
- 41 विभाग नहीं निपटा सके 14 हजार से अधिक शिकायतें
- स्थानीय निकायों में 4756 शिकायतें लंबित
- जेएनवीयू में 171 शिकायतें, एक का भी समाधान नहीं
कुणाल पुरोहित
जोधपुर. मुख्यमंत्री की संपर्क पोर्टल योजना शिकायतों के समाधान से दूर होती जा रही है। यहां आने वाली शिकायतों पर अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। न तो शिकायतों पर सुनवाई हो रही है और न ही उनका निस्तारण। शिकायतों के निस्तारण के लिए संबंधित अधिकारियों 15 दिन का समय दिया जाता है। इस अवधि में निस्तारण नहीं होने पर यह शिकायतें आगे से आगे बढ़ती जाती हैं। इसका अंतिम पड़ाव चौथा चरण है, जिसे विभाग का सबसे बड़ा अधिकारी देखता है। यह बात दीगर हैं कि चारों पड़ावों पर सम्पर्क पोर्टल विफल साबित हो रहा है। हाल ये हैं कि 41 विभागों की सूची में 14 हजार से अधिक शिकायतें समाधान की बाट जोह रही है। संपर्क पोर्टल की इस कार्यप्रणाली से नाराज जिला कलक्टर ने अधिकारियों की बैठक भी ली थी। स्थानीय निकायों के हाल सबसे ज्यादा खराब है। इस विभाग में शिकायतों की संख्या 4756 पार कर गई है। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय की 171 शिकायतें चौथे चरण में पहुंच चुकी हैं। इनमें एक का भी निस्तारण नहीं हुआ है।
दबी पड़ी है मूलभूत सुविधाओं की शिकायतें
41 विभागों की लगभग 14 हजार से अधिक शिकायतें समाधान के इंतजार में अटकी हुई हैं। इसमें नगर निकाय, पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास, जलदाय, सार्वजनिक निर्माण विभाग व मनरेगा में मिलाकर 11 हजार 475 शिकायतों का समाधान नहीं हुआ है।
दे दी जाती है गलत जानकारी तकहाल ही गुलाब सागर का बच्चा में गिर रहे गंदे पानी की शिकायत क्षेत्र के लोगों ने की थी। शिकायत के समाधान के जवाब में पोर्टल पर दर्शाया गया था कि सीवरेज व रासायनिक पानी को गुलाब सागर का बच्चा में मिलने से रोक दिया गया है। मौके पर स्थिति इससे उलट है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि अब भी जलाशय में गंदगी मिल रही है। ऐसे अन्य कई उदाहरण हैं।
केस नंबर - 1
बिना समाधान निकाल दिए 900 दिन
संपर्क पोर्टल पर चौथे चरण की सबसे ज्यादा अटकी हुई शिकायतें जेएनवीयू से संबंधित हैं। इनमें से बीस शिकायतें तो शिकायतकर्ता ओमप्रकाश भाटी की है। भाटी बताते हैं कि शिक्षक भर्ती घोटाले को लेकर की गई नौ शिकायतें काफी पुरानी हो चुकी हैं। दो शिकायतें 974 और 889 दिन पुरानी हैं। दो शिकायतें 339 दिन पुरानी है, जबकि पांच शिकायतें लगभग 225 दिन पुरानी हंै। इनमें से किसी भी शिकायत का समाधान नहीं किया गया है।
केस नंबर - 2
जवाब मिला-नई रोड जितना बजट नहीं
पहाडग़ंज द्वितीय निवासी श्यामसुंदर साद ने नगर निगम में दो शिकायतें दर्ज करवाई। अब तक समाधान हुआ है। उन्होंने क्षतिग्रस्त सड़क पर पेचिंग नहीं होने की शिकायत की। इस पर निगम ने जवाब में कहा कि नई सड़क बनाने जितना बजट नहीं है। इसके बाद शिकायत ही बंद कर दी गई। इसके अलावा आवारा पशुओं को पकडऩे के लिए भी संपर्क पर शिकायत दी हुई है। इसका भी समाधान नहीं हुआ है।
केस नंबर- 3
जनसुनवाई में अपील, नहीं मिली राहत
दर्पण सिनेमा के निकट रहने वाली शमीम चार-पांच सालों से पड़ोस के जर्जर मकान को गिराने के लिए चक्कर लगा रही है। अब तक उनको राहत नहीं मिली है। शमीम बताती हैं कि उन्होंने अपनी मां बरकत के नाम से संपर्क पर शिकायतें दर्ज करवाई। जनसुनवाई में जिला कलक्टर और नगर निगम के अधिकारियों से गुहार की। निगम ने जर्जर मकान को नहीं गिराया है। बारिश के दिनों में इसके धराशायी होने का खतरा और बढ़ जाएगा।
बैठक में दिए दिशा-निर्देश
संपर्क पोर्टल पर लगातार बढ़ रही शिकायतों पर जिला कलक्टर ने सभी विभाग के अधिकारियों की बैठक ली थी। इसमें उनको जल्द से समस्याओं का निस्तारण करने के दिशा-निर्देश दिए हैं।
मानाराम पटेल, एडीएम तृतीय