
Sanjay Pathak -विधायक संजय पाठक एक बार पुन: चर्चा में हैं। कटनी में उनकी पारिवारिक कंपनियों का जमीन से अवैध कब्जा हटा दिया गया है। प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर निर्माण ध्वस्त कर दिए। इसके साथ ही सालों पुराना विवाद भी खत्म कर दिया। किराए पर जमीन लेकर विधायक की पारिवारिक कंपनियों को बेचने के इस विवादित मामले में न्यायालय के निर्णय के बाद कार्रवाई की गई। प्रशासनिक अधिकारियों ने विजय राघवगढ़ के बीजेपी विधायक संजय पाठक की पारिवारिक कंपनियों का अवैध कब्जा हटाकर वारिसों को विधिवत सौंप दिया।
कटनी में करीब 26 वर्ष पुराने मदन मोहन चौबे वार्ड स्थित बहुचर्चित भूमि विवाद का शुक्रवार को पटाक्षेप हो गया। जिला प्रशासन ने न्यायालय के आदेश के पालन में विवादित भूमि से बाउंड्रीवाल और निर्माण हटाकर उसका कब्जा विवेक चतुर्वेदी एवं अन्य विधिक वारिसों को सौंप दिया।
प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम पुलिसकर्मियों को साथ लेकर मदन मोहन चौबे वार्ड स्थित मौके पर पहुंची और जमीन से अवैध कब्जा हटाने की कार्रवाई शुरु कर दी। बुलडोजर से पक्के निर्माण ढहा दिए गए। इस दौरान एसडीएम प्रमोद चतुर्वेदी, तहसीलदार अजीत तिवार सहित राजस्व, पुलिस और कटनी नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ अमला मौजूद रहा।
विधायक संजय पाठक की पारिवारिक कंपनियों पर जमीन कब्जाने के आरोपों का यह विवाद 22 हजार वर्गफीट भूमि से जुड़ा है। इसे वर्षों पहले सरदार रघुवीर सिंह उर्फ बलवीर सिंह ने प्रकाशनाथ चतुर्वेदी से चीप टाल संचालन के लिए किराए पर लिया था। मामला न्यायालय में विचाराधीन रहने के दौरान 31 मार्च 2013 को रघुवीर सिंह ने यही भूमि विजयराघवगढ़ विधायक संजय पाठक की पारिवारिक कंपनी मेसर्स अतिशा कंस्ट्रक्शन के नाम विक्रय कर दी।
विवेक चतुर्वेदी एवं अन्य विधिक वारिसों ने इस पर आपत्ति जताई। जमीन पर मालिकाना हक का यह विवाद सुप्रीम कोर्ट तक गया। न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद प्रशासन ने कब्जा दिलाने की कार्रवाई की।
बता दें कि भाजपा विधायक संजय पाठक से जुड़ी कंपनियों पर बड़े पैमाने पर अवैध खनन और भूमि विवादों के आरोप हैं।कटनी और जबलपुर क्षेत्रों में निर्मला मिनरल्स, आनंद माइनिंग कॉरपोरेशन और पैसिफिक एक्सपोर्ट्स जैसी कंपनियों द्वारा स्वीकृत सीमा से अधिक लौह अयस्क के अवैध उत्खनन पर शासन द्वारा करोड़ों रुपए (लगभग 443 से 520 करोड़) के जुर्माने व रिकवरी की कार्रवाई का मामला भी चल रहा है।
विभिन्न संगठनों और आदिवासियों द्वारा डिंडौरी और कटनी क्षेत्र में कर्मचारियों के नाम पर बड़े पैमाने पर जमीन की खरीद और उससे जुड़े घोटालों के आरोप लगाए गए हैं। कटनी में संपत्ति की रजिस्ट्री और स्टाम्प शुल्क में अनियमितता को लेकर भी प्रशासनिक जांच के नोटिस जारी हुए हैं।