2020 में स्वीकृत हुआ था डीपीआर, एक साल से टीएनसीपी में भूमि मद परिवर्तन के लिए अटकी है फाइल, ठंडे बस्ते में विकास की योजना, समीक्षा तक सिमटी योजना, धरातल पर नहीं ले पा रही आकार, रेस्टहाउस को सुरक्षित रखने की भी है मांग
कटनी. प्रशासन द्वारा शहर विकास, धरोहरों का जीर्णोद्धार, शहर से लेकर गांव तक करोड़ों रुपए के निर्माण कार्य को कराए जाने के लिए पूंजी जुटाने 2020 में पुनर्घनत्वीकरण (रिडेंसीफिकेशन) योजना बनाई थी। यह योजना मध्यप्रदेश गृह निर्माण विभाग के पाले में है। जानकर ताज्जुब होगा कि हर साल सिर्फ इस योजना की समीक्षा हो रही है, बैठकों का दौर चलता है, लेकिन अबतक यह धरातल पर मूर्तरूप नहीं ले पाई। इस योजना में शहर की ऐतिहासिक धरोहर साधुराम स्कूल को संवारने सहित मल्टीपर्पज पार्किंग, दुकानें, क्वार्टर, संयुक्त कार्यालय सहित कई ड्रीम प्रोजेक्ट हैं, लेकिन यह योजना प्रशासन, गृह निर्माण विभाग, टीएनसीपी, साधिकार समिति के बीच भटक रही है।
शहर विकास को लेकर बनीं तीन अलग-अलग योजनाओं को धरातल में उतारने विभाग गंभीर नहीं है। सिर्फ पत्राचार का खेल चल रहा है। वहीं बता दें कि सिविल लाइन स्थित रेस्टहाउस को बेचकर व पुराने कचहरी भवन को भेजकर पूंजी जुटाने और विकास कार्य कराने की योजना है। ऐसे में बेशकीमती जमीनों का निजी हाथों में जाना भी सवालों के घेरे में है। शहरवासी चाह रहे हैं कि सरकारी भवनों व जमीनों की नीलामी न हो। बल्कि इन्हीं स्थानों पर शासन-प्रशासन बेहतर योजना बनाकर निर्माण कार्य कराए। इस मामले में मप्र गृह निर्माण विभाग के कार्यापालन यंत्री पवन मरकाम का कहना है कि योजना पर विभाग द्वारा आवश्यक प्रक्रिया कराई जा रही है।
पुरानी तहसील संयुक्त कार्यालय परिसर को भी पुनर्घनत्वीकरण योजना में मप्र गृह निर्माण विभाग द्वारा शामिल किया गया है। 1.56 हेक्टेयर जमीन में 116 करोड़ की योजना है। यहां के जमीन की भी वर्तमान कलेक्टर गाइडलाइन के अनुसार तय की गई है। पीपीआर 21 अक्टूबर 21 को तैयार हो चुकी है। डीपीआर साधिकार समिति के पास भेजा गया है। यहां पर 304 लाख रुपए से 25 दुकानें, 20 करोड़ रुपए से संयुक्त कार्यालय भवन, 47 लाख रुपए से सिविल डिफेंस के लिए सेंटर, बहोरीबंद, ढीमरखेड़ा व विजयराघवगढ़ में 15 इएफजीएच क्वार्टरों का निर्माण कराया जाएगा। इसके अलावा 175 लाख से पीडब्ल्यूडी के जीएडी क्वार्टरों की मरम्मत होगी। कुल 45 करोड़ से निर्माण कार्य होंगे।
रिडेंसीफिकेशन योजना के तहत सिविल लाइन रेस्टहाउस को बेचकर विकास कार्य कराये जाने की योजना है। यहां पर 9024 स्क्वायर मीडर जमीन है, जिसकी गाइ लाइन एक लाख 10 हजार 400 रुपए प्रति वर्गमीटर है। कुल कीमत 99.62 करोड़ रुपए रखी गई है। अभी यह जमीन सार्वजनिक व अर्ध सार्वजनिक मद में दर्ज है, जिसे व्यवसायिक मद में दर्ज करने के लिए प्रक्रिया चल रही है। मप्र गृह निर्माण विभाग द्वारा लैंडयूज बदलने के लिए साधिकार समिति को प्रस्ताव भेजा गया है। बता दें कि इस योजना के लिए 28 मार्च 2022 को स्वीकृति मिल चुकी है। इस डीपीआर 1 फरवरी 20 को बना था। टीएनसीपी के माध्यम से मद परिवर्जन होना है, यह प्रक्रिया होने के बाद आगे की प्रक्रिया होगी। इसके लिए 1 सितंबर 25 को पत्राचार टीएनसीसी को भेजा गया है, हालांकि अभी तक प्रक्रिया अटकी हुई है।
शहर के ऐतिहासिक साधुराम स्कूल भवन के रिनोवेशन को भी इस योजना में शामिल किया गया है। 495 लाख रुपए की योजना है। यहां पर मल्टीपर्पज पार्किंग 888 लाख रुपए से, 77 जीएडी क्वार्टर 1357 लाख रुपए से, पीडब्ल्यूडी संयुक्त कार्यालय 151 लाख रुपए, पीडब्ल्यूडी स्टेार 65 लाख, फायर फाइटिंग 30 लाख सहित स्कूल का जीर्णोद्धार शामिल है।
शहर विकास और शासकीय कार्यालयों के विकास के लिए बनी पुनर्घनत्वीकरण योजना बनी है। तीनों योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर मप्र गृह निर्माण विभाग के अधिकारियों को बुलाकर समीक्षा की गई है। भूमि मद परिवर्तन आदि के लिए प्रक्रिया चल रही है। योजनाओं पर शीघ्र कार्य हो, इसके लिए विभाग को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।