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जांच पर सवाल: पीएचई 3600 जांच का लक्ष्य कर रहा पूरा तो नगर निगम ने सालभर में की 1360 जांचें

चार माह में क्रॉस चेक की हो रही प्रक्रिया, शहर के उपनगरीय क्षेत्र अमीरगंज सहित देवरी हटाई में फैल चुका है आंत्रशोथ, खराब पानी की सप्लाई पर पीएचई विभाग कराता है क्लोरीनेशन, हर माह औसतन 10 से अधिक शिकायतें

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कटनी

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Balmeek Pandey

Jan 06, 2026

Katni water

Katni water

कटनी. इंदौर में खराब पानी की सप्लाई से 17 लोग काल कलवित हो चुके हैं। शहर में भी लगातार मटमैले पानी, कीड़ायुक्त पानी, दुर्गंध वाले पानी सप्लाई की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं। सीवर लाइन कंपनी आयेदिन पाइप लाइनों को क्षतिग्रस्त कर रही है, जिससे लोगों के घरों में खराब पानी आ रहा है, यह बात अलग है कि नगर निगम प्रबंधन जांच में सब ठीक बता रहा है। वहीं दूसरी ओर शहर से लेकर गांव तक पानी की शुद्धता की जांच के नाम पर औपचारिकता निभाई जा रही है। नगर निगम द्वारा एक साल में सिर्फ 1530 जांचें की गई हैं, लेकिन जांच रिपोर्ट कहीं की ऐसी नहीं आई, जिसका परिणाम मानव स्वास्थ्य के लिए घातक रहा हो, चाहे भले ही कितना भी गंदा पानी क्यों न हो। पुरानी पाइप लाइन शहर के लिए नासूर बनी हुई हैं। वहीं दूसरी ओर पत्रिका द्वारा सिलसिलेवार लापरवाही उजागर की गई, जिसके बाद नगर निगम प्रबंधन एहतियात बरत रहा है। नगर निगम प्रशासन ने आम जनता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है। कहा है कि यदि कहीं भी पेयजल की शुद्धता को लेकर किसी प्रकार की शिकायत हो, तो नागरिक तत्काल नगर निगम के हेल्पलाइन नंबर 9351136230 पर संपर्क करें, ताकि समय पर सुधारा कराया जा सके।

सैकड़ों गांवों में सिर्फ पूरा किया जा रहा कोरम

जिले की 407 ग्राम पंचातयों के 950 से अधिक गांव लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग द्वारा सिर्फ जांच का कोरम पूरा किया जा रहा है। कार्यपालन यंत्री पीएचई पवनसुत गुप्ता के अनुसार एक साल में 3600 सेम्पल का लक्ष्य तय किया गया है। 300 टेस्ट हर माह हो रहे हैं। 10 हजार 600 हैंडपम्प, 795 नलकूप व पानी की टंकियां हैं। क्लोरीनेशन का काम प्री मानसून व मानसून के बाद कराने की औपचारिकता की जाती है। इसके बाद फिर किसी भी जलस्रोत में गंदा पानी आने पर क्लोरीनेशन कराया जाता है। इइ ने बताया कि कटनी, स्लीमनाबाद व विजयराघवगढ़ लैब में टेस्टिंग होती है। फिजिकल, केमिकल व जीवाणु टेस्ट कराया जा रहा है। सीएम हेल्पलाइन में औसतन एक माह में 5 से 7 मामले गंदे पानी आने की शिकायतें होती हैं। जांच के बाद क्लोरीनेशन कराया दिया जाता है। जो स्रोत बहुत खराब होता है उसे बंद करा दिया जाता है। विजयराघवगढ़ के एक स्कूल में स्थित हैंडपंप का पानी खराब आ रहा था, जिसे बंद करा दिया गया है।

एक साल में हुए 1530 टेस्ट

नगर निगम द्वारा एक साल में 1530 टेस्ट कराए गए हैं। केमिस्ट मानवेंद्र सिंह के अनुसार वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट में 730 टेस्ट हुए हैं, 488 टेस्ट फील्ड में व 310 टेस्ट अमृत मित्र प्रोजेक्ट के अंतर्गत शहर में उपभोक्ताओं के यहां कराए गए हैं। जांच के दौरान मानक सहीं पाए गए हैं। जिले में तीन नगर परिषद बरही, विजयराघवगढ़ व कैमोर संचालित हैं। यहां पर भी पानी सप्लाई के नाम पर जांच की औपचारिकता हो रही है।

