कानपुर

मात्र 7 दिन में मिल जाती थी डिग्री! 14 नामी यूनिवर्सिटी में फैला था शैलेंद्र ओझा का ‘एजुकेशन सिंडिकेट, ऐसे खुला पूरा रैकेट

Kanpur Fake Degree Scam: कानपुर में फर्जी डिग्री और मार्कशीट बनाने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ। शैलेंद्र कुमार ओझा और चार अन्य गिरफ्तार किए गए।

2 min read
Feb 22, 2026
कानपुर में फर्जी डिग्री का बड़ा गिरोह पकड़ा गया!

Kanpur Crime News: यूपी के कानपुर में एक बड़ा फर्जी डिग्री और मार्कशीट गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। इस गिरोह का सरगना शैलेंद्र कुमार ओझा अभी जेल में है। वह घर बैठे ही नौ राज्यों के 14 नामी विश्वविद्यालयों की डिग्री और डिप्लोमा महज सात दिन में दिलाने का दावा करता था। यह धंधा कई सालों से चल रहा था, लेकिन कोई शिकायत नहीं आई, क्योंकि गिरोह ने बहुत चालाक तरीके से काम किया।

ये भी पढ़ें

पहले लिखा सुसाइड नोट, फिर बनाई वीडियो… रोते-रोते फंदे से लटक गया युवक, 2 मासूमों के सिर से उठा बाप का साया

गिरोह कैसे करता था काम?

शैलेंद्र और उसके साथियों ने भरोसा बनाने के लिए एक अलग तरीका अपनाया था। डिग्री या मार्कशीट देने का वादा करने पर वे ग्राहक से पहले पूरी रकम नहीं लेते थे। काम पूरा होने के बाद ही नकद पैसे लेते थे। लेकिन भरोसे के लिए ग्राहक से पोस्ट डेटेड चेक ले लेते थे। यह चेक छात्र या उसके पिता के बैंक खाते से होता था। जब ग्राहक नकद पैसे दे देता, तो चेक वापस कर दिया जाता। ग्राहक भी इस शर्त पर राजी हो जाते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि यह सिर्फ गारंटी है। पुलिस को शैलेंद्र के जूही गौशाला स्थित कार्यालय में छापे के दौरान कई पोस्ट डेटेड चेक मिले। इसी तरह शैलेंद्र भी विश्वविद्यालय के बाबुओं को लाखों रुपये के ब्लैंक चेक देता था और बाद में नकद पेमेंट करता था। इस तरीके से सबका भरोसा बना रहा और धंधा बिना रुके चलता रहा।

गिरोह का नेटवर्क और जिम्मेदारियां

इस गिरोह में हर सदस्य की अलग-अलग जिम्मेदारी थी। शैलेंद्र ने सभी को अलग-अलग यूनिवर्सिटी या बोर्ड का काम सौंप रखा था। किसी को पता नहीं था कि दूसरा कौन से बाबू से संपर्क में है। यह जानकारी सिर्फ शैलेंद्र को या संबंधित व्यक्ति को ही होती थी। इससे पुलिस को जांच में मुश्किल हुई।

  • अश्वनी को मेडिकल डिग्रियां तैयार कराने का काम मिला था।
  • नागेंद्र बीकॉम, बीएससी, एमएससी, एमबीए जैसी डिग्रियां बनवाता था। साथ ही ईटानगर की हिमालयन यूनिवर्सिटी का भी काम देखता था।
  • जोगेंद्र एलएलबी डिग्री और हाई स्कूल-इंटरमीडिएट की मार्कशीट का जिम्मा संभालता था।
  • मयंक भारद्वाज अलीगढ़ की मंगलायतन यूनिवर्सिटी से डिग्रियां लाता था।
  • मनीष फरीदाबाद की लिंग्या यूनिवर्सिटी का काम करता था।
  • विनीत हापुड़ की मोनाड यूनिवर्सिटी और मंगलायतन यूनिवर्सिटी दोनों का संपर्क रखता था।
  • शुभम दुबे और गौतम छतरपुर की श्रीकृष्ण विश्वविद्यालय का काम देखते थे।
  • सेखू उर्फ ताबिश मणिपुर की एशियन यूनिवर्सिटी से डिग्रियां और मार्कशीट उपलब्ध कराता था। इस तरह गिरोह ने 9 राज्यों में फैला जाल बिछा रखा था।

पुलिस की कार्रवाई और एसआईटी जांच

किदवई नगर पुलिस ने इस गिरोह का भंडाफोड़ किया। छापेमारी में 900 से ज्यादा फर्जी मार्कशीट, सर्टिफिकेट और अन्य दस्तावेज बरामद हुए। शैलेंद्र समेत चार लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। बाकी कुछ फरार हैं। पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने 14 सदस्यीय SIT (स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम) बनाई है। यह टीम पांच हिस्सों में बंटकर जांच करेगी। टीम की अगुवाई एडीसीपी साउथ योगेश कुमार करेंगे। इसमें एक एसीपी, क्राइम ब्रांच के तीन इंस्पेक्टर, छह सब-इंस्पेक्टर और तीन सिपाही शामिल हैं। एसआईटी अब पूरे नेटवर्क, विश्वविद्यालयों के बाबुओं की मिलीभगत और फर्जी डिग्रियों से हुई नौकरियों की जांच करेगी। यह मामला शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार को उजागर करता है।

ये भी पढ़ें

मेरी मां को बचा लो… रोते-रोते थाने पहुंची 5 साल की बच्ची, पुलिस भी रह गई दंग

Published on:
22 Feb 2026 11:55 am
Also Read
View All

अगली खबर