266 भूखंड हुए थे चिन्हित, 114 लोगों को आवंटित हुए थे प्लाट, 19 लोगों की निरस्त हुई लीज, 95 लोगों को फाइनल किए गए प्लाट
कटनी. शहर के विकास को मुंह चिढ़ाती नगर निगम की ट्रांसपोर्ट नगर योजना अभी भी एक असफल और बेजान परियोजना बनकर रह गई है! वर्ष 1983-84 में भारी वाहनों की आवाजाही, लोडिंग-अनलोडिंग से लगने वाले जाम और आम जनता की परेशानी को देखते हुए ट्रांसपोर्ट नगर विकसित करने की शहर के बाहर पुरैनी कुठला में योजना बनाई गई थी, लेकिन चार दशक बीत जाने के बाद भी यह योजना धरातल पर नहीं उतर सकी। हैरानी की बात यह है कि वर्ष 2012 में 114 ट्रांसपोर्ट कारोबारियों को पुरैनी क्षेत्र में भूखंडों का आवंटन तक कर दिया गया, इसके बावजूद आज तक ट्रांसपोर्ट कारोबार शिफ्ट नहीं हो पाया। नतीजा यह है कि शहर के बीचों-बीच चल रहे ट्रांसपोर्ट व्यवसाय का खामियाजा लाखों नागरिक रोजाना जाम, दुर्घटनाओं और प्रदूषण के रूप में भुगत रहे हैं।
इन वर्षों में कई महापौर बदले, तेज-तर्रार आयुक्त आए, जनप्रतिनिधियों ने दावे और वादों की लंबी फेहरिस्त गिनाई, लेकिन जमीनी हकीकत जस की तस बनी है। ट्रांसपोर्टरों के साथ कई दौर की बैठकें हुईं, पर न तो आधारभूत सुविधाएं विकसित की गईं और ना ही शिफ्टिंग की ठोस समयसीमा तय हुई। नगर निगम की गंभीर लेटलतीफी और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता ने ट्रांसपोर्ट नगर योजना को मजाक बना दिया है, जबकि शहर आज भी इस ज्वलंत समस्या से जूझ रहा है।
आपको जानकर हैरानी होगी कि नगर निगम द्वारा 1982-83 में बनाई गई ट्रांसपोर्ट नगर योजना के बाद कई साल तक जमीन आवंटन आदि की प्रक्रिया चली। 2012 में प्लाट आवंटन की प्रक्रिया की गई। लॉटरी पद्धति से पूर्व 266 ट्रांसपोर्टरों में से 114 लोगों को भूखंड आवंटित किए गए थे। इसके बाद हाल के एक साल के अंदर 19 ट्रांसपोर्टरों के आवंटन निरस्त किए गए हैं। 95 कारोबारी यहां पर काबिज हो चुके हैं। 40 से अधिक ने निर्माण कर लिया है व कुछ दुकानें व गोदामों का निर्माण चल रहा है।
हैरानी की बात तो यह है कि पूर्व में 266 लोगों की जो सूची ट्रांसपोर्टरों की बनाई गई थी उनमें से जांच में कई ट्रांसपोर्टर ही नहीं पाए गए। तथा कथित 152 ट्रांसपोर्टर अनुपयुक्त पाए गए हैं, जिन्हें भूखंडों का आवंटन नहीं किया गया। 2019 से चल रही नवीन ट्रांसपोर्टरों को भूखंड आवंटन के लिए पहल पर परीक्षण, भौतिक सत्यापन के बाद तहसीलदार द्वारा सत्यापन किया गया, जिसमें यह पाया गया कि 115 ट्रांसपोर्टरों की 266 के नामों में शामिल सूची में से पृथक व नवीन ट्रांसपोर्टर थे। 11 नाम तो ऐसे मिले जो दोनों सूचियों में शामिल रहे।
अभी पुरैनी ट्रांसपोर्ट नगर में 126 प्लाट रिक्त पड़े हैं। यहां पर अब लॉज, ढाबा, पेट्रोल पंप, रेस्टोरेंट, धर्मकांटा, रिपेयरिंग यार्ड, पार्किंग, दुकानें आदि खोलने के लिए दिए जाने की योजना है। प्लाटों का मूल्यांकन करते हुए दाम फिक्स कर नीलामी की कार्रवाई कराई जाएगी। बता दें इनकी नीलामी कलेक्टर गाइड लाइन व विकास व्यय जोडकऱ किया जाएगा। नगर निगम द्वारा वहां पर जो भी मूलभूत सुविधाओं पर काम कराया गया है उसके खर्चे की राशि जोड़ी जाएगी। बता दें कि यहां पर 15 बाइ 30 के 27, 12 बाई 15 के 93 व 6 बाइ 15 के 6 प्लाट खाली हैं।
- 102 कारोबारियों ने पुरैनी ट्रांसपोर्ट नगर में कराई थी जमीन की रजिस्ट्री।
- 60 दिन में कारोबार शुरू करने एक साल पहले दिया गया था आश्वासन।
- 50 से अधिक कारोबारियों ने किया है मौके पर निर्माण।
- 126 खाली प्लाटों की नीलामी में चल रही है नगर निगम में देरी।
- 1 वर्ष में पट्टा अनुबंध के बाद शुरू करना था कारोबार।
- 30 वर्ष की लीज पर दिए गए हैं कारोबारियों को जमीन के पट्टे।
- 20 हेक्टेयर पर तैयार कराया गया है ट्रांसपोर्ट नगर।
पिछले कुछ वर्षों से यहां पर शेष पड़े भूखंडों को नो प्रॉफिट-नो लॉस पर देने की कवायद चल रही थी। कई मर्तबा नगर निगम द्वारा, जनप्रतिनिधियों द्वारा नगरीय प्रशासन विभाग को पत्राचार किया गया, लेकिन वहां से कोई रियायत नहीं मिली। कलेक्टर गाइड लाइन के अनुसार ही भूखंड आवंटित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके बाद अब नगर निगम ने नीलामी के लिए पहल शुरू की है। इसके लिए दो दिन पहले नीलामी प्रक्रिया के लिए ननि में बैठक भी आयोजित की गई।
ट्रांसपोर्ट नगर को जल्द शिफ्ट करने तेजी से प्रक्रिया चल रही है। 95 कारोबारियों द्वारा निर्माण किए जा रहे हैं। शेष 126 भूखंडों की नीलामी के लिए प्रक्रिया चल रही है। शहर से पुरैनी में कारोबार शिफ्ट हो, इसके लिए और तेजी से काम किया जाएगा।