
Chhattisgarh News: कांकेर जिले में आदिम जाति कल्याण विभाग की लापरवाही एक बार फिर सवालों के घेरे में है। 10 दिनों के भीतर मरदापोटी बालक आवासीय आश्रम के एक और छात्र की मलेरिया से मौत हो गई। 24 जुलाई को रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद छात्र का इलाज मातृत्व एवं शिशु अस्पताल में चल रहा था, जहां उसने दम तोड़ दिया। बता दें कि मलेरिया से मरने वाले छात्रों की संख्या बढ़कर दो हो गई है, वहीं दूसरी ओर दूसरे हॉस्टल में रहने वाले 11 बच्चों के रिपोर्ट भी पॉजिटिव आए हैं।
आश्रम के दो अन्य छात्र भी इसी अस्पताल में भर्ती हैं। घटना पर सफाई देते हुए आदिम जाति कल्याण विभाग कांकेर की अधिकारी जया मानिकपुरी (जयामनु) ने बताया कि 22 जुलाई को स्वास्थ्य विभाग की टीम ने आश्रम के सभी बच्चों की मलेरिया जांच की थी। तब कुछ बच्चों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी और मृतक छात्र की रिपोर्ट नेगेटिव थी। 24 जुलाई को तबीयत बिगडऩे पर दोबारा जांच में उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई। 25 जुलाई की सुबह परिजन बच्चे को घर ले गए थे, जिसके बाद हालत बिगडऩे पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मृत्यु हो गई।
अधिकारी ने कहा कि अचानक तबीयत बिगडऩा समझ से परे है। घटना के बाद विभाग सतर्क हो गया है और चिरायु टीम के सहयोग से जिले के सभी आश्रमों-छात्रावासों में विशेष स्वास्थ्य जांच अभियान चलाया जा रहा है। लगातार दो मौतों से व्यथित ग्रामीणों व स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई करने तथा छात्रावासों में पुख्ता स्वास्थ्य इंतजाम की मांग की है।
डा. आरसी ठाकुर, सीएमएचओ कांकेर ने कहा कि 22 तारीख तक तो कोई पॉजिटिव भी नहीं आया था। हमारी टीम 22 तारीख को भी जांच के लिए गई थी। लेकिन 24 तारीख को जब पुनः आए तब कुछ पॉजिटिव मिले और आज भी जांच कराई तो कुल 8 केस पॉजिटिव आए हैं। इरादा में अभी 3 केस पॉजिटिव आए हैं। उन्होंने कहा कि आमतौर पर मलेरिया इतना तेजी से नहीं फैलता, लेकिन इस बार अचानक मलेरिया में कन्वर्ट हो रहा है। मलेरिया अपने आप में जानलेवा बीमारी हो जाती है। सीएमएचओ ने बताया कि विभाग की टीम हॉस्टल-आश्रम जाकर लगातार परीक्षण कर रही है। हम लोग एक्टिव हैं, दवाई भी खिला रहे हैं। लेकिन ये 24 तारीख के बाद ही अचानक आउटब्रेक हुआ है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे, दवा वितरण और फॉगिंग कर रही हैं।