
कानपुर : एक पिता के लिए इससे बड़ा डर क्या हो सकता है कि उसकी बेटी घर से निकले और फिर सात दिनों तक उसका कोई पता न चले। रावतपुर इलाके में रहने वाले एक परिवार ने यही दर्द झेला। 21 जून को घर से निकली 17 वर्षीय किशोरी जब शनिवार को बदहवास हालत में वापस लौटी, तो उसके शरीर पर चोटों के निशान थे और आंखों में सात दिनों की दहशत साफ दिखाई दे रही थी।
परिजनों के मुताबिक, किशोरी कुछ समय पहले मोतीझील के कारगिल पार्क में अरमान नाम के युवक के संपर्क में आई थी। दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई और फिर दोस्ती हो गई। 21 जून को युवक ने उसे मिलने के लिए नमक फैक्ट्री चौराहे पर बुलाया। किशोरी वहां पहुंची तो कार में अरमान के साथ दो अन्य युवक भी मौजूद थे।
पीड़िता का आरोप है कि उसे पहले मोतीझील ले जाया गया और फिर जब उसने घर लौटने की बात कही तो उसे एक मुस्लिम बहुल इलाके में स्थित घर ले जाया गया। वहां उसके साथ जो कुछ हुआ, उसने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया।
किशोरी का आरोप है कि उसे सात दिनों तक बंधक बनाकर रखा गया। इस दौरान उस पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाया गया। उसे कलमा पढ़ाने की कोशिश की गई और उर्दू में लिखे कुछ कागजों पर हस्ताक्षर भी कराए गए। उसने यह भी आरोप लगाया कि उस पर जबरन मांस खाने का दबाव बनाया गया और विरोध करने पर गर्म चिमटे से दागा गया।
पीड़िता के अनुसार, आरोपी और उसके परिजन लगातार मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना देते रहे। इतना ही नहीं, बात न मानने पर उसे विदेश में बेच देने की धमकी भी दी जाती थी। डर, धमकी और यातनाओं के बीच उसने किसी तरह हिम्मत जुटाई और शनिवार को वहां से निकलकर अपने घर पहुंचने में सफल रही।
जब बेटी घर पहुंची तो उसकी हालत देखकर परिवार के होश उड़ गए। पिता का कहना है कि सात दिनों तक परिवार ने हर संभव जगह तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। बेटी के लौटने के बाद ही पूरी घटना की जानकारी सामने आ सकी।
पुलिस ने पीड़िता के पिता की तहरीर पर मुकदमा दर्ज कर लिया है। डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी ने बताया कि प्राथमिक जांच में दोनों के पहले से परिचित होने की बात सामने आई है। मामले में रिपोर्ट दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस सभी आरोपों की जांच कर रही है।