
Kailadevi Fair : करौली. उत्तर भारत की प्रसिद्ध कैलादेवी आस्थाधाम में 11 से 20 अक्टूबर तक कैलामाता के आयोजित होने वाले शारदीय नवरात्र मेले की तैयारियों को लेकर शुक्रवार को जिला कलक्टर अक्षय गोदारा ने कैलादेवी मंदिर परिसर एवं आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित विभागीय अधिकारियों को मेले से पूर्व सभी आवश्यक तैयारियां पूर्ण करने तथा श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा एवं सुगम दर्शन के लिए समुचित व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
करौली के जिला कलक्टर अक्षय गोदारा ने निरीक्षण के दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के प्रवेश एवं निकास मार्ग, दर्शन के लिए कतार व्यवस्था, पार्किंग, यातायात प्रबंधन, पेयजल, विद्युत, साफ-सफाई एवं शौचालय व्यवस्थाओं का जायजा लिया। अधिकारियों को मेला मार्गों की आवश्यक मरम्मत, पर्याप्त रोशनी, संकेतक बोर्ड, चिकित्सा दल, एंबुलेंस एवं आपातकालीन सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। साथ ही काली सिल नदी के घाटों पर सुरक्षा, साफ-सफाई एवं आवश्यकतानुसार गोताखोरों तथा जीवनरक्षक उपकरणों की व्यवस्था दुरुस्त रखने को कहा है।
इस दौरान पुलिस अधीक्षक लोकेश सोनवाल ने मेला क्षेत्र में कानून-व्यवस्था, भीड़ नियंत्रण, पुलिस जाप्ते की तैनाती, सीसीटीवी कैमरों से निगरानी एवं यातायात प्रबंधन की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने संबंधित पुलिस अधिकारियों को संवेदनशील स्थानों पर विशेष सतर्कता बरतने, प्रमुख मार्गों एवं पार्किंग स्थलों पर यातायात सुचारू रखने तथा श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान उपखंड अधिकारी राकेश कुमार रावत, पुलिस उपाधीक्षक सहित अन्य विभागीय अधिकारी एवं कैलादेवी मंदिर ट्रस्ट के प्रतिनिधि प्रदीप द्विवेदी सहित अन्य उपस्थित रहे।
कैलादेवी मंदिर राजस्थान के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। कैला देवी मन्दिर त्रिकुट की पहाड़ियों के बीच कालीसिल नदी के किनारे पर बना हुआ है। यह मन्दिर देवी के नौ शक्ति पीठों में से एक माना जाता है तथा इसकी स्थापना 1100 ईस्वी में की गई थी। यह हनुमान जी का मन्दिर है, जिसे यहाँ के लोग ’लांगुरिया’ नाम से पुकारते हैं।
राजस्थान के अलावा उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और अन्य राज्यों से भी श्रद्धालु माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर की धार्मिक मान्यताओं के कारण इसे आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है।
मंदिर की पहचान इसकी प्राचीन स्थापत्य शैली और लोक परंपराओं से भी जुड़ी है। मेले के दौरान श्रद्धालु माता के दर्शन के साथ लोकगीतों और लांगुरिया भजनों में भाग लेते हैं। मंदिर तक सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है।