ज़रा सोचिए कि घर में कॉकरोच को देखकर उछल पड़ने वालों के लिए ये कितनी बड़ी खबर होगी. घर तो घर अब ट्रेन के एसी कोच में भी इनका आतंक झेलना पड़ेगा. वो भी इतने पैसे खर्च करने के बाद.
कानपुर। ज़रा सोचिए कि घर में कॉकरोच को देखकर उछल पड़ने वालों के लिए ये कितनी बड़ी खबर होगी. घर तो घर अब ट्रेन के एसी कोच में भी इनका आतंक झेलना पड़ेगा. वो भी इतने पैसे खर्च करने के बाद. आपके दिमाग में भी यही सब चल रहा है न ये सुनने के बाद. अब ऐसा होना लाज़मी भी है. वैसे आप बिल्कुल सही सुन रहे हैं. रेलवे में ट्रेनों के एसी कोच में कॉकरोच के आतंक की खबरें सामने आ रही हैं.
ऐसा है वाक्या
दरअसल ये वाक्या उठता है गोरखपुर से सिकंदराबाद जाने वाली 12589 सुपरफास्ट एक्सप्रेस के एसी कोच से. ट्रेन के एसी कोच में कॉकरोच ने यात्रियों को बुरी तरह से परेशान करके रख दिया. कुछ देर तो यात्री उसके साथ जूझते रहे. इसके बाद भी उससे निजात न मिल पाने पर ट्रेन के स्टाफ से इसकी शिकायत की गई. फिर भी कोई सुनवाई नहीं हुई.
ऐसी मिली है जानकारी
आखिर में हर तरफ से परेशान होने के बाद यात्रियों ने रेलमंत्री को फोटो के साथ ट्वीट किया. गौरतलब है कि कानपुर सेंट्रल पर यह ट्रेन दोपहर 15.50 बजे आती है. ओईएफ फूलबाग में काम करने वाले समीर बाजपेई इस ट्रेन में सफर कर रहे थे. इनका ट्रेन के बी-3 कोच में रिजर्वेशन था. जब वह कोच में अपनी सीट पर पहुंचे तो आसपास काफी कॉकरोच कोच में थे.
कर दिया ट्विट
इन्हें देखकर भी कुछ देर तक तो समीर शांति से बैठे रहे, लेकिन उसके बाद खुद को नहीं रोक सके. ये कॉकरोच यात्रियों पर भी चढ़ रहे थे और उनको परेशान कर रहे थे. यात्रियों ने कोच अटेनडेंट व टीटीई से भी इसकी शिकायत की, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नही हुई. इसके बाद समीर ने कॉकरोच के साथ फोटो क्लिक करके तुरंत उसको रेलमंत्री को ट्विटर के जरिए इसकी शिकायत भेजी.
बड़ी है ये समस्या
अभी फिलहाल उनके इस मैसेज का कोई रिप्लाय नहीं आया है, लेकिन उनको इंतजार है कि आखिर कब उनकी इस समस्या पर सुनवाई होगी, जो सिर्फ उनकी नहीं है. वैसे देखा जाए तो ये कोई छोटी-मोटी समस्या नहीं है. बल्कि बहुत बड़ी समस्या है. हर बार ट्रेनों में सफाई का दम भरने वाले अधिकारी अब भला चुप क्यों बैठे हैं.
पेंट्री का क्या होगा
सोचने वाली बात ये भी है कि बीमारी के दूत बनकर आए ये कॉकरोच अगर एसी कोच में हैं तो पेंट्री में भला कैसे नहीं होंगे. वही पेंट्री जहां ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों के लिए खाना बनता है और अगर ये यहां भी हैं तो बीमारी फैलने की संभावना कितनी बढ़ जाती है. ऐसे में यात्रियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा की गारंटी कौन लेगा.