यह बरता जा रहा एहतियात

शहर में गंदे पानी की सप्लाई न हो, इसको लेकर नगर निगम मुस्तैदी दिखा रहा है। शहर के दो स्थानों पर नलकूप से आने वाले पानी में अधिक टीडीएस है। टीडीएस अधिक आने पर टैंकर से सप्लाई कराएं जाने की योजना बनाई गई है। जहां पर पानी सही नहीं आ रहा है तो वहां पर पानी प्लांट का मिलाकर सप्लाई करने रणनीति तैयार की गई है, ताकि क्लोरीनेशन हो जाएगा और पानी में जाने वाली वैक्टीरिया मर जाएंगे, जिससे लोगों को साफ पानी मिलेगा।

कई माह में होता है क्रॉस

नगर निगम द्वारा की जाने वाली पानी की सप्लाई लोगों के लिए सेहतमंद है कि नहीं इसके लिए क्रॉस चेक कराया जाना चाहिए, लेकिन नगर निगम द्वारा तीन से चार माह में एक बार क्रॉस चेक कराया जाता है। नगर निगम द्वारा पीएचई (लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग) की लैब से कराया जाता है। तीन माह पहले ननि ने जांच कराई थी, हालांकि जांच रिपोर्ट मानक अनुसार पाई गई थी।

दूषित पानी पीने से होने वाली बीमारियां व दुष्परिणाम

गंदा या दूषित पानी पीना मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत घातक है। इसमें बैक्टीरिया, वायरस, परजीवी, रसायन एवं भारी धातुएं हो सकती हैं, जो अनेक गंभीर बीमारियों का कारण बनती हैं।
दस्त: जिसमें बार-बार पतला दस्त, निर्जलीकरण होता है, जो बच्चों व बुजुर्गों में जान का खतरा पैदा करता है।
हैजा: अत्यधिक दस्त व उल्टी जिससे तेजी से शरीर में पानी की कमी होती है।

टायफाइड: तेज बुखार, सिरदर्द, कमजोरी हो जाती है, जिससे लंबे समय तक इलाज की आवश्यकता पड़ती है।
पीलिया: आंख व त्वचा का पीला होना, लीवर पर गंभीर असर, अमीबायसिस व पेचिश
पेट दर्द, खून की दस्त, आंतों में सूजन, पेट के कीड़े, बच्चों में कुपोषण, शारीरिक विकास में बाधा।

गंदे पानी के दीर्घकालिक दुष्परिणाम

जानकारी के अनुसार गंदे पानी से किडनी व लीवर को नुकसान, पोषण की कमी, बच्चों में शारीरिक व मानसिक विकास प्रभावित होता है। रोग प्रतिरोधक क्षमता में कमी, गर्भवती महिलाओं व नवजात शिशुओं पर गंभीर प्रभाव, भारी धातुओं (आर्सेनिक, फ्लोराइड) से हड्डियों व दांतों की बीमारी, गंदे पानी के अन्य सामाजिक दुष्परिणाम, बार-बार बीमार पडऩे से आर्थिक नुकसान, कामकाज व पढ़ाई में बाधा, स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त बोझ होती है।

बचाव के उपाय

- हमेशा उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पिएं
- पानी की टंकी व बर्तनों की नियमित सफाई करें
- खुले व दूषित स्रोतों का पानी न पिएं
- हाथ धोने व स्वच्छता का पालन करें
- गांव/नगर में जल शुद्धिकरण व्यवस्था सुनिश्चित करें

इन गांवों में फैल चुका है आंत्रशोथ
केस 01


जुलाई 2024 में ढीमरखेड़ा क्षेत्र अंतर्गत उमरियापान के नैगवां व कोठी गांव में भयंकर तरीके से आंत्रशोथ फैल गया था। यहां पर पांच लोगों की मौत हो गई थी और सैकड़ों लोग इसकी चपेट में थे। हाहाकार की स्थिति बन गई थी। बारिश में खराब पानी आने के कारण लोग बीमार पड़े थे।

