कैमरा और रोशनी के अभाव में अपराधियों को मिल रहा मौका, बेटियों-महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल, अन्य अपराधों में पुलिस के हाथ रह जाते हैं खाली, 3 हजार से अधिक स्थानों पर कैमरे लगाने की है आवश्यकता
कटनी. शहर में बेटियों और महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बनाई गई सेफ सिटी योजना वर्षों बाद भी पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर सकी है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा वर्ष 2021 में शहर के 50 संवेदनशील स्थानों (हॉटस्पॉट) को चिन्हित कर एक व्यापक सुरक्षा योजना तैयार की गई थी, जिसमें नगर निगम को सोलर पैनल युक्त स्ट्रीट लाइट लगाने और प्रमुख स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे स्थापित करने की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन चार साल बीत जाने के बावजूद शहर के कई सार्वजनिक स्थान आज भी तीसरी आंख की निगरानी से वंचित हैं। अन्य अपराधों की रोकथाम के लिए भी पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं।
कैमरे और पर्याप्त रोशनी के अभाव का फायदा अपराधी उठा रहे हैं। चोरी, लूट, डकैती, मारपीट सहित अन्य आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने में ऐसे स्थान अपराधियों के लिए सुरक्षित ठिकाने बनते जा रहे हैं। पूर्व में घटित घटनाओं के बाद भी संबंधित विभागों द्वारा ठोस कदम नहीं उठाए गए, जिससे आमजन में असुरक्षा की भावना बनी हुई है।
वर्तमान में शहर में मात्र 226 सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। ये कैमरे पुलिस विभाग, विधायक निधि और सर्विलांस के अंतर्गत लगाए गए हैं। हालांकि, शहर के बाहरी हिस्सों, हाइवे और कई भीड़भाड़ वाले इलाकों में कैमरों की भारी कमी है। शहर के उपनगरीय क्षेत्र में कैमरों की भारी कमी है। माधवनगर थाना क्षेत्र में चोरी की घटनाओं में पुलिस के हाथ खाली रहे हैं। इसका सीधा फायदा अपराधी उठाते हैं।
शहर का चौपाटी क्षेत्र, जिला अस्पताल परिसर, मुड़वारा स्टेशन व कटनी जंक्शन का सर्कुलेटिंग एरिया, खिरहनी फाटक, माई नदी क्षेत्र, तिलक कॉलेज के आसपास, आईटीआई एनकेजे, गायत्री नगर पुलिया, बाबा घाट, बस स्टैंड, बायपास, सुरम्य पार्क, कटायेघाट, जागृति पार्क, गर्ल्स कॉलेज सहित शहर के 100 से अधिक ऐसे स्थान हैं, जहां पर्याप्त निगरानी व्यवस्था नहीं है।
पुलिस विभाग के अनुसार शहर और ग्रामीण क्षेत्रों को मिलाकर कम से कम 3 हजार से अधिक सीसीटीवी कैमरों की आवश्यकता है। कैमरों की कमी के चलते कई मामलों में अपराधी पकड़ से बाहर रह जाते हैं। इसके बावजूद पुलिस प्रशासन और संबंधित विभागों की ओर से अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। सेफ सिटी जैसी महत्वाकांक्षी योजना के अधूरे क्रियान्वयन ने शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। अब जरूरत है कि प्रशासन इस ओर तत्काल ध्यान दे, ताकि शहर वास्तव में सुरक्षित बन सके।
कुछ वर्ष पहले कोतवाली थाना क्षेत्र के अधारकाप में डकैती की घटना हो गई थी, क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरा न होने से पुलिस परेशान हुई थी। इसी प्रकार हाइवे में हो रहीं लूट की घटनाओं में पुलिस को परेशानियों का सामना करना पड़ा है। तेवरी में अज्ञात व्यक्ति की हत्या आज भी पहले बनी हुई है।
शहर सहित ग्रामीण इलाकों में और भी सीसीटीवी कैमरे बढ़ाए जाने की आवश्यकता है। शहर के हॉटस्पॉट में भी पर्याप्त इंतजाम बेहद जरूरी हैं। पूर्व में योजना बनी थी,इसका पता लगाया जाएगा कि अबतक क्या काम हुआ। सुरक्षा को लेकर सर्वे कराते हुए आवश्यक पहल की जाएगी।