कटनी

डीएमएफ के 45 करोड़ पर अफसरशाही का कुंडलीमार खेल, फाइलों में कैद विकास कार्य

खनन से कमाई, लेकिन जनता को विकास नहीं, जिला खनिज न्यास मंडल की बैठक न होने पर उठे गंभीर सवाल, 23 माह से नहीं हुई बैठक

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Jan 27, 2026
Dmf

कटनी. खनिज संपदा से मालामाल जिले में विकास कार्यों के लिए जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) मद में पड़े 45 करोड़ रुपए पर अफसरशाही कुंडली मारकर बैठी है। हालात यह हैं कि विधायक, सांसद और जनप्रतिनिधियों द्वारा भेजे गए 150 से अधिक विकास कार्यों के प्रस्ताव महीनों से धूल फांक रहे हैं, लेकिन प्रशासन के पास बैठक कराने तक का समय नहीं है। बीते 23 माह से जिला खनिज न्यास मंडल की एक भी बैठक नहीं हुई और इसी सुस्ती ने जिले के विकास पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।
खनिज बाहुल्य जिले में माइंस कंपनियां, फैक्ट्रियां और खनन कारोबारी खनिज दोहन के एवज में सरकार को करोड़ों की रॉयल्टी देते हैं। इसी रॉयल्टी का एक निश्चित हिस्सा डीएमएफ मद में जमा होता है, ताकि खनन से प्रभावित क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, सडक़, पर्यावरण संरक्षण और बुनियादी सुविधाओं का विकास हो सके। लेकिन हकीकत यह है कि यह पैसा जनता तक पहुंचने के बजाय अफसरों की फाइलों में कैद होकर रह गया है।

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23 माह से नहीं हुई बैठक, विकास पर ब्रेक

जिला खनिज न्यास मंडल की पिछली बैठक फरवरी 2024 में आयोजित की गई थी। उस बैठक में करीब 45 करोड़ रुपए की लागत से 132 विकास कार्यों को स्वीकृति दी गई थी। इसके बाद से अब तक 23 माह बीत चुके हैं, लेकिन न तो नई बैठक हुई और न ही नए प्रस्तावों पर चर्चा। इसी दौरान जनप्रतिनिधियों ने 150 से अधिक नए विकास कार्यों की सूची जिला प्रशासन को सौंपी, लेकिन वे सभी प्रस्ताव स्वीकृति के इंतजार में फंसे हैं।

45 करोड़ से अधिक राशि पड़ी बेकार

सूत्रों के मुताबिक वर्तमान में डीएमएफ मद में 45 करोड़ रुपए से अधिक की राशि उपलब्ध है। इसमें बीते वित्तीय वर्ष के करीब 18 करोड़ रुपए और चालू वित्तीय वर्ष में अब तक प्राप्त 26 करोड़ रुपए शामिल हैं। यह रकम यदि समय पर खर्च होती तो जिले के कई गांवों और शहरी इलाकों में पेयजल संकट, जर्जर स्कूल भवन, स्वास्थ्य केंद्रों की बदहाली और अधूरी सडक़ों, पुलिया निर्माण जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती थी। लेकिन प्रशासनिक सुस्ती के चलते यह राशि केवल आंकड़ों में सिमटकर रह गई है।

रॉयल्टी से बना फंड, लेकिन लाभ नहीं

डीएमएफ फंड खनिज पट्टाधारकों द्वारा दी जाने वाली रॉयल्टी से बनता है। वर्ष 2015 और उसके बाद दिए गए खनिज पट्टों के लिए 10 प्रतिशत रॉयल्टी डीएमएफ में जमा की जाती है, जबकि 2015 से पहले के पट्टों के लिए यह दर 30 प्रतिशत तय है। यानी खनन जितना ज्यादा, डीएमएफ में उतना ज्यादा पैसा। इसके बावजूद जिले में विकास कार्यों का इंतजार लंबा होता जा रहा है।

क्या है डीएमएफ का उद्देश्य

केंद्र सरकार ने वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री खदान क्षेत्र कल्याण योजना के तहत जिला खनिज न्यास (डीएमएफ) का गठन किया था। इसका स्पष्ट उद्देश्य था कि खनन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर जीवन स्तर, सुविधाएं और अवसर मिलें।

इनका कहना है

डीएमएफ मद से बीते वर्षों में स्वीकृत किए गए कार्यों का आकलन किया जा रहा है। कई कार्य अधूरे हैं जिनकी समीक्षा भी की गई है। जल्द ही जिला खनिज न्यास मंडल की बैठक आयोजित कर नियमानुसार विकास कार्यों को स्वीकृत किया जाएगा।

आशीष तिवारी, कलेक्टर

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Published on:
27 Jan 2026 09:51 pm
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