केस 02


बड़वारा क्षेत्र के ग्राम देवरी हटाई में 31 जुलाई से आंत्रशोथ फैल गया था। 52 ग्रामीण इसकी चपेट में आ गए थे। 9 मरीजों की हालत गंभीर हो गई थी। इसके बाद भी मरीजों की संख्या बढ़ती रही है। नलजल योजना के माध्यम से पानी की सप्लाई खराब होने के कारण समस्या हुई थी। यहां पर स्वाथ्य विभाग को कैंप लगाना पड़ गया था।

केस 03


शहर के उपनगरीय क्षेत्र अमीरगंज पड़वारा में एक साल पहले गंभीर शिकायत मिली थी। वहां के नलकूप से गंदा पानी आ रहा था, वॉटर लॉगिंन का पानी नलकूप में चला गया था। यहां दर्जनों लोग उल्टी-दस्त के शिकार हो गए थे। इसी प्रकार जालपा देवी वार्ड में पाइप में लीकेज के कारण भी गंभीर समस्या निर्मित हो गई थी, यहां भी ला कई दिनों तक टेंकर से सप्लाई कर प्यास बुझानी पड़ी थी।

जिला अस्पताल में हर दिन पहुंच रहे मरीज

जिला अस्पताल में बच्चों से लेकर बड़े तक हर दिन दो से तीन मरीज उल्टी-दस्त, टायफाइट व पेटदर्द आदि की समस्या को लेकर पहुंचते हैं। आंकड़ा गर्मी व बारिश के दिनों में कई गुना बढ़ जाता है। पानी साफ न पीने के कारण लोगों को समस्या होती है।

17 पानी के सैंपल भेजे गए लैब

नगर निगम सीमान्तर्गत सोमवार को विभिन्न जल स्रोतों के निरीक्षण, सैंपलिंग एवं जांच की कार्रवाई की गई। 17 सेम्पल लेकर जांच के लिए लैब में भेजे गए। सर्वेक्षण के दौरान बाबा नारायण शाह वार्ड, काली माता मंदिर, माधवनगर रॉबर्ट लाईन, संत कंवरराम वार्ड टंकी नंबर 4, झिंझरी स्थित बिलहरी मोड नई पानी की टंकी, अल्फर्ट गंज मोहन टॉकीज रोड, कोतवाली थाना सिटी सप्लाई, जगमोहनदास वार्ड स्थित जंगल दफ्तर पानी की टंकी, सुधार न्यास कॉलोनी, महात्मा गांधी वार्ड कनकने स्कूल टंकी सप्लाई के लिए हरिजन बस्ती, निषाद स्कूल टंकी सप्लाई के लिए केवट कॉलोनी, मानसरोवर कॉलोनी टंकी, हाउसिंग बोर्ड टंकी, अमीरगंज स्थित नई टंकी, डनहिल टैंक सप्लाई के लिए बरगवां बंधवा टोला, सहित अन्य स्थलों से पानी के सैंपल लिये जाकर जांच के लिए लैब भेजे गए। वहीं मदन मोहन चौबे वार्ड में खराब पानी की सप्लाई की शिकायत पर वार्ड से सैंपल लिया जाकर टेस्टिंग के लिए लैब भेजने की कार्रवाई की गई।

शहर में यहां आईं खराब पानी सप्लाई की शिकायतें


शहर में कई स्थानों पर खराब पानी के सप्लाई की शिकायतें आ चुकी हैं। द्वारिका सिटी में गंदा पानी आ रहा है। नगर निगम ने जांच कराई तो पीने योग्य पानी नहीं पाया गया। इस पर नगर निगम ने कॉलोनाइजर को साफ पानी सप्लाई कराने कहा है। वहीं दूसरी ओर रविवार को मदनमोहन चौबे वार्ड में बदबू वाले पानी की सप्लाई की गई है। इसके अलावा पूर्व में भट्टा मोहल्ला, कावसजी वार्ड, मदनमोहन चौबे वार्ड, रामनिवास सिंह वार्ड, पाठक वार्ड, माधवनगर, नई बस्ती क्षेत्र सहित अन्य इलाकों में पानी सप्लाई खराब हुई है।

वर्जन

शहर से लेकर गांव तक शुद्ध पेयजल सप्लाई की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। लगातार जांचें भी हो रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी पूरे एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

हरसिमरनप्रीत कौर, प्रभारी कलेक्टर।