कटनी

नवरात्र विशेष: 1826 में राजा ने कराई थी मां शारदा की स्थापना, आस्था का अनूठा संगम

नवरात्र में विजयराघवगढ़ के मातारानी धाम में उमड़ रही आस्था की भीड़, देररात तक गूंज रहे जयकारे

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Mar 25, 2026
Maan Sharda's special story on Navratri

कटनी/विजयराघवगढ़. नवरात्र पर्व के दौरान जिले के विजयराघवगढ़ स्थित मां शारदा मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। यह प्राचीन धाम न केवल कटनी जिले, बल्कि पूरे प्रदेश और देशभर के भक्तों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां मां शारदा के दर्शन के लिए प्रतिदिन सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं और पूरा वातावरण भक्ति, श्रद्धा और उल्लास से सराबोर नजर आ रहा है। मां शारदा मंदिर की स्थापना वर्ष 1826 में विजयराघवगढ़ रियासत के राजा प्रयागदास द्वारा की गई थी। तभी से यह धाम श्रद्धालुओं के विश्वास का केंद्र बना हुआ है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मां के दर्शन करने पर भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यह मंदिर ऐतिहासिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान अंग्रेजों ने इस मंदिर और किले को क्षति पहुंचाई थी। बाद में वर्ष 1984 में मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया, जिसमें मैहर के पंडा देवी प्रसाद द्वारा पूजन-अभिषेक कर मंदिर को पुन: स्थापित किया गया।

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आस्था और पर्यटन का संगम

मंदिर परिसर के आसपास सुंदर बाग, भरत बाग, राम बाग, अखाड़ा, राम-जानकी मंदिर, चारों धाम की मूर्तियां और प्राचीन किला स्थित हैं, जो इसे धार्मिक के साथ-साथ पर्यटन की दृष्टि से भी आकर्षक बनाते हैं। नवरात्र और चैत्र मास में यहां विशाल मेला लगता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। मां शारदा को देवी सरस्वती का स्वरूप माना जाता है। मैहर की तर्ज पर यह मंदिर भी पहाड़ी पर स्थित है, जिससे इसकी धार्मिक महत्ता और बढ़ जाती है। श्रद्धालु यहां भोर में जल अर्पित कर पूजा-अर्चना करते हैं, वहीं भजनों की मधुर धुनें वातावरण को भक्तिमय बना देती हैं।

स्थापना का है गौरवशाली इतिहास

विजयराघवगढ़ नगरी का इतिहास 18वीं सदी से जुड़ा हुआ है। बुंदेला शासनकाल में ठाकुर बेनी सिंह और उनके पुत्र दुर्जन सिंह को यह क्षेत्र प्राप्त हुआ करता था। बाद में 1826 में राजा प्रयागदास ने अपने हिस्से में आए विंध्य क्षेत्र में विजय के प्रतीक के रूप में किले और मां शारदा मंदिर का निर्माण कराया। विजयराघवगढ़ राज्य की स्थापना की। करीब 198 वर्षों से यह धाम श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान कर रहा है और नवरात्र के पावन अवसर पर यहां विशेष पूजा-अर्चना का क्रम निरंतर जारी है।

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Published on:
25 Mar 2026 09:34 am
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