
कानपुर,देश के प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में गिने जाने वाले आईआईटी कानपुर ने छात्रों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर एक बड़ा और अभिनव कदम उठाया है। बीते कुछ वर्षों में सामने आई आत्महत्या की घटनाओं ने संस्थान प्रशासन को गंभीरता से सोचने पर मजबूर किया। अब इन घटनाओं को रोकने के लिए संस्थान ने छात्रावासों में सामान्य पंखों की जगह स्प्रिंग-लोडेड पंखे लगाने का फैसला किया है, जो एक तरह से तकनीक और संवेदनशीलता का अनूठा संगम माना जा रहा है।
संस्थान में हुई अधिकतर आत्महत्या के मामलों में पंखे से फंदा लगाने की घटनाएं सामने आई थीं। इसी को ध्यान में रखते हुए अब छात्रावासों में ऐसे पंखे लगाए जाएंगे, जिनमें स्प्रिंग मैकेनिज्म होगा। यदि पंखे पर अधिक भार डाला जाता है, तो यह स्प्रिंग के कारण नीचे झुक जाएगा, जिससे किसी भी तरह का फंदा बनाना संभव नहीं होगा।यह कदम पूरी तरह से रोकथाम के उद्देश्य से उठाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के तकनीकी उपाय आत्महत्या के प्रयासों को तत्काल रोकने में सहायक हो सकते हैं और व्यक्ति को दोबारा सोचने का समय दे सकते हैं। संस्थान प्रशासन ने साफ किया है कि यह केवल एक अस्थायी सुरक्षा उपाय है, जबकि असली फोकस मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है।
छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने के लिए आईआईटी कानपुर ने ‘योर दोस्त’ नाम के एक ऑनलाइन काउंसलिंग और इमोशनल वेलनेस प्लेटफॉर्म के साथ साझेदारी की है। यह सेवा 24 घंटे उपलब्ध रहती है, जिससे जरूरत पड़ने पर कोई भी व्यक्ति फोन या ऑनलाइन माध्यम से विशेषज्ञों से बात कर सकता है।इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी व्यक्ति को मानसिक तनाव या अकेलेपन की स्थिति में तुरंत सहायता मिल सके। कई बार छोटी-छोटी समस्याएं समय पर समाधान न मिलने के कारण बड़ी बन जाती हैं। ऐसे में यह सेवा एक सहारे के रूप में काम करेगी।संस्थान का मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को लेकर खुलकर बात करना बेहद जरूरी है। इसी सोच के तहत काउंसलिंग को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाया जा रहा है।
मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करने के लिए संस्थान ने ‘सेंटर फॉर मेंटल हेल्थ एंड वेलबीइंग (सीएमएचडब्ल्यू)’ की स्थापना भी की है। इस केंद्र में 10 मनोवैज्ञानिक, एक मनोचिकित्सक और तीन विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम तैनात की गई है, जो जरूरत पड़ने पर तत्काल सहायता प्रदान करती है।इसके साथ ही छात्रों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए नियमित रूप से कार्यशालाएं, संवाद सत्र और इंटरैक्टिव कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य छात्रों को मानसिक रूप से सशक्त बनाना और उन्हें तनाव से निपटने के बेहतर तरीके सिखाना है।सीएमएचडब्ल्यू के हेड एडमिन प्रो. सुधांशु शेखर सिंह के अनुसार, आत्महत्या के मामलों की जांच में जो निष्कर्ष सामने आए, उन्हीं के आधार पर यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि संस्थान अब केवल घटनाओं के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि पहले से ही ऐसे कदम उठाना चाहता है, जिससे किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।