Blood letter written to PM against UGC कानपुर में यूजीसी कानून के खिलाफ आक्रोशित लोगों ने प्रदर्शन किया। इस मौके पर जमकर नारेबाजी की गई। यूजीसी के खिलाफ एक युवक ने प्रधानमंत्री को अपने खून से पत्र लिखा है।
Blood letter written to PM against UGC कानपुर में यूजीसी (UGC) कानून के खिलाफ जबरदस्त प्रदर्शन किया गया। जिलाधिकारी कार्यालय में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा और सवर्ण आर्मी के कार्यकर्ताओं ने जमकर प्रदर्शन किया। इस मौके पर यूजीसी कानून के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। हाथों में तख्तियां पकड़े कार्यकर्ताओं ने कानून वापस लेने की मांग की। दूसरी तरफ यूजीसी कानून के खिलाफ प्रधानमंत्री को खून से पत्र लिखा गया है। जिसका एक वीडियो भी वायरल हुआ है। वीडियो वायरल करने वाले ने बताया है कि वह पूरी तरह स्वस्थ है।
उत्तर प्रदेश के कानपुर में यूजीसी कानून के खिलाफ विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। जब जिलाधिकारी कार्यालय में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा और सवर्ण आर्मी के कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी कार्यालय में प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। इस मौके पर उन्होंने यूजीसी कानून के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह कानून नहीं बल्कि तानाशाही है।
अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा के मंडल अध्यक्ष महेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि यूजीसी कानून की आड़ में समाज को तोड़ने और बांटने का काम किया जा रहा है। जिसका महासभा विरोध करती है। उनकी मांग है कि कानून को तत्काल वापस लिया जाए। छात्र नेता अभिजीत राय ने कहा कि यह कानून नहीं बल्कि तानाशाही है।
सवर्ण आर्मी के जिला महासचिव अमित मोहन शुक्ला ने भी यूजीसी कानून के खिलाफ बयान दिया है। उन्होंने कहा कि सवर्ण पर जुर्म और अत्याचार करने और कुछ लोगों को खुश करने के लिए यह कानून लाया गया है। उन्होंने सवाल किया कि यदि आप झूठ साबित होते हैं तो क्या मानहानि की क्षतिपूर्ति होगी? सरकार ने "बंटोगे तो कटोगे" का नारा दिया था। अब खुद क्या कर रहे हैं? यह काला कानून सरकार वापस ले।
यूजीसी कानून के खिलाफ सनातन मठ मंदिर रक्षा समिति के सदस्य आकाश ठाकुर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने खून से लिखा पत्र भेजा है। खून निकलते समय उन्होंने अपना एक वीडियो भी बनाया है। जिसमें वह बोल रहे हैं कि वह पूरी तरह स्वस्थ हैं और यूजीसी कानून वापस लेने के लिए यह पत्र लिख रहे हैं।