
जोधपुर . जिले में जोलियाली गांव के आथूणी ढाणी में पहली बार 'एल्बिनो' चिंकारा मिला है। सफेद रंग का चिंकारा वन्यजीव प्रेमियों में कौतुहल का विषय बना हुआ है। सफेद चिंकारा के छौना को श्वानों के हमले से बचाकर क्षेत्र के खेमाराम विश्नोई परिवार के सदस्यों ने सुरक्षित घर पर के बाद वनविभाग के अधिकारियों को सूचित किया। वन्यजीव चिकित्सक डॉ. श्रवणसिंह ने बताया कि वन विभाग के कर्मचारी की देखरेख में सफेद छौने प्राकृतिक वातावरण में रखकर उसका पालन-पोषण किया जा रहा है। जिले में पहली बार एल्बिनो चिंकारा देखा गया है।
वन्यजीव गणना में नहीं
पश्चिमी राजस्थान के विभिन्न जिलों की वन्यजीव गणना में पिछले करीब तीन दशकों में कभी सफेद चिंकारा नहीं देखा गया। लाखों में एक वन्यजीव के ब्रीडिंग जीन्स के अंदर उत्परिवर्तन के फलस्वरूप वन्यजीव का ब्राह्य आकार अथवा रंग परिवर्तन होता है। इसे एल्बीनो अथवा अनुवांशिकी विभेद कहा जाता है। एल्बीनो की त्वचा में मेलनिन एंजाइन की कमी होने से उसका रंग सफेद हो जाता है।
मेलेनिन नामक वर्णक का अभाव
अनुवांशिक रूप से जीन के बनावट से एेसे चिंकारों का जन्म होता है। इनमें मेलेनिन नामक वर्णक का अभाव होता है। इनका जीवनकाल साधारण चिंकारा से कम होता है। सफेद कौआ, सफेद टाइगर, सफेद नाग, सफेद मोर व मवेशियों में एेसे मामले मिलते हैं। ये अप्रभावी जीन का गुण है और दो अप्रभावी जीन साथ आने पर संतान एल्बिनो पैदा होती है।
डॉ. सुमित डूकिया, वन्यजीव विशेषज्ञ
स्वस्थ है छौना
जोलियाली में मिला सफेद छौना स्वस्थ है। करीब डेढ़ साल पहले सीमावर्ती क्षेत्र बाड़मेर के एडो का तल्ला सोडियार से सफेद चिंकारा घायल अवस्था में जोधपुर के रेस्क्यू सेंटर रेफर किया गया था। कंटीली तारों में उलझने से उसका अगला व पिछला पैर क्षतिग्रस्त होने के बाद उसे बचा लिया गया था। कुछ अर्से बाद उसकी मौत हो गई थी।
डॉ. श्रवणसिंह राठौड़, वन्यजीव चिकित्सक, माचिया जैविक उद्यान, जोधपुर