यात्रियों की सुरक्षा पर मंडराया खतरा, 6 ट्रेनें प्रभावित; आरपीएफ ने चार आरोपियों को पकड़ा, एक अन्य फरार
कटनी। कटनी–बीना रेलखंड पर सिग्नल सिस्टम से जुड़ी कीमती कॉपर वायर चोरी का गंभीर मामला सामने आया है, जिसने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस वारदात के चलते न केवल ट्रेनों का संचालन प्रभावित हुआ, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ गई थी। हालांकि समय रहते स्थिति को नियंत्रित कर लिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। जानकारी के अनुसार, 5 अप्रैल से 8 अप्रैल के बीच अज्ञात बदमाशों ने कटनी मुडवारा रेलवे स्टेशन से लेकर न्यू मझगवां फाटक तक रेलवे सिग्नलिंग सिस्टम में लगी कॉपर वायर को निशाना बनाया। यह वायर ट्रेनों के सुरक्षित संचालन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। सिग्नल प्रणाली के सुचारू संचालन में इसकी अहम भूमिका रहती है, और इसके क्षतिग्रस्त या चोरी हो जाने पर ट्रेनों की आवाजाही जोखिमपूर्ण हो जाती है।
बताया जा रहा है कि चोरों ने इस दौरान 4 से 5 सिग्नलों को नुकसान पहुंचाते हुए वहां से कॉपर वायर निकाल ली। इस वजह से संबंधित रेलखंड पर सिग्नल सिस्टम बाधित हो गया, जिससे ट्रेनों को सामान्य गति से चलाना संभव नहीं रहा। रेलवे प्रशासन को तत्काल ‘कॉशन ऑर्डर’ जारी करना पड़ा, जिसके तहत ट्रेनों को बेहद धीमी गति से सावधानीपूर्वक चलाया गया।
इस घटना के कारण चार मालगाड़ियां और दो यात्री ट्रेनें प्रभावित हुईं। इनमें पैसेंजर ट्रेनें भी शामिल थीं, जो अपने निर्धारित समय से देरी से अपने गंतव्य के लिए रवाना हुईं। हालांकि रेलवे अधिकारियों की सतर्कता के चलते कोई दुर्घटना नहीं हुई, लेकिन यदि समय रहते कदम नहीं उठाए जाते, तो बड़ा हादसा हो सकता था। घटना की जानकारी मिलते ही रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच शुरू की। तकनीकी साक्ष्यों और स्थानीय सूचना के आधार पर टीम ने तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपियों तक पहुंच बनाई।
आरपीएफ पोस्ट प्रभारी वीरेंद्र सिंह ने बताया कि इस मामले में मुख्य आरोपी आंशु उर्फ आलियाश, निवासी भट्टा मोहल्ला, सहित उसके गैंग के तीन अन्य सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपियों के कब्जे से चोरी की गई सिग्नल कॉपर वायर भी बरामद की गई है। पकड़े गए आरोपियों के खिलाफ आरपीएफ एक्ट और रेलवे अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। वहीं इस गिरोह से जुड़े एक अन्य आरोपी की तलाश जारी है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
इस घटना के बाद रेलवे प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। अधिकारियों ने रेलखंड की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। खासकर स्टेशनों के आउटर क्षेत्रों और सुनसान ट्रैक पर निगरानी बढ़ा दी गई है। आरपीएफ ने भी गश्त तेज कर दी है और ट्रैक के आसपास संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति ट्रैक के किनारे संदिग्ध स्थिति में पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
रेलवे प्रशासन का मानना है कि इस तरह की घटनाएं न केवल रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि हजारों यात्रियों की जान को भी जोखिम में डाल देती हैं। इसलिए भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए निगरानी तंत्र को और सुदृढ़ किया जा रहा है। फिलहाल, आरपीएफ की त्वरित कार्रवाई से जहां एक ओर आरोपियों की गिरफ्तारी संभव हो सकी है, वहीं दूसरी ओर समय रहते उठाए गए कदमों से एक बड़े रेल हादसे को टाल दिया गया है।