राम जल सेतु लिंक परियोजना (संशोधित पीकेसी-ईआरसीपी) के तहत बनने वाले डूंगरी बांध के विरोध में शुक्रवार को जोड़ली गांव में प्रभावित क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों की महापंचायत आयोजित हुई।
सपोटरा (करौली)। राम जल सेतु लिंक परियोजना (पीकेसी-ईआरसीपी) के तहत बनने वाले डूंगरी बांध के विरोध में शुक्रवार को जोड़ली गांव में प्रभावित क्षेत्र के किसानों और ग्रामीणों की महापंचायत आयोजित हुई। सुबह साढ़े 11 बजे शुरू हुई यह पंचायत देर शाम तक चली।
महापंचायत में बांध निर्माण को लेकर आक्रोश और विरोध की आवाजें गूंजती रहीं। वक्ताओं ने बांध निर्माण को रद्द करने के लिए आर-पार की लड़ाई की चेतावनी दी। हालांकि महापंचायत समाप्त होने पर आगामी रणनीति का निर्णय आयोजन कमेटी के पदाधिकारियों व क्षेत्रीय पंच पटेलों पर छोड़ दिया। देर शाम कमेटी के पदाधिकारियों ने सरकार को दस दिन का अल्टीमेटम दिया। इसके बाद आंदोलन तेज करने की घोषणा की गई।
महापंचायत को पूर्व मंत्री रमेशचंद मीणा और सपोटरा विधायक हंसराज मीणा ने संबोधित किया। इस दौरान दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच एक बार विवाद भी हो गया। पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि भाजपा शासन में कोई विकास नहीं हुआ और डूंगरी बांध को लेकर सरकार केवल भ्रम फैला रही है। वहीं विधायक हंसराज ने कहा कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। स्थिति बिगड़ते देख पुलिस मंच पर पहुंची और समझाइश देकर मामला शांत कराया।
किसान नेता राकेश टिकैत और युवा नेता नरेश मीणा भी सभा में मौजूद रहे। नरेश मीणा ने चेतावनी दी कि यदि डूंगरी बांध का निर्माण शुरू हुआ तो इसे रोकने के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर ट्रेन रोकने जैसे कदम भी उठाए जाएंगे।
वक्ताओं ने दावा कि बांध बनने से क्षेत्र के 100 से अधिक गांवों के हजारों लोग प्रभावित होंगे और उनकी जमीन डूब क्षेत्र में चली जाएंगी। पूर्व विधायक राजेंद्र गुढ़ा ने कहा कि डूंगरी बांध को रद्द कराने के लिए वह नरेश मीणा व क्षेत्र के लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।
महापंचायत में करीब 30 हजार लोग शामिल हुए। पूर्व सरपंच अशोक बना अमरगढ़ की अध्यक्षता में आयोजित इस सभा में ग्रामीणों ने एकजुट होकर बांध निर्माण निरस्त करने की मांग दोहराई।