जोधपुर

मोदी-गहलोत का स्मार्ट सिटी वार : पढिये आखिर क्यों नहीं बन पाया हमारा जोधपुर स्मार्ट

- तीन साल पहले जोधपुर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में शामिल होने से रह गया था- प्रदेश के चार शहरों का इस प्रोजेक्ट में चयन हुआ
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Sep 29, 2018
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मोदी-गहलोत का स्मार्ट सिटी वार : पढिये आखिर क्यों नहीं बन पाया हमारा जोधपुर स्मार्ट

जोधपुर. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी शुक्रवार को जोधपुर में थे। कोणार्क कोर स्टेडियम में जब वे सैन्य प्रदर्शनी का उद्घाटन कर रहे थे तो पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोशल मीडिया पर एक ट्विट कर जोधपुर की पुरानी मांग फिर उठा दी। सोशल मीडिया पर गहलोत की यह मांग वायरल हो गई और जोधपुर के लोगों का दर्द फिर सामने आ गया। यह मांग थी स्मार्ट सिटी की।
तीन साल पहले केन्द्र सरकार की स्मार्ट सिटी योजना जो कि कई मायनों में अहम थी। जोधपुर समेत प्रदेश के सात शहरों ने हिस्सा लिया। लेकिन प्रदेश के दूसरे सबसे बड़े शहर जोधपुर को छोड़ जयपुर, अजमेर, कोटा और उदयपुर को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए चुना गया। तब भी यह मामला जोर-शोर से उठा कि जोधपुर की राजनीतिक उपेक्षा हुई है। पूर्व मुख्यमंत्री का गृह नगर होने के नाते यहां सुविधाएं देने के नाम पर केन्द्र और राज्य सरकार ने राजनीति की है। अब प्रधानमंत्री मोदी जब एक बार फिर जोधपुर आए तो पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने यह मामला उठा नई बहस को जन्म दे दिया है।

गहलोत ने यह लिखा ट्वीट में
‘राजस्थान का दूसरा सबसे बड़ा शहर होने के बावजूद सरकार ने जोधपुर को स्मार्ट सिटी घोषित नहीं किया। प्रधानमंत्री जोधपुर पधारे हैं, माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मेरी मांग है कि जाने से पहले जोधपुर को भी स्मार्ट सिटी घोषित करके जाएं।’
राजनीतिक दांव खेल गए
मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बीच तो आरोप-प्रत्यारोप के दौर चलते रहते हैं। लेकिन मोदी जो कि चुनावी रण में गेम चेंजर माने जाते हैं, मारवाड़ की राजनीति राजधानी में आए। विधानसभा चुनाव में भाजपा को सबसे कड़ी टक्कर गहलोत ही दे सकते हैं। एेसे में जोधपुर में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पहले हमला बोल जा चुके हैं और अब प्रधानमंत्री मोदी का जोधपुर दौरा कई मायनों में अहम था। हालांकि मोदी ने कोई राजनीतिक बयानबाजी सार्वजनिक नहीं की। लेकिन उनकी उपस्थिति ही राजनीतिक गलियारों में महत्वपूर्ण थी। एेसे में गहलोत ने जोधपुर का यह दर्द उठा कर जोधपुर वासियों की सहानुभूति लेने का कार्ड खेला।

स्मार्ट सिटी से लाभ
- २४ घंटे बिजली-पानी के लिए प्रोजेक्ट आते
- १०० करोड़ रुपए प्रति वर्ष शहर को केन्द्र सरकार अपने मद से विकास कार्य के लिए देती। यह राशि पांच तक मिलती।
- चिकित्सा व्यवस्था बढ़ती और आपातकालीन यूनिट एम्स की तर्ज पर होती।
- वाई-फाई जोन शहर में कई जगह बनते।
- युवाओं के लिए डेटा बेस केन्द्र और रोजगार के अवसर बढ़ते।
- नई टाउनशिप योजनाएं भी मिलती।
अधिकारियों ने दिए ८२ अंक फिर भी पिछड़ गया
स्मार्ट सिटी में जोधपुर राजनीति का शिकार हुआ। स्मार्ट सिटी परिणाम आने से पहले नगर निगम अधिकारियों ने अपने स्व मूल्यांकन में १०० में से ८२.५ अंक दिए थे। इसमें स्वच्छ भारत, ऑन शिकायत निवारण प्रणाली, मासिक ई-पत्रिका, आंतरिक अंशदान, वेतन भुगतान जैसे कई मुद्दों पर मार्र्किंग की गई थी। इसी लिहाज से जनप्रतिनिधि और अधिकारी आश्वस्त थे कि जोधपुर स्मार्ट सिटी बन जाएगा।
जो कमियां पहले थी वह आज भी
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में राजनीतिक द्वेष तो दिखा ही साथ ही कागजा में जो कमियां रह गई थी वह शहर में आज भी धरातल में मौजूद है। जैसे कई जगह कचरे ढेर जो पहले भी नम्बर कटवाने का कारण बने वह समस्या आज भी विद्यमान है। इसी प्रकार एप डाउनलोड, उस पर समस्या का समाधान में भी जोधपुर पिछड़ा। अब इस एप की कोई उपयोगिता ही नहीं है। इसके अलावा पब्लिक फीडबैक में भी हमारा शहर पिछड़ गया था।

Updated on:
29 Sept 2018 06:31 pm
Published on:
29 Sept 2018 06:31 pm