करौली

राजस्थान में 100 करोड़ का मेगा हाईवे कब होगा पूरा? सैकड़ों गांवों को जोड़ेगा मार्ग

Rajasthan Mega Highway : पाटोली से बामनवास मेगा हाईवे का निर्माण कार्य वन विभाग की एनओसी नहीं मिलने और कोर्ट में स्टे होने के कारण पिछले तीन वर्षों से अधूरा पड़ा है। निर्माण कार्य अधूरा रहने से लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

2 min read
Apr 27, 2026
Mega Highway in Karauli
Mega Highway in Karauli। फोटो पत्रिका

गुढ़ाचंद्रजी (करौली)। पाटोली से बामनवास मेगा हाईवे का निर्माण कार्य वन विभाग की एनओसी नहीं मिलने और कोर्ट में स्टे होने के कारण पिछले तीन वर्षों से अधूरा पड़ा है। निर्माण कार्य अधूरा रहने से लोगों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सड़क पर उड़ती धूल, बिखरी मोरम और कंक्रीट के कारण राहगीरों और वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

सार्वजनिक निर्माण विभाग की ओर से करीब 100 करोड़ रुपए की लागत से पाटोली मोड़ से बंधावाड़ा तक मेगा हाईवे निर्माण कार्य कराया जा रहा है। निर्माण कार्य की निर्धारित समय सीमा अक्टूबर 2023 में पूरी हो चुकी है, लेकिन अब तक करीब नौ किलोमीटर सड़क का निर्माण अधूरा है।

जानकारी के अनुसार तत्कालीन विधायक की अनुशंसा पर वर्ष 2022-23 में बामनवास से पाटोली मोड़ तक मेगा हाईवे निर्माण को स्वीकृति मिली थी। यह परियोजना टोडाभीम और बामनवास विधानसभा क्षेत्रों में आती है। टोडाभीम क्षेत्र में 51.600 किलोमीटर सड़क निर्माण का ठेका एक कंपनी को दिया गया था, जबकि बामनवास क्षेत्र में अलग कंपनी को कार्य सौंपा गया।

दलपुरा से रायसना तक सड़क निर्माण वन विभाग की अनुमति नहीं मिलने के कारण रुका हुआ है। वहीं गुढ़ाचंद्रजी नदी की पुलिया से बोरिंग चौराहे के बीच करीब 500 मीटर क्षेत्र में दो किसानों की ओर से कोर्ट में स्टे लेने से निर्माण कार्य प्रभावित हुआ है।

ग्रामीणों का कहना है कि पुरानी सड़क को खोदकर नई सड़क निर्माण के लिए गिट्टी और मोरम डाल दी गई थी, लेकिन बाद में वन विभाग की आपत्ति के चलते काम बंद करवा दिया गया। अधूरी सड़क पर दिनभर धूल उड़ती रहती है, जिससे वाहन चालकों को सामने से आने वाले वाहन दिखाई नहीं देते और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। कई लोग सांस और अस्थमा जैसी बीमारियों से भी परेशान हो रहे हैं। घरों में लगातार धूल जमा होने से ग्रामीणों को दिक्कत उठानी पड़ रही है।

अधूरी सड़क से लोगों ने बदला रास्ता

दलपुरा से रायसना तक सड़क निर्माण अधूरा रहने के कारण बामनवास और लालसोट जाने वाले कई लोगों ने वैकल्पिक मार्ग अपनाना शुरू कर दिया है। वाहन चालक अब ढहरिया, जीरना, सलावद, गढ़खेड़ा या सलावद से दांतासूती, राणीला और बड़ीला होकर बामनवास पहुंच रहे हैं। इससे करीब 10 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है, लेकिन लोग खराब सड़क से बचने के लिए यही रास्ता चुन रहे हैं।

परिवेश पोर्टल पर लंबित है अनुमति प्रक्रिया

सार्वजनिक निर्माण विभाग की ओर से वन विभाग की अनुमति के लिए भारत सरकार के परिवेश पोर्टल पर दो बार आवेदन किया जा चुका है। पहला आवेदन निरस्त होने के बाद करीब पांच-छह माह पहले दोबारा आवेदन किया गया, लेकिन अब तक अनुमति नहीं मिल सकी है। फिलहाल फाइल प्रक्रिया में चल रही है। क्षेत्रवासियों ने हाल ही में जीतकीपुर में आयोजित कार्यक्रम में पहुंचे वन एवं पर्यावरण मंत्री संजय शर्मा को ज्ञापन सौंपकर समस्या से अवगत कराया था।

कोर्ट स्टे के कारण रुका काम

सार्वजनिक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता राजेंद्र मीना ने बताया कि 51.600 किलोमीटर में से 43 किलोमीटर सड़क का निर्माण पूरा हो चुका है। शेष कार्य वन विभाग की एनओसी और कोर्ट स्टे के कारण रुका हुआ है। एनओसी मिलने के बाद निर्माण कार्य फिर से शुरू किया जाएगा।

Published on:
27 Apr 2026 04:01 pm