शहर में खरबों रुपए की शत्रु संपत्‍तियों पर कब्‍जा कर गलत तरीके से कराई गई रजिस्‍ट्रियों को निरस्‍त कर दिया गया है. हजारों गज जमीन पर मालिकाना हक अब कब्‍जेदारों का नहीं रहा. शहर की 12 शत्रु संपत्‍तियां अब जिलाधिकारी की अभिरक्षा में आ चुकी हैं.
कानपुर। शहर में खरबों रुपए की शत्रु संपत्तियों पर कब्जा कर गलत तरीके से कराई गई रजिस्ट्रियों को निरस्त कर दिया गया है. हजारों गज जमीन पर मालिकाना हक अब कब्जेदारों का नहीं रहा. शहर की 12 शत्रु संपत्तियां अब जिलाधिकारी की अभिरक्षा में आ चुकी हैं. स्वरूप नगर की जिन महंगी संपत्तियों पर बिल्डर्स और भूमाफियाओं की नजर थी, वह भी जिलाधिकारी की कस्टडी में आ चुकी हैं. इन पर जिनके नाम की रजिस्ट्रियां हैं, वह निरस्त कर दी गई हैं.
जिलाधिकारी की अभिरक्षा में हैं ये शत्रु संपत्तियां
13/389 परमट, 13/390 परमट, 91/146 हीरामन का पुरवा, 116/630 गार्डन (रावतपुर गांव), 91/71 दलेलपुरवा, 41/39 नई सड़क, 41/125 नई सड़क, 93/124 अनवरगंज, 93/110 अनवरगंज, 7/190 बशीरबाग स्वरूप नगर, 7/189 ए, बी, सी, स्वरूपनगर और 100/406 कंघी मोहाल की संपत्तियां डीएम की अभिरक्षा में आ गई हैं.
दो संपत्तियों पर 25 हजार गज जमीन
शहर की 12 शत्रु संपत्तियों में सिर्फ दो पते पर 25 हजार गज जमीन पर 71 मकान बने हुए हैं. इनपर लोगों ने अपने नाम की रजिस्ट्रियां करा ली हैं, जो अब खत्म कर दी गई है. अब इन संपत्तियों पर डीएम कानपुर का नाम चढ़ा दिया गया है. 116/630 गार्डन (रावतपुर गांव) के नाम दर्ज जगह पर 63 मकान बने हैं. ये 18 हजार गज जमीन है, जिसे रोशन नगर में बशीर का बगीचा नाम से भी जाना जाता है. वहीं 91/146 हीरामन का पुरवा की सात हजार गज जमीन पर आठ लोगों की रजिस्ट्रियां हैं.
आइए बताएं, क्या होती है शत्रु संपत्ति
पाकिस्तान से 1971 के युद्ध के बाद भारत के कुछ नागरिक अपनी संपत्ति को छोड़कर पाकिस्तान चले गए थे. इस संपत्ति को सरकार ने शत्रु संपत्ति घोषित कर दिया था और अपने कब्जे में ले लिया था. पाकिस्तान जाने वाले कुछ लोग बिना अधिकार के अपनी संपत्ति किसी न किसी को देकर गए थे. अब इस संपत्ति पर वह लोग रह तो सकते हैं, लेकिन उसकी बिक्री नहीं कर सकते. उस संपत्ति पर अधिकार सिर्फ और सिर्फ सरकार का ही रहेगा.
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