
कागजों में ही बन गई इंद्रानगर हाउसिंग स्कीम की सड़क, रचा 72 करोड़ रुपए हड़पने का खेल
कानपुर। केडीए के अधिकारियों-कर्मचारियों की कारगुजारियों के ‘खेल’ का एक बार फिर पर्दाफाश हुआ है. ये मामला है इंद्रानगर हाउसिंग स्कीम को जोड़ने वाली सड़क की जमीन का. मालूम पड़ा है कि इस ज़मीन के अधिग्रहण के मुआवजे के नाम पर करोड़ों रुपए का मुआवजा डकारने की तैयारी चल रही थी. इसके लिए केडीए बोर्ड में रखे गए प्रपोजल में न सिर्फ फर्जीवाड़ा किया गया, बल्कि हाईकोर्ट तक में झूठा शपथपत्र दाखिल करने से भी नहीं हिचके. डीएम से लेकर हाईकोर्ट तक के आदेशों को भी केडीए कर्मचारियों ने दबा दिया, ताकि मुआवजा डकारने के उनके खेल का खुलासा न हो, लेकिन फाइनली पूरे खेल का खुलासा हो ही गया.
मामले का हुआ खुलासा
पूरे मामले का खुलासा होते ही विभाग में अफरातफरी मच गई. बुधवार को केडीए वीसी ने 5 अमीनों को निलंबित कर दिया है. वहीं 3 तहसीलदारों के खिलाफ कार्रवाई के लिए आरोप पत्र आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद को भेज दिया है. इसी तरह मिलीभगत में शामिल सुपरिटेंडेंट इंजीनियर, एक्सईएन व असिसटेंट इंजीनियर के खिलाफ भी कार्रवाई के लिए आरोप पत्र प्रमुख सचिव आवास एवं शहरी नियोजन को केडीए ने भेज दिया. इतना ही नहीं, कॉन्ट्रैक्ट पर रखे गए एक तहसीलदार को हटा दिया है.
राष्ट्रपति आवास से जुड़ी है ये सड़क
विकास नगर रोड से इंद्रानगर हाउसिंग स्कीम को जाने वाली फोरलेन रोड राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के दयानंद विहार स्थित घर को जाने का प्रमुख रास्ता है, लेकिन दयानंद विहार मोड़ के पास करीब 200-300 मीटर हिस्से पर सड़क नहीं बनी है. इसी हिस्से में आने वाली 5838.76 स्क्वॉयर मीटर जमीन (आराजी संख्या 1098 बैरी अकबर बांगर) के मुआवजे के लिए लंबे समय खेल केडीए इम्प्लाइज की मिलीभगत से चल रहा था. यह जमीन हरिमोहन गुप्ता व रमेश चन्द्र गुप्ता के पास है.
कागजों पर ही बना दी सड़क
पूरे मामले को लेकर सेक्रेटरी केपी सिंह ने बताया कि मुआवजा दिलाने के लिए केडीए के कुछ इम्प्लॉइज़ ने वर्ष 2014 में कागजात में रोड बनी हुई दिखा दी. केडीए बोर्ड में इंद्रा नगर मकड़ीखेड़ा में जमीन के इस्तेमाल किए जाने की बात कहते हुए भूमि दिए जाने का प्रपोजल भी रखा. बोर्ड ने स्थलीय जांच कराने का आदेश दिया. प्रॉपर्टी व इंजीनियरिंग सेक्शन के ऑफिसर्स व कर्मचारियों की टीम ने सड़क में जमीन प्रयोग किए जाने रिपोर्ट दे दी, जबकि वर्ष 2010 में ही हाईकोर्ट में दाखिल रिट के प्रत्यावेदन में तत्कालीन केडीए वीसी ओएन सिंह ने जमीन पर सड़क न बनाने की बात स्पष्ट कर दी थी. इन रिपोट्र्स को लेकर हरिमोहन गुप्ता व रमेश चन्द्र ने हाईकोर्ट में प्रतिकर (मुआवजे) के लिए रिट दाखिल कर दी गई.
ऐसा बताया केडीए सचिव ने
इसके इतर केडीए सचिव ने ये भी बताया कि तत्कालीन तहसीलदार बीएल पाल ने भ्रामक व तथ्यों के विपरीत जमीन के इस्तेमाल का शपथ पत्र भी हाईकोर्ट में लगा दिया. इस पर 12 सितंबर को हाईकोर्ट ने दो महीने में मुआवजे दिए जाने का निर्देश दिए. इसके साथ ही केडीए के कार्रवाई न करने पर जिलाधिकारी के समक्ष प्रत्यावेदन देकर मुआवजा निर्धारित कराने के भी निर्देश दिए. इस आदेश को प्रॉपर्टी सेक्शन के कर्मचारी काफी दिनों तक दबाए रहे. जमीन मालिक 72 करोड़ मुआवजे की मांग कर रहे थे. इन कर्मियों ने भू-प्रतिकर की जिला समिति के सामने भी गलत आख्या दी. इस पर 25 मई,2018 को मुआवजा देने का आदेश दिया, लेकिन आदेश पर प्रॉपर्टी सेक्शन के इम्प्लाइज ने कार्रवाई की बजाए फाइल दबा दी. बाद में जमीन मालिक हरि शंकर गुप्ता आदि ने हाईकोर्ट में अवमानना याचिका दाखिल कर दी. इसकी जानकारी होने पर केडीए वीसी किंजल सिंह ने 6 ऑफिसर्स की टीम बनाकर स्थलीय व कागजात की जांच कराई तो पूरे मामले का खुलासा हुआ.
ये हुए निलंबित
जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद अमीन संतोष कुमार, रामलाल, अंकुर पाल, रमेशचंद्र प्रजापति और सोहनलाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. इसके साथ ही पूर्व तहसीलदार बीएल पाल, पूर्व तहसीलदार किशोर गुप्ता और मौजूदा तहसीलदार प्रदीप रमन के खिलाफ़ आरोप पत्र गठित करते हुए आयुक्त एवं सचिव राजस्व परिषद को विभागीय कार्रवाई को प्रेषित किया है.
Published on:
04 Oct 2018 02:29 pm
