26 जनवरी को कासगंज में जो हुआ उसका डर अभी भी लोगों के दिलों में बैठा हुआ है।
कासगंज। 26 जनवरी को कासगंज में जो हुआ उसका डर अभी भी लोगों के दिलों में बैठा हुआ है। कासगंज हिंसा के पाचवें दिन बिलराम गेट की दुकानें बंद नजर आईं। गश्त करती पुलिस नजर आ रही थी। आरएएफ के जवान भी मुस्तैद दिखाई दे रहे थे, लेकिन बाजार में सन्नाटा पसरा हुआ था। न कोई फेरी वाला था और नाहीं दुकानें खुली थीं। कुछ लोग घरों से निकले हुए थे, लेकिन मन में अजीब दहशत थी।
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किसका है डर
कासगंज में पुलिस अधिकारियों ने डेरा डाला हुआ है। आरएएफ के जवान भी दिखाई दे रहे हैं, फिर भी डर का माहौल है। ये हम नहीं, बल्कि कासगंज के बाजार खुद बयां करते हैं। पांच दिन बाद भी दुकानें बंथ दिखाई दीं। बिलराम गेट खाली पड़ा हुआ था। एक साइड से पुलिस के जवानों की टुकड़ी अपना ढेरा जमाए बैठी थी। नदरई गेट भी पूरी तरह खाली नजर आ रहा था।
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दहशत बरकरार
पुलिस अधिकारी दावा कर रहे हैं, कि कासगंज में सबकुछ सामान्य है। लेकिन हालात देखें जाएं, तो स्थिति वास्तव में पुलिस के नियंत्रण में हैं, लेकिन सामान्य कुछ भी नजर नहीं आ रहा है। घटना के पाचवें दिन पत्रिका टीम कासगंज में रही। यहां लोगों से बातचीत की। नदरई गेट के पास का हाल देखा। बताया गया कि ये चौराहा इतना शांत कभी भी दिखाई नहीं दिया। यहां हर समय जाम की स्थिति नजर आती थी।
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