काला सोना सरसों के लिए मशहूर माड़ क्षेत्र की काली चिकनी मिट्टी में एक किसान ने नवाचार करते हुए भिंडी की पैदावार की है। इससे किसान को लाखों रुपए का मुनाफा हुआ है।
राजस्थान के करौली जिले के गुढ़ाचंद्रजी क्षेत्र में सब्जियों की खेती के अन्तर्गत भिंडी की पैदावार में किसानों का रुझान बढ़ रहा है। किसान बत्तीलाल मीना ने बताया कि दो बीघा भूमि में 3 महीने पहले भिंडी की बुवाई की थी। पिछले एक माह से भिंडी की तुड़ाई कर बाजार में बेच रहा है।
रोजाना 50-60 किलो भिंडी की बाजार में सप्लाई हो रही है। अन्य किसान भी भिंडी में पैदावार में रुचि दिखा रहे हैं। किसान ने बताया कि उसने भिंडी की खेती में जैविक खाद देने के साथ उसने देशी दवाइयों से कीटों का उपचार किया। जैविक खेती से तैयार भिंडी खाने में स्वादिष्ट लगती है। साथ ही बाजार में भी अच्छे दाम मिलते हैं। इससे किसान को दोगुना मुनाफा होता है।
सहायक कृषि अधिकारी कैलाश चन्द्रवाल ने बताया कि अधिक उत्पादन के लिए सही तरीके से बुवाई पर ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने बताया कि बुवाई के लिए बीज उचित मात्रा लेवें।
वर्षा ऋतु के लिए 12 किलो प्रति हैक्टेयर तथा गर्मी के समय 20 किलो बीज प्रति हैक्टेयर काम लेवें तथा कतार से कतार की दूरी गर्मी में 30 सेमी और वर्षा ऋतु में 45-60 सेमी रखें। तथा पौधे से पौधे की दूरी गर्मी में 12 सेमी और वर्षा में 30-45 सेमी रखें।
बीज उपचार तथा समय-समय पर कीट व रोगों के नियंत्रण करने से किसान अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। वर्षा ऋतु में 150-200 क्विंटल प्रति हैक्टेयर उत्पादन प्राप्त होता है जिससे किसान कम भूमि में ही बहुत अच्छा मुनाफा कमा रहे है। जिससे आर्थिक स्तर मजबूत हो रहा है।
भिंडी की खेती गर्मी व वर्षा ऋतु में होती है। इसमें उच्च रेशे पाए जाने के कारण शुगर की मात्रा नियंत्रित रहती है। आंतों के लिए भी फायदेमंद है। हृदय रोगियों के लिए काफी फायदेमंद है। इसमें विटामिन ए, बी, सी, प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, लोहा, तथा मैग्नीशियम, आयोडीन पर्याप्त मात्रा में रहते हैं।