वित्तीय वर्ष खत्म होने से पहले राजस्व वसूली की भागदौड़ तेज, नगर निगम, बिजली, आबकारी, खनिज और रजिस्ट्री विभाग अलर्ट, गली-गली शिविर, घर-घर पहुंच रहे वसूली अधिकारी, किसी की कट रही बिजली तो कहीं पर हो रही कुर्की की कार्रवाई, नगर निगम भी कर रहा तालाबंदी, अन्य विभाग भी मैदान में उतरे
कटनी. जिले में चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 की समाप्ति में अब महज 14 दिन शेष रह गए हैं। ऐसे में राजस्व लक्ष्य पूरा करने को लेकर प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। नगर निगम, आबकारी, खनिज, पंजीयक कार्यालय, बिजली विभाग और मंडी समिति सहित कई विभाग अपने-अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए दिन-रात जुटे हुए हैं। हालांकि कई विभाग अभी भी लक्ष्य से पीछे चल रहे हैं, जिससे अधिकारियों की चिंता बढ़ती जा रही है।
राजस्व वसूली बढ़ाने के लिए नगर निगम द्वारा गली-गली शिविर लगाए जा रहे हैं, वहीं कई विभागों में छुट्टियों के दिन भी कार्यालय खोलकर काम किया जा रहा है। वसूली अधिकारी और कर सहायक घर-घर जाकर बकाया राशि जमा कराने के लिए लोगों को प्रेरित कर रहे हैं। बकायादारों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं और कई मामलों में कुर्की, तालाबंदी जैसी सख्त कार्रवाइयां भी शुरू कर दी गई हैं।
बिजली विभाग में बिल वसूली को लेकर बड़ी टेंशन है। जिलेभर में 131 करोड़ रुपए 1 लाख 32 हजार उपभोक्ताओं से वसूल किया जाना था। समाधान योजना में 41 प्रतिशत उपभोक्ताओं ने बिल जमा किया है। 13.50 प्रतिशत शेष राशि जमा हुई है। लगातार कार्रवाई हो रही है। 1 मार्च से 10 हजार 500 उपभोक्ताओं के कनेक्शन काट दिए गए हैं, जिनकी 18 करोड़ 50 लाख रुपए बकाया है। अबतक विभाग 11 करोड़ रुपए विभाग वसूल पाया है।
परिवहन विभाग भी वित्तीय वर्ष के लक्ष्य को पूरा करने के लिए टैक्स जमा कराए जाने को लेकर पहल कर रहा है। विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष का लक्ष्य 63 करोड़ रुपए तय किया गया था। अबतक 50 करोड़ रुपए का राजस्व सरकार के खजाने में जमा हो चुका है। लगभग 12 करोड़ रुपए का राजस्व 14 दिनों में और जमा कराना है।
जिला पंजीयक विभाग में भी राजस्व प्राप्ति के लक्ष्य को लेकर काम चल रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 149 करोड़ रुपए का लक्ष्य तय किया गया था। जिला पंजीयक के अनुसार अबतक विभाग को 135 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हो चुका है। वित्तीय वर्ष के समाप्ति तक लक्ष्य को पूरा करने प्रयास जारी हैं। पूरानी रिकवरी पर भी जोर दिया जा रहा है।
नगर निगम भी लक्ष्य को पूरा करने के लिए पूरी तन्मयता से जुटा है। अवकाश के दिनों में भी कार्यालय खोलकर व शिविर आयोजित कर रास्व वसूली की जा रही है। हालांकि नगर निगम अभी लक्ष्य से काफी पीछे चल रहा है। वित्तीय वर्ष में 51 करोड़ की जलकर डिमांड थी, जिसमें साल हाल की 6 करोड़ है। अबतक 6 करोड़ 8 लाख 84 हजार 448 रुपए वसूल की जा चुकी है। इस दौरान टैक्स जमा न करने पर 59 नल कनेक्शन काट दिए गए हैं। बिल जमा न करने वाले सभी शेष उपभोक्ताओं को नोटिस दिया गया है। सपत्तिकर 29 करोड़ वसूली किया जाना है, लेकिन अभी तक विभाग सिर्फ 12 करोड़ रुपए ही वसूल हो पाया है, लगातार कार्रवाई की जा रही है। दुकानें सील की जा रही हैं, नोटिस जारी किए जा रहे हैं।
जिला आबकारी विभाग भी वित्तीय वर्ष 2025-26 के मिले लक्ष्य के करीब पहुंच रहा है। जिला आबकारी अधिकारी विभा मरकाम के अनुसार 378 करोड़ रुपए निष्पादन मूल्य का लक्ष्य तय किया गया था। अबतक 356 करोड़ 60 लाख रुपए जमा हो चुके हैं। वित्तीय वर्ष समाप्ति के पहले तक 22 करोड़ रुपए और जमा कराया जाना है, जिसकी वसूली के लिए प्रयास जारी हैं।
