जिस विभाग पर पूरे शहर में साफ पानी पिलाने का दावा उस परिसर में ही आ रहा गंदा पानी दूषित पानी बन सकता है जानलेवा, शहर के कई इलाकों में पानी का टीडीएस मान 500 से अधिक, नगर निगम की जांच में सब कुछ ‘ऑल इज वेल, मरीजों व मजदूरों से लेकर यात्रियों की की सेहत से खिलवाड़, शहरवासियों का भी नहीं है पूरी तरह शुद्ध पानी
बालमीक पांडेय & शिवप्रताप सिंह @ कटनी. इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद भी कटनी में जिम्मेदार महकमे चेते नहीं हैं, शहर में रोजाना लाखों लीटर पानी की सप्लाई हो रही है, लेकिन उसकी गुणवत्ता पर सवाल जस का तस बना हुआ है, कई वार्डों में मटमैला और बदबूदार पानी लोगों की मजबूरी बन चुका है, जर्जर पाइपलाइनें नालों से होकर गुजर रही हैं और लीकेज आम बात है, इसके बावजूद नगर निगम की रिपोर्ट में सब कुछ ठीक बताया जा रहा है, सवाल यह है कि जब पानी के टीडीएस मान खतरनाक स्तर पर हैं, इसका खुलासा पत्रिका द्वारा शुक्रवार की की गई पड़ताल में सामने आया...। तो फिर जांच किस आधार पर हो रही है, सार्वजनिक स्थलों की उपेक्षा क्यों है, क्या किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार किया जा रहा है, अगर कोई बीमार हुआ व जान गई तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा...।
इंदौर में दूषित पानी पीने से 17 लोगों की अकाल मौत के बाद भी कटनी शहर में इससे सबक लेते हुए गंभीर एहतियात नहीं बरते जा रहे हैं। इंदौर में सिस्टम की खामी का खामियाजा जहां कई लोगों को जान देकर चुकाना पड़ा, वहीं हजारों लोग आज भी जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। इसके बावजूद कटनी में नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग, प्रशासन की लापरवाही सामने आ रही है।
शहर के 45 वार्डों में नगर निगम द्वारा प्रतिदिन लगभग 24 एमएलडी पानी की आपूर्ति करीब 23 हजार घरों में की जा रही है, लाखों लोग पानी नी रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि शहर के कई वार्डों में शुद्ध पेयजल की आपूर्ति नहीं हो रही। कई इलाकों में नलों से शुरुआत में मटमैला पानी आता है, तो कहीं पानी में तेज दुर्गंध महसूस की जाती है। इसकी प्रमुख वजह करीब 25 साल पुरानी जर्जर जलापूर्ति लाइनें, उनका नालों-नालियों से होकर गुजरना और जगह-जगह लीकेज होना बताया जा रहा है।
चौंकाने वाली बात यह है कि इन गंभीर समस्याओं के बावजूद नगर निगम अपनी आंतरिक जांच में सब कुछ ठीक (ऑल इज वेल) होने का दावा कर रहा है। इसी बीच पत्रिका टीम ने शुक्रवार को शहर के विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर पानी के टीडीएस मान की जांच की, जिसमें स्थिति बेहद चिंताजनक पाई गई। जिला अस्पताल के गेट पर उपलब्ध मरीजों के लिए पानी का टीडीएस मान 500 से अधिक 510 दर्ज किया गया। वहीं घंटाघर रामलीला मैदान स्थित हैंडपंप, जहां प्रतिदिन सैकड़ों मजदूर पानी पीते हैं, वहां का टीडएस खतरनाक आया है यहां टीडीएस मान 600 के ऊपर पाया गया। वहीं नगर निगम परिसर में लगे नल का टीडीएस 558 दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार यह स्तर मानव स्वास्थ्य के लिए घातक माना जाता है। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो इंदौर जैसी भयावह घटना की पुनरावृत्ति कटनी में भी होने से इनकार नहीं किया जा सकता! ऐसे में जरूरी है कि जिम्मेदार विभाग गंभीरता दिखाएं और शहरवासियों को सुरक्षित व शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए।
पत्रिका टीम ने जब घंटाघर रामलीला मैदान में स्थित हैंडपंप का टीडीएस चैक किया तो इसका मान 612 था, जो कि मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक है। यहां पर सिर्फ गंदा पानी स्रोत में समा रहा है बल्कि लोगों की पेशाब भी जा रही है, जिसे देखने वाला कोई नहीं है।
