World Hypertension Day Special : जिला चिकित्सालय के फिजीशियन डॉ. आशीष शर्मा ने बताया उच्च रक्तचाप के अक्सर स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, लेकिन यह दिल का दौरा, स्ट्रोक जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है।
World Hypertension Day Special : अनियमित दिनचर्या और बदले खानपान के साथ भागदौड़ की जिंदगी में युवा पीढ़ी हाइपरटेंशन यानी उच्च रक्तचाप की गिरफ्त में आ रही है। शहर से लेकर गांवों में खुली आबोहवा में रहने वाले भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। आज के दौर में आनुवंशिकता से ज्यादा आधुनिक जीवन शैली और मानसिक तनाव हाइपरटेंशन की वजह बन रहा है। हिण्डौनसिटी जिला चिकित्सालय की ओपीडी में आने वाले रोगियों में से कमोबेश हर 10वां रोगी हाइपरटेंशन के उपचार परामर्श के लिए पहुंच रहा है। चिकित्सालय की एनसीडी क्लीनिक में हर माह हाइपरटेंशन के 200 नए रोगी स्क्रीनिंग में सामने आ रहे हैं।
बीते अप्रैल माह में फिजिशियन चिकित्सकों की सलाह पर एनसीडी क्लीनिक में 3369 रोगियों ने पंजीयन कराया था। इनमें से 233 को डायबिटीज होने की पुष्टि हुई। यानी प्रतिदिन 7-10 हाइपरटेंशन के नए रोगी स्क्रीनिंग में मिल रहे हैं। जबकि पूर्व में हाइपरटेंशन से ग्रसित कई हजार रोगी नियमित उपचार ले रहे हैं।
यह आंकड़ा केवल जिला चिकित्सालय की एनसीडी क्लीनिक का है। वहीं दूसरी तरफ सैकड़ों रोगी निजी चिकित्सकों से शहर व जयपुर सहित दूसरे शहरों के अस्पतालों से उपचार करा रहे हैं।
चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि कॅरियर की चिंता, तनाव और बदलती जीवनशैली के कारण यह बीमारी तेजी से फैल रही है। पहले 45 से अधिक आयु के लोगों की बीपी जांच की जाती थी। अब 30 वर्ष से अधिक आयु के रोगी के स्वास्थ्य परीक्षण में रक्तचाप की जांच शुमार हो गई है।
चिकित्सकों के अनुसार हाइपरटेंशन से व्यक्ति दूसरे अन्य रोगों की जद में आ जाता है। इनमें डायबिटीज प्रमुख है। अप्रैल माह में 228 नए रोगियों स्क्रीनिंग की गई जो हाइपरटेंशन के साथ डायबिटीज से भी पीड़ित मिले। जनवरी से अप्रैल माह तक दोनों रोगों से ग्रस्त 793 नए रोगी मिले हैं।
माह - हाइपरटेंशन - एचटी व डायबिटीज
जनवरी - 205 - 194
फरवरी - 210 - 194
मार्च - 190 - 177
अप्रैल - 233 - 288।
जिला चिकित्सालय के फिजीशियन डॉ. आशीष शर्मा ने बताया कि उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) के अक्सर स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते, लेकिन यह दिल का दौरा, स्ट्रोक और किडनी रोग जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। अधिक बढ़ने पर तेज सिरदर्द और चक्कर आना, धुंधली दृष्टि या आंखों में दर्द, सांस लेने में कठिनाई, सीने में दर्द या धड़कन तेज होना, अचानक कमजोरी, बोलने में कठिनाई, नाक से खून आना लक्षण दिखते हैं। ऐसे में रोगी को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए।
जिला चिकित्सालय के फिजिशियन डॉ. अंकुश अग्रवाल ने बताया कि धूम्रपान करना, शराब सेवन व अन्य नशा, तला-भुना तैलीय भोजन, जंक फूड और नमक का अधिक सेवन करना व आलसी दिनचर्या, हाइपरटेंशन का बड़ा कारण है। इसके अलावा तनाव, दर्दनिवारक गोलियों का अधिक सेवन तथा अनुवंशिकता से भी व्यक्ति इसकी जद में आ जाता है।
डॉ. अंकुश अग्रवाल ने बताया कि मेडिकल साइंस की किताबों के अनुसार प्रतिदिन 30 मिनट का भ्रमण और कम नमक और कम चिकनाई का भोजन, हाइपरटेंशन से बचाव में अहम है। साथ ही इसके कारकों से दूरी व योग-व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करना भी जरूरी है।