कटनी

15 साल का इंतजार खत्म, पहाड़ के आर-पार बनी सुरंग, एमपी के 6 जिलों के 1450 गांवों तक पहुंचेगा नर्मदा का पानी

Bargi Diversion Project Tunnel Breakthrough: 11.95 किलोमीटर लंबी स्लीमनाबाद अंडरग्राउंड टनल में आखिरकार 'ब्रेक थ्रू' हो गया। टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) ने अंतिम चट्टान को भेदते हुए खुदाई का कार्य पूरा कर दिया। तकनीकी बाधा समाप्त होने से जल्द नर्मदा के पानी को पहली बार सोन बेसिन तक पहुंचाया जाएगा।
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Jul 15, 2026
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bargi diversion project sleemanabad tunnel breakthrough, स्लीमनाबाद अंडरग्राउंड टनल (source- patrika)

Katni Bargi Diversion Project Tunnel Breakthrough: मध्यप्रदेश की सबसे महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजनाओं में शामिल बरगी व्यपवर्तन परियोजना ने बुधवार को ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल कर ली। करीब 15 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद 11.95 किलोमीटर लंबी स्लीमनाबाद अंडरग्राउंड टनल में आखिरकार 'ब्रेक थ्रू' हो गया। टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) ने अंतिम चट्टान को भेदते हुए खुदाई का कार्य पूरा कर दिया। इसके साथ ही नर्मदा के पानी को पहली बार सोन बेसिन तक पहुंचाने की दिशा में सबसे बड़ी तकनीकी बाधा समाप्त हो गई।

वर्षों की मेहनत, सबसे कठिन चरण पूरा

जानकारी के अनुसार टनल का कार्य मंगलवार को पूरा होना था, लेकिन अंतिम चरण में खुदाई के दौरान मिट्टी धंसने की आशंका के कारण काम रोकना पड़ा। लाइनिंग टूटने और सुरंग को नुकसान पहुंचने का खतरा देखते हुए इंजीनियरों ने सावधानी बरती। बुधवार सुबह दोबारा खुदाई शुरू की गई और अंतिम लगभग एक मीटर हिस्से को सफलतापूर्वक काटते ही दोनों सिरों का मिलान हो गया। इस तरह वर्षों की मेहनत का सबसे कठिन चरण पूरा हो गया।

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जल्द पहुंचेगा नर्मदा का पानी

अब टनल बोरिंग मशीन को पहले से बनाए गए वर्टिकल शाफ्ट के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से बाहर निकाला जाएगा। इसके बाद सुरंग के भीतर लाइनिंग, फिनिशिंग, विद्युत एवं अन्य तकनीकी कार्य पूरे किए जाएंगे। इन कार्यों के बाद नर्मदा का पानी सोन बेसिन की ओर प्रवाहित करने की प्रक्रिया शुरू होगी।

छह जिलों की बदलेगी खेती की तस्वीर

परियोजना पूरी होने पर कटनी, मैहर, सतना, रीवा सहित छह जिलों की लगभग 1.85 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलेगी। अकेले कटनी जिले की 21,823 हेक्टेयर भूमि इस परियोजना से लाभान्वित होगी। इससे हजारों किसानों की वर्षा पर निर्भरता कम होगी और कृषि उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है।

799 करोड़ से बढ़कर 1442 करोड़ पहुंची लागत

इस महत्वाकांक्षी परियोजना को वर्ष 2008 में मंजूरी मिली थी और 2011 में सुरंग निर्माण शुरू हुआ। प्रारंभिक लागत 799 करोड़ रुपये निर्धारित की गई थी, लेकिन कठिन भूगर्भीय परिस्थितियां, ऊंचा भूजल स्तर, सिंकहोल, कोरोना काल और निर्माण सामग्री की बढ़ती कीमतों के कारण लागत बढकऱ करीब 1442 करोड़ रुपए हो गई। लगभग 30 मीटर गहराई में जर्मनी निर्मित अत्याधुनिक टनल बोरिंग मशीन से सुरंग का निर्माण किया गया, जिसे इंजीनियरिंग की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।

मुख्यमंत्री के दौरे की तैयारी

टनल निर्माण पूरा होने की सूचना नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण ने राज्य शासन को भेज दी है। अधिकारियों के अनुसार अगले दो से तीन दिनों में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्लीमनाबाद पहुंचकर परियोजना का निरीक्षण कर सकते हैं। प्रशासन ने इसकी तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के एसडीओ दीपक मंडलोई ने बताया कि टनल की खुदाई का कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। टीबीएम मशीन अब शाफ्ट तक पहुंच चुकी है, जिसे जल्द बाहर निकाला जाएगा। इसके बाद लाइनिंग और अन्य तकनीकी कार्य पूरे किए जाएंगे।

Updated on:
15 Jul 2026 07:11 pm
Published on:
15 Jul 2026 07:11 pm