
जोधपुर. जोधपुर स्थित सूरसागर में छीतर के पत्थर की खानों में सुगठित मांसल शरीर वाले जीवों के जीवाश्म मिले हैं। इडियाकारा युग (63 से 54 करोड़ वर्ष पहले) के ये जीवाश्म उस काल के पृथ्वी पर अब तक मिले सबसे बड़े जीवाश्म है। इनका आकार 32 से 84 सेंटीमीटर है। ये छिछले पानी में रहने वाली जेलीफिश, सी एनिमोन जैसे बहुकोशिकीय समुद्री जीव हैं। इनमें हड्डी नहीं होती थी। एक कोशिकीय जीवन के बाद यह बहुकोशिकीय जीवों की शुरुआत का युग था। तश्तरीनुमा इन जीवों के जीवाश्म में मुंह व गुदा साफ नजर आ रही है। कुछ जीव उल्टे हो गए थे, जिसके कारण उनका पृष्ठ ही जीवाश्म के रूप में परिरक्षित हो गया।
यह खोज जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के भू-विज्ञान विभाग ने की है। विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ वीरेंद्र सिंह परिहार ने आधा दर्जन से अधिक जीवाश्म खोजे। इनकी यह खोज अक्टूबर 2019 में स्पेन के इंटरनेशनल जर्नल ऑफ ईस्टूडियोज जियोलॉजिकोज में प्रकाशित हुई है। इडियाकारा युग का अब तक का सबसे बड़ा जीवाश्म 75 सेंटीमीटर का था। वह भी लखनऊ विवि के एक शोध में जोधपुर में ही मिला था। पृथ्वी के अन्य हिस्सों में इस युग के 50 सेंटीमीटर से अधिक बड़े जीवाश्म नहीं मिलते हैं।
क्या है इडियाकारा युग
सर्वप्रथम इस युग के जीवाश्म ऑस्ट्रेलिया की इडियाकारा पहाड़ी पर मिलने के कारण इसका नाम इडियाकारा युग रख दिया गया। इसमें मेटाजोआ संघ के मांसल शरीर वाले समुद्री व स्थलीय जीव थे। इनमें कई तरह की जेलीफिश, स्टारफिश, सी अॢचन, छोटी समुद्री मछलियां, क्रेब, स्पाइडर, कीड़े, घोंघे, स्क्वीड शामिल है।
समुद्र से साइबेरिया से जुड़ा हुआ था जोधपुर
सूरसागर में मिलने वाले ये जीवाश्म इस बात की ओर इंगित करते हैं कि जोधपुर में समुद्र का छिछला किनारा था। ऐसे जीवाश्म ऑस्ट्रेलिया के न्यू फाउण्डलैंड और रुस के साइबेरिया में है। इससे यह पता चलता है कि जोधपुर समुद्र के जरिए मध्यप्रदेश के विंध्यन समुद्र व हिमालय के कोरिडोर से होता हुआ साइबेरिया से जुड़ा हुआ था।
‘इडियाकारा युग के जीवाश्म मिलने से बहुकोशिकीय जीवन के विकास प्रक्रम को समझने में मदद मिलेगी। यह खोज एककोशिकीय से बहुकोशिकीय व हड्डी वाले जीवों की विकास कड़ी बताएगा।’
डॉ. वीरेंद्र सिंह परिहार, भू-विज्ञान विभाग, जेएनवीयू जोधपुर