जोधपुर

राजस्थान के 3 हजार मदरसों पर हाईकोर्ट की नजर, सरकार से मांगा पूरा हिसाब

राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश में संचालित करीब 3 हजार मदरसों के प्रभावी प्रबंधन, नियंत्रण, संचालन और शिक्षा व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। कोर्ट ने सरकार को हलफनामा पेश कर यह बताने के निर्देश दिए हैं कि मदरसों की व्यवस्था में सुधार और प्रभावी निगरानी के लिए वर्तमान में क्या कदम उठाए जा रहे हैं और आगे क्या कदम प्रस्तावित हैं।
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Sep 29, 2026
rajasthan high court
राजस्थान हाईकोर्ट (File Photo)

जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश में संचालित करीब 3 हजार मदरसों की व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है। न्यायाधीश विनीत कुमार माथुर और न्यायाधीश चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने सरकार को हलफनामा पेश कर मदरसों के प्रभावी प्रबंधन, नियंत्रण, संचालन और शैक्षणिक पर्यवेक्षण के लिए उठाए जा रहे तथा प्रस्तावित कदमों का विवरण देने के निर्देश दिए हैं।

यह मामला प्रतिपाल सिंह व अन्य की याचिकाओं से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान याचिका में प्रदेश के मदरसों की मौजूदा प्रशासनिक और शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर उठाए गए सवालों पर चर्चा हुई। कोर्ट ने राज्य सरकार को याचिका में दिए गए सुधार संबंधी सुझावों पर भी विचार करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 को होगी।

मदरसों के संचालन और निगरानी पर सवाल

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मोती सिंह राजपुरोहित ने मदरसा व्यवस्था में सुधार के लिए कई सुझाव अदालत के समक्ष रखे। इनमें आरबीएसई और सीबीएसई से संबद्ध मदरसों की सूची तैयार करने तथा मदरसों के पंजीयन की समीक्षा करने की मांग शामिल है।

याचिका में प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर के मदरसों के लिए शिक्षा विभाग की ओर से निर्धारित पाठ्यक्रम लागू करने और समान परीक्षा व्यवस्था की जरूरत बताई गई है। साथ ही मदरसा बोर्ड के पोर्टल पर विद्यार्थियों का डिजिटल रिकॉर्ड दर्ज करने और प्रत्येक विद्यार्थी के लिए विशिष्ट पहचान संख्या तैयार करने का सुझाव दिया गया है।

शिक्षकों की योग्यता और मानदेय का मुद्दा

याचिकाकर्ता की ओर से मदरसों में शिक्षकों की निर्धारित शैक्षणिक योग्यता सुनिश्चित करने का मुद्दा भी उठाया गया। सुझाव में कहा गया कि जिन शिक्षकों के पास निर्धारित योग्यता नहीं है, उन्हें वेतन या मानदेय नहीं दिया जाना चाहिए। मदरसों में शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप करने का सुझाव भी रखा गया।

इसके अलावा याचिका में मदरसा संस्थानों को मिलने वाले अनुदान और वित्तीय सहायता की समीक्षा, डाइट के माध्यम से समान परीक्षा आयोजित कराने तथा मानकों का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के पंजीयन की समीक्षा जैसे मुद्दे भी उठाए गए हैं।

गैर-मुस्लिम बच्चों की शिक्षा का भी मुद्दा

याचिका में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सिफारिशों के संदर्भ में गैर-मुस्लिम बच्चों की शिक्षा और आरटीई अधिनियम के तहत सामान्य शिक्षा उपलब्ध कराने से जुड़े मुद्दे भी रखे गए हैं।

अब हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से इन सभी पहलुओं पर उसका पक्ष स्पष्ट करने को कहा है। सरकार को 27 अक्टूबर तक विस्तृत हलफनामा पेश करना होगा। इसके बाद अदालत मामले में आगे की सुनवाई करेगी।

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Updated on:
29 Sept 2026 09:29 pm
Published on:
29 Sept 2026 09:24 pm