पत्रिका टीम ने जिला अस्पताल के प्रवेश द्वार कि किनारे मरीजों के लिए लगे वॉटर कूलर के पानी की जांच की गई तो इसका टीडीएस मान 510 आया है। इस वॉटरकूलर से मरीज व परिजन दिनभर पानी पीते हैं।
नगर निगम परिसर में केसीएस स्कूल जाने वाले गेट पर लगे नल से आने वाले पानी के टीडीएस का मान 558 आया है, जो सेहत के लिए ठीक नहीं है। हैरानी की बात तो यह है कि नगर निगम परिसर का जब यह हाल है तो शहर का अंदाजा लगाया सकता है।
स्टेशन: कटनी जंक्शन के प्लेटफॉर्म क्रमांक दो पर लगे सार्वजनिक नल से आने वाली पानी की टीडीएस-446 दर्ज किया गया।
रेलवे स्टेशन: मुड़वारा रेलवे स्टेशन के फुटओवर ब्रिज के समीप लगे सार्वजनिक नल का टीडीएस-371 दर्ज किया गया।
कलेक्ट्रेट: ला मुख्यालय कलेक्ट्रेट स्थित नल में टीडीएस का मान 201 दर्ज किया गया है।
बस स्टॉप: बस स्टैंड में लगे हैंडपंप का टीडीएस मान 288 किया गया दर्ज।
आश्रय स्थल: रैन बसेरा बस स्टैंड में लगे वॉटर कूलर में आने वाले पानी में पाया गया टीडीएस-202
रसोई घर: दीन दयाल की रसोई पुराने आरटीओ कार्यालय में रखी पानी की टंकी, जिससे गरीबों के लिए बनता है भोजन उसका टीडीएस रहा-368
फ़ूड सेंटर: चौपाटी में लोगों के लिए खाद्य सामग्री बनाने वाले पानी में पाया गया टीडीएस-472।
पानी में टीडीएस का अर्थ है पानी में घुले हुए कुल ठोस पदार्थ, जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम, सोडियम, पोटैशियम, क्लोराइड, सल्फेट, बाइकार्बोनेट आदि। इसे पीपीएम (पार्ट पर मिलियन )में मापा जाता है। या फिर इसे एमजी/लीटर में मापते हैं।
- 0-50 टीडीएस बहुत शुद्ध
- 50-150 टीडीएस सबसे उत्तम
- 150-300 टीडीएस अच्छा और सुरक्षित
- 300-500 टीडीएस स्वीकार्य
- 500 टीडीएस से अधिक पीने योग्य नहीं
पानी में टीडीएस अधिक होने से कई नुकसान होते हैं। पानी का स्वाद कड़वा या खारा हो जाता है, किडनी स्टोन की संभावना बढ़ती है, पाचन तंत्र पर असर, गैस, अपच, ब्लड प्रेशर की समस्या (सोडियम अधिक होने पर), हड्डियों पर प्रभाव (खनिज असंतुलन), बच्चों में विकास पर असर, लंबे समय में हार्ट और किडनी पर दबाव होता है। टीडीएस कम होने पर शरीर को जरूरी खनिज नहीं मिलते, जिससे कमजोरी, थकान, इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, लंबे समय तक आरओ का अत्यधिक शुद्ध पानी नुकसानदायक माना गया है।
सूचना के अधिकार के तहत 21 मार्च 2025 को सूचना के अधिकार के तहत मंगलजीत सिंह ने नगर निगम से जानकारी मांगी कि शहर में कुल पानी की टंकियों संख्या, वार्ड अनुसार विवरण, सफाई की तिथि पिछले 5 वर्षों में, प्रत्येक टंकी के सफाई की प्रमाणिक रिपोर्ट, 5 वर्षों में सफाई पर हुए खर्च का विवरण व पानी की गुणवत्ता रिपोर्ट, पांच वर्षों में जल जनित रोगों की रोकथाम के लिए किए गए प्रयासों का विवरण व रिपोर्ट मांगी, लेकिन नगर निगम ने गाल जवाब दिया है।
शुक्रवार को नगर निगम में आयोजित परिषद की बैठक में शहर विधायक संदीप जायसवाल ने पानी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यदि जनता को खराब पानी पिलाया गया तो अधिकारियों की गलती का खामियाजा जनप्रतिनिधियों को भुगतान पड़ेगा। इसलिए पार्षदों को साथ लेकर हर हैंडपंप, हर नलकूप की जांच करें, विधायक ने कहा कि समस्या से बचने के लिए हर संभव उपाय करें।
शहर में हर दिन पानी के शुद्धता की जांच कराई जा रही है। किसी भी स्रोत में यदि समस्या है तो जांच कराएंगे। टीडीएस मान अधिक है तो उसे भी दिखवाया जाएगा। शहरवासियों को शुद्ध पानी मिले यह व्यवस्था सुनिश्चित कराई जा रही है।