जालपा देवी वार्ड में बने सामुदायिक भवन का मामला, आयुक्त ने रोकी फाइल, मचा हडक़ंप, पहले हो चुका है 30 लाख से काम,बता दें कि जालपा देवी वार्ड में पहले से सामुदायिक भवन बना हुआ है। नगर निगम द्वारा एक साल पहले लगभग लगभग 30 लाख रुपए से जीर्णोद्धार कराया गया है
कटनी. नगर निगम पिछले कुछ वर्षों से अपनी नित-नई कारगुजारियों से सुर्खियों में है। बाहरी लोगों के हस्ताक्षेप और चहेतों को उपकृत करने के लिए जमकर मनमानी की जा रही है। एक ऐसा ही अजब-गजब मामला जालपा देवी वार्ड में सामने आया है। जानकार हैरानी होगी कि यहां पर एक साल पहले सामुदायिक भवन के जीर्णोद्धार आदि का काम कराया जा चुका है, लेकिन ठेकेदार को उपकृत करने के लिए दोबारा 13 लाख रुपए से अधिक का टेंडर कर दिया गया है।
बता दें कि जालपा देवी वार्ड में पहले से सामुदायिक भवन बना हुआ है। नगर निगम द्वारा एक साल पहले लगभग लगभग 30 लाख रुपए से जीर्णोद्धार कराया गया है। अब एक साल बाद फिर से नगर निगम के लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों ने ठेकेदार से मिलीभगत कर फिर से सामुदायिक भवन में टाइल्स लगाने, मरम्मत आदि कराने के नाम पर 13 लाख 309 रुपए का टेंडर कर दिया गया है। जिसकी टेंडर आइडी 2025-यूएडी-429411-3 है। यह टेंडर 3 जून 25 को किया गया। फाइनेंसियल बिड 19 फरवरी 26 को हुई। हैरानी की बात तो यह है कि जो काम पहले टेंडर कराकर कराया जा चुका है, अब फिर से दोबारा टेंडर कराना कई सवाल खड़े कर रहा है। इतना ही नहीं पिछली परिषद की बैठक में पार्षद बल्ली सोनी ने मनमानी को उठाया तो वार्ड के पार्षद पीडब्ल्यूडी के प्रभारी सदस्य एमआइसी सदस्य रमेश सोनी ने बेतुक की बात कहते हुआ स्वीकार किया था कि सामुदायिक भवन पहले से तैयार है, ठेकेदार का पैसा अधिक लग गया है, इसलिए भुगतान कराने फिर से टेंडर करा गया है।
बता दें कि इस टेंडर प्रक्रिया में तीन ठेकेदारों ने भाग लिया। पहला ठेकेदार एसएन खंपरिया ने माइनस 7.86 प्रतिशत विलो, दूसरे ठेकेदार विनायक एग्रो इंडस्ट्रीज ने मानइस 20.11 प्रतिशत विलो, हर्ष बिल्डर्स ने माइनस 24.21 प्रतिशत टेंडर डाला। इसमें पहले एसएन खंपरिया ने काम किया था, लेकिन अब टेंडर हर्ष बिल्डर्स को मिला। इसमें दोनों ठेकेदारों के बीच कई दिनों तक भुगतान को लेकर कसमकश की स्थिति बनी रही। सवाल यह उठता है कि जो काम पहले हो चुका था, उसका फिर से टेंडर क्यों किया गया और अबतक जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। बता दें कि नगर निगम में पूर्व में कुछ ठेकेदारों को अतिरिक्त भुगतान की परंपरा बन चुकी थी।
यह मामला मेरे संज्ञान में आया है। फाइल को रोक दिया गया है। पूर्व में हो चुके काम के लिए फिर से क्यों टेंडर विभाग ने कराया, इसकी जांच कराएंगे।