जोधपुर

Sadhvi Prem Baisa: साध्वी प्रेम बाईसा मौत मामला: मामा ने तोड़ी चुप्पी, सोशल मीडिया विवाद पर रखी सच्चाई

Sadhvi Prem Baisa death Update: कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा (23) की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद शुक्रवार को संत परंपरा के अनुसार उन्हें समाधि दी गई।

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Jan 31, 2026
Sadhvi Prem Baisa Death Case (Patrika Photo)

Sadhvi Prem Baisa death: जोधपुर। कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा (23) की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के बाद शुक्रवार को संत परंपरा के अनुसार उन्हें समाधि दी गई। इस घटना को लेकर जहां एक ओर पिता ने गलत इंजेक्शन से मौत का आरोप लगाया है, वहीं कुछ भक्तों ने पूरे घटनाक्रम को लेकर सवाल उठाए।

बुधवार को तबीयत बिगड़ने पर साध्वी प्रेम बाईसा को जोधपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनका निधन हो गया। इस दौरान सोशल मीडिया पर एक कथित सुसाइड नोट सामने आया।

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मामा बोले-वीडियो को गलत तरीके से पेश किया गया

इधर, साध्वी प्रेम बाईसा के मामा गंगाराम ने एक निजी न्यूज चैनल से बातचीत के दौरान उनके जीवन से जुड़े कई अहम पहलुओं को उजागर किया। उन्होंने कहा कि जिस वीडियो को लेकर विवाद खड़ा हुआ था, उसे गलत तरीके से पेश किया गया। उस वीडियो के बाद फैली अफवाहें से परिवार को गहरा मानसिक आघात पहुंचा था।

पिता-पुत्री के रिश्तों को लेकर उठ रहे सवालों पर गंगाराम ने स्पष्ट किया कि दोनों का संबंध पूरी तरह पवित्र और सम्मानजनक था। बता दें कि जुलाई 2025 में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था। जिसमें साध्वी एक आदमी को गले लगाते हुए दिखाई दे रही थी। इसके बाद उनके अनुयायियों और अन्य लोगों ने तीखी प्रतिक्रियाएं दी थीं। साध्वी ने उस वीडियो को लेकर नाराजगी जताते हुए पुलिस में एफआईआर करवाई थी, और इस मामले में एक आरोपी की गिरफ्तारी भी हुई थी।

पिता बोले-मैं हर तरह की जांच को तैयार

साध्वी के पिता वीरमनाथ ने बताया कि उन्हें केवल मामूली जुकाम था और जोधपुर के एक आश्रम में इंजेक्शन लगाए जाने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ी, जिसके बाद अस्पताल में मौत हो गई। वीरमनाथ ने कहा कि मैं हर तरह की मेडिकल जांच के लिए तैयार हूं, प्रशासन जो कहेगा, उस पर हस्ताक्षर करने को भी तैयार हूं।

परेऊ की बेटी से जोधपुर की 'साध्वी' तक का सफर

मूल रूप से बालोतरा के परेऊ गांव की रहने वाली प्रेम बाईसा का जीवन संघर्षों और अध्यात्म से भरा रहा। मात्र 2 साल की उम्र में मां को खोने के बाद पिता उन्हें जोधपुर ले आए। संत राजाराम और संत कृपाराम महाराज के सानिध्य में उन्होंने भागवत कथा और भजन सीखे। अपनी सुरीली आवाज और ज्ञान के कारण वे जल्द ही घर-घर में प्रसिद्ध हो गईं।

बाद में उन्होंने पाल रोड पर 'साधना कुटीर' बनाया, जिसके उद्घाटन में योग गुरु बाबा रामदेव जैसी हस्तियां पहुंची थीं। प्रेम बाईसा की मौत सिर्फ एक धार्मिक हस्ती का जाना नहीं है, बल्कि इसके पीछे छिपे रहस्य ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या यह एक स्वाभाविक मौत थी या किसी गहरी साजिश का हिस्सा? इसका जवाब अब एसआईटी की जांच में ही मिलेगा।

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Published on:
31 Jan 2026 02:48 pm
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