरीजों की कतारें मरीजों की पीड़ा बढ़ा रही थी। नई सडक़ पंहुचे तो जाम लगा था। बेतरतीब पार्किंग के चलते अव्यवस्थित यातायात और जाम रोज की समस्या है। किसी तरह जाम से निकले तो अम्बेडकर सर्किल से रेलवे क्रॉसिंग पर जाम में फंस गए। अण्डरब्रिज बने तो आवागमन सुगम हो। महीनों से सुन रहे हैं, रिटेनिंग वॉल व ब्लॉक्स भी आ गए मगर अण्डरब्रिज कब बनेगा कुछ पता नहीं।
कस्बे से बाहर निकल नेशनल हाइवे-11 का आरामदायक सफर अहसास करा रहा था कि फलोदी बड़ा शहर बनने की कगार पर है। मेहमान पक्षी कुरजां के शीतकालीन पड़ाव स्थल खीचन पंहुचे,जहां खीचन नदी में बड़ी संख्या में झाडिय़ां उगी दिखी। खीचन पहुंचने पर मेहमान पक्षी कुरजां के आसमान से कुर्र-कुर्र की आवाज से हमारा स्वागत हुआ। जो चुग्गाघर के पास उनकी खूबसूरत अठखेलियों के बीच और तेजी से सुनाई देने लगा। हैरत की बात ये है कि पर्यटन के लिहाज से इतने महत्वपूर्ण स्थान पर कुरजां को डाले जाने वाले प्रतिदिन करीब 10 क्विंटल चुग्गे की कोई जांच तक नहीं होती।
कुल मतदाता - 2,28,155
स्त्री-107597
पुरुष-120558
18-19 आयु वर्ग के मतदाता- 9675
मतदान केन्द्र - 250
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2013 का परिणाम
कुल वैध मत पड़े- 139057
पब्बाराम विश्नोई - भाजपा- 84465
ओम जोशी - कांग्रेस - 50294
जीत का अन्तर - 34171
नोटा-2556
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मुख्य समस्याएं
- फलोदी को नया जिला नहीं बनाने के कारण जिला मुख्यालय पर विभिन्न प्रकार के काम-काज के लिए लोगों को 150-250 किमी का सफर तय करना पड़ रहा है।
- राजकीय चिकित्सालय में जिला स्तरीय चिकित्सा सेवाएं व ट्रोमा सेंटर नहीं होने से गंभीर मरीजों को जोधपुर रैफर कर दिया जाता है।
- शहर में घरों से निकलने वाले गन्दे पानी की निकासी के लिए सीवरेज लाइन की कमी।
- यातायात अव्यवस्था समस्या बढ़ा रही है।
- कॉलेज में बी.एससी गणित, पीजी में विज्ञान व वाणिज्य संकाय नहीं।
- किले और अन्य धरोहरों की बदहाल तस्वीर।
- स्मैक की लत में बर्बाद हो रही युवा पीढ़ी।
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विधायक मद की स्थिति
वर्ष - वित्तीय स्वीकृति - कार्य संख्या
2014-15 - 40.952 - 12
2015-16 - 247.794 - 54
2016-17 - 204.224 - 38
2017-18 - 355.301 - 86
2018-19 - 239.088 - 42
स्वीकृतियां शेष रहीं- 13.691
क्षेत्र में रहे सक्रिय, बड़ी सौगात नहीं दिला पाए
पिछले विधानसभा चुनाव में विधायक चुने जाने के बाद पब्बाराम विश्नोई इस क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहे। वे फलोदी को जिला बनाने एवं अन्य कोई बड़ी सौगात तो नहीं दिला पाए, लेकिन जब भी मौका आया तो फलोदी के लिए बोले जरूर। गत चुनाव में कंाग्रेस ने तत्कालीन विधायक ओम जोशी को दूसरी बार चुनावी मैदान में उतारा था, लेकिन वे सीट बचा नहीं पाए। चुनाव हारने के बाद वे फलोदी क्षेत्र के विकास को लेकर या जनता की समस्याओं को लेकर लोगों की अपेक्षा के अनुरूप सक्रिय नजर नहीं आए। हालांकि वे जनता के बीच नजर जरूर आए।