कानपुर

Kanpur News:इंसानी मजबूरी का सौदा:आधी रात होते थे ऑपरेशन, #किडनी डोनर्स’ ग्रुप में तय होती थी डील

Illegal Kidney Transplant Racket:कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का खुलासा हुआ, जहां एजेंट गरीबों को फंसाकर डील कराते थे। ‘#किडनी डोनर्स’ ग्रुप से सौदे तय होते और निजी अस्पतालों में आधी रात को गुप्त ऑपरेशन किए जाते थे।
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Apr 02, 2026
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कानपुर। कल्याणपुर-रावतपुर थाना क्षेत्र में उजागर हुए अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट ने चिकित्सा व्यवस्था की पारदर्शिता और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूत्रों की माने तो पुलिस की शुरुआती जांच में यह साफ हुआ है कि यह कोई एक-दो लोगों का काम नहीं, बल्कि एक संगठित और बहुस्तरीय नेटवर्क था, जिसमें एजेंट, डॉक्टर, अस्पताल संचालक और तकनीकी सहयोगी शामिल थे। सभी मिलकर सुनियोजित तरीके से इस अवैध कारोबार को अंजाम दे रहे थे।

सैलरी पर एजेंट, कमीशन पर चलता था नेटवर्क

पुलिस जांच में सामने आया है कि इस रैकेट की सबसे मजबूत कड़ी एजेंटों का नेटवर्क था। कई एजेंटों को मासिक वेतन दिया जाता था, जिनका मुख्य काम आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद लोगों की पहचान करना था। वहीं कुछ एजेंट कमीशन के आधार पर काम करते थे और हर सफल डील पर मोटी रकम पाते थे।ये एजेंट पहले व्यक्ति की पारिवारिक और आर्थिक स्थिति का आकलन करते, फिर उसकी मजबूरी को हथियार बनाकर उसे किडनी डोनेट करने के लिए तैयार करते थे। कई मामलों में झूठे वादे और लालच देकर लोगों को इस जोखिम भरी प्रक्रिया में धकेला जाता था।

#किडनी डोनर्स’ ग्रुप से चलता था पूरा खेल

इस गिरोह ने तकनीक का भी भरपूर इस्तेमाल किया। टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे प्लेटफॉर्म पर ‘#किडनी डोनर्स’ नाम से गुप्त ग्रुप बनाए गए थे। इन ग्रुप्स में एजेंट, डॉक्टर और अस्पताल संचालक जुड़े रहते थे।यहीं पर संभावित डोनर्स और मरीजों की जानकारी साझा की जाती थी और ट्रांसप्लांट की पूरी योजना बनाई जाती थी। यह डिजिटल नेटवर्क इतनी सावधानी से संचालित किया जा रहा था कि लंबे समय तक इसकी भनक तक नहीं लगी।

निजी अस्पतालों में तैयार रहता था सेटअप

जांच में यह भी सामने आया है कि शहर के कुछ निजी अस्पताल इस अवैध गतिविधि के मुख्य केंद्र बने हुए थे। यहां ट्रांसप्लांट के लिए पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से तैयार रखा जाता था। डॉक्टर अपने संपर्कों के जरिए दिल्ली और अन्य शहरों से विशेषज्ञ डॉक्टरों को बुलाते थे, जो कानपुर आकर ऑपरेशन कर सामान्य स्थिति होने पर वापस लौट जाते थे। अधिकतर सर्जरी देर रात या आधी रात को की जाती थी, ताकि किसी को इसकी जानकारी न हो सके और कोई संदेह न उत्पन्न हो।

मजबूरी को बनाया जाता था ‘सौदा’

गिरोह के एजेंट लोगों की मजबूरी को सौदे में बदलने में माहिर थे। वे ऐसे लोगों को निशाना बनाते थे, जो कर्ज, आर्थिक तंगी या पारिवारिक दबाव से जूझ रहे होते थे।देहरादून के एक एमबीए छात्र का मामला भी सामने आया है, जो फीस और बहन की शादी के दबाव में इस जाल में फंस गया। यह उदाहरण दिखाता है कि किस तरह इंसानी मजबूरी का फायदा उठाकर अवैध धंधे को बढ़ावा दिया जा रहा था।

बड़े नामों की गिरफ्तारी, कई और रडार पर

पुलिस ने इस मामले में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से जुड़ी डॉ. प्रीति आहूजा, उनके पति डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा (54), डॉ. राजेश कुमार (44), डॉ. राम प्रकाश (40), डॉ. नरेन्द्र सिंह (35) और शिवम अग्रवाल (32) को गिरफ्तार किया है।शिवम अग्रवाल एंबुलेंस संचालक है, जो खुद को डॉक्टर बताकर इस नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। सभी आरोपियों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है। पुलिस के अनुसार, एक दर्जन से अधिक डॉक्टर और अस्पताल संचालक अभी भी संदेह के घेरे में हैं और जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

जांच में खुल रहे नए राज

पुलिस उपायुक्त पश्चिम एस.एम. कासिम आबिदी के अनुसार, पूछताछ में कई नए नाम और सुराग सामने आए हैं। किडनी बेचने वाले दो व्यक्तियों से मिली जानकारी के आधार पर जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया है।पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं और पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में कार्रवाई जारी है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

Updated on:
02 Apr 2026 11:15 am
Published on:
02 Apr 2026 11:14 am