खनिज विभाग भी वित्तीय वर्ष की लक्ष्य को प्राप्त करने में जुटा हुआ है। जिला खनिज अधिकारी डॉ. रत्नेश दीक्षित के अनुसार खनिज विभाग को 200 करोड़ रुपए से अधिक का लक्ष्य दिया गया था। अबतक 130 करोड़ रुपए जमा हो गया है। शेष राशि जमा कराने विभाग की कवायद जारी है। 5 करोड़ रुपए से अधिक की राशि सरकारी कोष में जमा कराई जानी है।
कृषि उपज मंडी पहरुआ को भी राजस्व वसूली का बड़ा लक्ष्य मिला है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 30 करोड़ रुपए के राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य तय किया गया था। मंडी सचिव के अनुसार अबतक 22 करोड़ रुपए जमा हो गए हैं। लगभग 8 करोड़ रुपए मार्च माह में जमा कराने जद्दोजहद जारी है।
सूत्रों के मुताबिक आबकारी और खनिज विभाग को बड़े लक्ष्य हासिल करने हैं। नगर निगम को संपत्ति कर, जलकर और अन्य करों की वसूली में तेजी लानी पड़ रही है। रजिस्ट्री कार्यालय में दस्तावेज पंजीयन बढ़ाने पर जोर है, जबकि बिजली विभाग बकाया बिलों की वसूली में सख्ती दिखा रहा है। मंडी समिति भी शुल्क वसूली को लेकर सक्रिय हो गई है। पिछले वित्तीय वर्ष में भी कई विभाग अंतिम दिनों में ही सक्रिय हुए थे। कुछ विभाग लक्ष्य हासिल करने में सफल रहे, जबकि कई विभाग लक्ष्य से पीछे रह गए थे। इस बार प्रशासन पहले से ही सक्रियता दिखा रहा है, लेकिन अभी भी कई मोर्चों पर गति बढ़ाने की जरूरत है।
वसूली अभियान के चलते आम लोगों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई उपभोक्ताओं का कहना है कि सालभर उनकी समस्याएं नहीं सुनी जातीं, लेकिन अब लगातार फोन कॉल और नोटिस भेजे जा रहे हैं। कुछ मामलों में पुरानी रसीद न होने पर दोबारा राशि मांगी जा रही है, जबकि ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट न होने से भी विवाद की स्थिति बन रही है। चंडिका नगर निवासी अरविंद पयासी बताते हैं कि गलत रीडिंग का बिल भेजा गया और रुपए जमा करने के बाद भी लाइट काट दी गई।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम और बिजली विभाग के बड़े बकायादार करोड़ों रुपये दबाए बैठे हैं, लेकिन उनके खिलाफ कार्रवाई धीमी है। वहीं छोटे उपभोक्ताओं पर सख्ती दिखाई जा रही है। 1000-2000 रुपए के बकाया पर बिजली काटने जैसी कार्रवाई की जा रही है, जबकि बड़े बकायेदारों से वसूली में विभाग पीछे नजर आ रहे हैं।
ऋण वितरण का भी दबाव
वित्तीय वर्ष के अंतिम दिनों में जहां एक ओर राजस्व वसूली का दबाव है, वहीं दूसरी ओर कई विभागों पर ऋण वितरण का लक्ष्य पूरा करने का भी दबाव बढ़ गया है। बैंक, क्रेडिट संस्थान और आदिवासी वित्त एवं विकास निगम सहित अन्य सरकारी योजनाओं से जुड़े विभाग हितग्राहियों को ऋण बांटने में जुटे हैं। अधिकारी गांव-गांव पहुंचकर लोगों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। हालांकि कई मामलों में जल्दबाजी में दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की जा रही है, जिससे बाद में विवाद की स्थिति बन सकती है। इस दोहरी चुनौती के बीच प्रशासन के सामने संतुलन बनाए रखना बड़ी जिम्मेदारी बन गया है। उद्योग विभाग मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना में 160 का लक्ष्य तय किया गया था, 185 याने कि 115 प्रतिशत वितरण हो गया है। पीएम विश्वकर्मा योजना में 663 लोगों को टूल किट दिए गए हैं। इसमें 2 हजार प्रकरण भेजे गए थे, कम लोग ही लाभान्वित किए गए हैं। इसी प्रकार भीमराव अंबेडकर आर्थिक कल्याण योजना में 69 में से 69 का लक्ष्य पूरा हो गया है। भगवान बिरसामुंडा स्वरोजगार योजना में 21 में 17 प्रकरण, टंट्या मामा आर्थिक कल्याण योजना में 104 में 40, संत रविदास स्वरोजगार योजना में 27 में से 21 प्रकरण सहित अन्य योजनाओं में विभाग पीछे है।