करौली

राजस्थान में भारी बारिश के बीच अच्छी खबर, सीजन में पहली बार खुले इस बांध के 4 गेट; कालीसिल भी ओवरफ्लो

Panchana Dam: राजस्थान में अधिकतर जिलों में भारी बारिश का दौर जारी है। मानसून की मेहरबानी के बीच करौली जिले के सबसे बड़े पांचना बांध से अच्छी खबर सामने आई है।

2 min read
Jul 19, 2025
पांचना बांध के गेट खोलकर की जा रही पानी की निकासी। फोटो: पत्रिका

करौली। राजस्थान में अधिकतर जिलों में भारी बारिश का दौर जारी है। करौली जिले में भी शुक्रवार को दिनभर रिमझिम बारिश की झड़ी लगी रही। सुबह से शुरू हुआ बारिश का दौर रात तक जारी रहा। मानसून की मेहरबानी के बीच करौली जिले के सबसे बड़े पांचना बांध से अच्छी खबर सामने आई है।

करौली जिले के पांचना बांध के देर रात 2 बजे 4 गेट खोले गए और 17496 क्यूसेक जल निकासी की गई। इस सीजन में पहली बार बांध के 4 गेट खोले गए हैं। हालांकि, बांध में पानी का स्तर कम होने के बाद आज सुबह दो गेटों को बंद कर दिया गया। पांचना बांध के दो गेट से लगातार पानी की निकासी जारी है।

ये भी पढ़ें

30 साल में पहली बार जुलाई में छलका एशिया का सबसे बड़ा कच्चा बांध, राजस्थान के 2 जिलों में खिल उठे किसानों के चेहरे

चार गेट खोलकर पानी की निकासी

गौरतलब है कि कुल 258.62 मीटर की भराव क्षमता का पांचना बांध कई दिन पहले लबालब हो चुका है। इसके चलते बांध से पानी निकासी करनी पड़ रही है। शुक्रवार को भी बांध के एक गेट से पानी की निकासी जारी रही। लेकिन, अच्छी बारिश के चलते बांध का जल स्तर लगातार बढ़ता रहा। ऐसे में रात 9 बजे एक और गेट खोला गया। इसके बाद देर रात दो और गेट खोले गए। बांध के गेट नंबर 2, 3, 4 और 6 को एक-एक मीटर खोलकर 17496 क्यूसेक पानी गंभीर नदी में छोड़ा गया।

ग्रामीणों से सतर्क रहने की अपील

प्रशासन ने डाउनस्ट्रीम के तटीय ग्रामीणों के लिए अलर्ट जारी किया है और सतर्क रहने की अपील की है। जल संसाधन एक्सईएन सुशील गुप्ता, एईएन वीर सिंह जाटव और जेईएन भवानी सिंह लगातार नजर बनाए हुए है। बता दें कि पाचना बांध का पानी गंभीर नदी के रास्ते भरतपुर के घना तक पहुंच रहा है। ऐसे में प्रशासनिक अधिकारी लोगों से सावधानी बरतने की अपील कर रहे हैं।

कालीसिल बांध पर चलने लगी चादर। फोटो: पत्रिका

कालीसिल बांध ओवरफ्लो

इधर, सपोटरा क्षेत्र के किसानों के लिए जीवनदायी कहा जाने वाला कालीसिल बांध शुक्रवार को ओवरफ्लो हो गया। 26 फीट की भराव क्षमता के बांध के लबालब होने के बाद चादर चल गई। जिससे क्षेत्र के किसानों को सिंचाई के लिए दीपावली बाद रबी फसल की बुवाई के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी मिल सकेगा।

ये भी पढ़ें

लूणी नदी में लगातार तीसरे साल आया पानी, जश्न में डूबे लोग; ढोल-नगाड़ों के साथ चुनरी ओढ़ाकर नदी का स्वागत

Also Read
View All

अगली खबर