कन्नौज के कटरी इलाके के वे गांव जो गंगा के किनारे बसे हैं आज भी शौचमुक्त नहीं हो पा रहे हैं, महिलाएं रात में भी खेत में जाती हैं शौच करने
कन्नौज. जिले के कटरी क्षेत्र के वे गांव जो गंगा के किनारे बसे हैं आज भी शौचमुक्त नहीं हो पा रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी यहां की महिलाओं को उठाना पड़ता है। ग्रामीणों की मानें तो इन्होंने कई अधिकारियों के सामने शौचालयों की मांग रखी, लेकिन इनकी मांगों पर कोई तवज्जो नहीं दिया गया, जिससे कटरी क्षेत्र में गंगा के किनारे आने वाले दर्जनों गांव के बाशिंदे आज भी खुले में शौच करने को मजबूर हैं। जबकि अधिकारी जिले के शहरी क्षेत्र में आने वाले गांवों में खुद जाकर शौचालय निर्माण की गतिविधियों पर नजर रख रहे हैं।
सरकार चाहें जितने दावे कर ले लेकिन उन दावों की सच्चाई अगर देखें तो दावे खोखले नजर आते हैं। गंगा के किनारे बसे गांव की सच्चाई भी सबके सामने आज हम रख रहे हैं। यहां ग्रामीण आज भी खुले में शौंच करने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार शौचालय के नाम पर सिर्फ धोखा दे रही है। शौंचालय का एक भी रुपया उनको नहीं दिया जा रहा है, जिससे वह शौंचालय का निर्माण कर सकें।
ग्रामीणों का कहना है कि शौचालय के लिए ग्रामीणों ने कई प्रयास किये। गरीबी के कारण उन्होंने सरकार से मदद भी मांगी और शौचालय के लिए फार्म भी भरा, लेकिन आज तक उनको सरकार द्वारा कोई मदद मुहैया नहीं कराई गई।
6 महीने पहले फार्म भरवाया, आज तक शौचालय नहीं मिला
मेंहदीपुर गांव के रहने वाले अनुज ने बताया कि उसके घर में शौचालय नहीं है जिसकी वजह से वह खुले में शौच करने आता है। शौचालय बनवाने के लिए उसने सरकार से मदद भी मांगी, फार्म भी भरा लेकिन अधिकारी उसको आश्वासन के अलावा और कुछ नहीं दे पाये। धीरे-धीरे 6 माह बीत गये लेकिन अभी तक उसकोशौचालय नहीं मिल पाया। इसी तरह से चिंतामण गांव के रहने वाले फूल सिंह ने बताया कि उनके यहां भी शौचालय नहीं बना है। अधिकारी गांव के फार्म भर ले गये थे और कहा था कि जल्द ही आपकी लेट्रीन आ जायेगी, लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ।
खानापूर्ति कर लौट जाते है अधिकारी
मित्रसेनपुर गांव के रहने वाले अविनाश का कहना है कि उनके घर में शौचालय नहीं है। सरकार से इसका लाभ पाने के लिए उन्होंने फार्म भी भरा था, लेकिन उसको शौचालय बनाने के लिए पैसा नहीं दिया गया। उन्होंने बताया कि अधिकारी मौके पर आकर केवल खानापूर्ति करके चले जाते हैं। हम लोगों की कोई सुनवाई नहीं हुई है।
रात में भी खेत में करते हैं शौच
सलेमपुर ताराबांगर के रामदुजे ने बताया कि उनके यहां भी शौचालय नहीं बना है। इसके चलते उनको खेत में खुले में शौच करने आना पड़ता है। उनका कहना है कि अधिकारी केवल झूठ बोलकर हम लोगों को अश्वासन देती है, लेकिन हकीकत मेें यह सब सुनने को है।