कानपुर

आईआईटी कानपुर ने बनाया ऐसा ऐप, घटनाएं रोकने में करेगा मदद, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग पर आधारित एप्लीकेशन

IIT Kanpur application based on artificial intelligence new learning- आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) ने एक ऐसा ऐप लॉन्च किया है, जो कि घटनाएं रोकने में मददगार साबित हो सकता है। नई तकनीक से चंद सेकेंड में ही अधिकारी के पास संबंधित शिकायत पहुंच जाएगी। इस एप्लिकेशन को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लॉन्च किया है।
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Jul 16, 2021
आईआईटी कानपुर ने बनाया ऐसा ऐप, घटनाएं रोकने में करेगा मदद, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग पर आधारित एप्लीकेशन
आईआईटी कानपुर ने बनाया ऐसा ऐप, घटनाएं रोकने में करेगा मदद, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग पर आधारित एप्लीकेशन

कानपुर. IIT Kanpur application based on artificial intelligence new learning. आईआईटी कानपुर (IIT Kanpur) ने एक ऐसा ऐप लॉन्च किया है, जो कि घटनाएं रोकने में मददगार साबित हो सकता है। नई तकनीक से चंद सेकेंड में ही अधिकारी के पास संबंधित शिकायत पहुंच जाएगी। इस एप्लिकेशन को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लॉन्च किया है। आईआईटी कानपुर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग पर आधारित शिकायत प्रबंधन एप्लीकेशन तैयार किया है। किसी क्षेत्र से अधिक शिकायतें या समस्या आने पर एप्लीकेशन मंत्रालय को अलर्ट दे देगा। बता दें कि लॉन्चिंग पर कार्मिक लोक शिकायत और पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह, रक्षा सचिव डॉ. अजय कुमार, डीएआरपीजी के अतिरिक्त सचिव वी श्रीनिवासी, रक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव निवेदिता शुक्ला आईआईटी निदेशक प्रो. अभय करंदीकर, प्रो. शलभ, प्रो. निशीथ श्रीवास्तव समेत अन्य अधिकारी शामिल रहे।

कुछ ही सेकेंड्स में मिलेगी जानकारी

मौजूदा वक्त में शिकायतों के निवारण में समय लगता है इसलिए इस ऐप्लिकेशन को इस तरह तैयार किया गया है कि कुछ ही सेकेंड्स में इसकी जानकारी अधिकारी को मिल जाए। एप्लीकेशन के निर्माण के लिए रक्षा मंत्रालय, प्रशासनिक सुधार और लोक शिकायत विभाग, आईआईटी कानपुर के बीच चार अगस्त 2020 को करार हुआ था। प्रो. शलभ ने कहा कि केंद्रीकृत लोक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (सीपीजीआरएएमएस)पोर्टल पर लाखों शिकायतें आती हैं। इसको संबंधित अधिकारी के पास जाने में समय लग रहा है। कई बार शिकायतें अत्याधिक महत्वपूर्ण होती हैं, जिसपर तत्काल कार्रवाई जरूरी है। इस समस्या को देखते हुए एप्लीकेशन तैयार किया गया है। यह एप्लिकेशन केवल अंग्रेजी भाषा में काम करेगा। बाद में इसे हिंदी के साथ-साथ अन्य भाषा में बदला जाएगा।

Updated on:
16 Jul 2021 01:10 pm
Published on:
16 Jul 2021 01:10 pm