कवर्धा

15 साल इंतजार के बाद ग्रामीणों ने खुद संभाली कमान, 5 घंटे में बना डाला नाले पर रास्ता

Bridge Construction: कबीरधाम के खपरी गांव में 15 साल से पुलिया का इंतजार कर रहे ग्रामीणों ने खुद श्रमदान कर पांच घंटे में बैजागी नाले पर अस्थायी रास्ता बना दिया।
3 min read
• •
Oct 04, 2026
Rural Development
कबीरधाम में ग्रामीणों की मिसाल (Photo Source- Patrika)

Rural Development: कबीरधाम जिले के खपरी गांव में ग्रामीणों ने प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ अनोखी मिसाल पेश की है। जिस पुलिया के निर्माण के लिए गांव के लोग पिछले 15 साल से सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे थे, वह काम अब तक पूरा नहीं हो सका। बार-बार मांग और आश्वासन के बावजूद जब नाले पर पक्की पुलिया नहीं बनी तो ग्रामीणों ने समस्या का समाधान खुद करने का फैसला किया।

रविवार सुबह गांव के 50 से अधिक ग्रामीण फावड़े और खाली प्लास्टिक की बोरियां लेकर बैजागी नाले पर पहुंचे। सभी ने मिलकर बोरियों में मिट्टी और रेत भरी और नाले के बीच उन्हें एक के बाद एक बिछाना शुरू किया। करीब पांच घंटे तक लगातार श्रमदान करने के बाद ग्रामीणों ने नाले के ऊपर आवागमन के लिए अस्थायी रास्ता तैयार कर लिया।

Kabirdham Rural News: 15 साल से कर रहे थे पक्की पुलिया की मांग

ग्रामीणों के मुताबिक खपरी गांव से करीब डेढ़ किलोमीटर दूर बैजागी नाला है। इसी रास्ते से ग्रामीण महामाया मंदिर और अपने खेतों तक पहुंचते हैं। बारिश के मौसम में नाले में पानी बढ़ने के कारण रास्ता बंद हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिया निर्माण के लिए पिछले 15 वर्षों से जनपद और जिला प्रशासन से मांग की जा रही है। अधिकारियों के कार्यालय में आवेदन दिए गए और जनप्रतिनिधियों से भी समस्या दूर करने की अपील की गई, लेकिन हर बार आश्वासन ही मिला।

बारिश में तीन फीट से ज्यादा पानी

बैजागी नाले में बारिश के दौरान तीन फीट से अधिक पानी भर जाता है। तेज बहाव की स्थिति में इसे पार करना बेहद मुश्किल हो जाता है। सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को होती है। किसानों के लिए भी यह रास्ता बेहद महत्वपूर्ण है। नाला पार नहीं होने के कारण उन्हें खेतों तक पहुंचने में परेशानी होती है। कई बार पानी कम होने का इंतजार करना पड़ता है, जिससे खेती से जुड़े काम प्रभावित होते हैं।

मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को भी परेशानी

बैजागी नाला केवल खेतों तक पहुंचने का रास्ता नहीं है। गांव से महामाया मंदिर जाने के लिए भी ग्रामीण इसी मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। नवरात्रि के दौरान मंदिर में ज्योत प्रज्वलित करने और दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। बारिश के दिनों में नाले में पानी भर जाने से श्रद्धालुओं को भी काफी परेशानी होती है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल नवरात्रि के समय यह समस्या सामने आती है, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं हुआ।

बोरियों में मिट्टी-रेत भरकर बनाया रास्ता

रविवार को ग्रामीणों ने तय किया कि अब वे सरकारी व्यवस्था का इंतजार नहीं करेंगे। सुबह से ही लोग नाले के पास जुटने लगे। किसी ने फावड़ा संभाला तो किसी ने बोरियों में मिट्टी और रेत भरने का काम किया। इसके बाद इन बोरियों को नाले के पानी के बीच व्यवस्थित तरीके से बिछाया गया। ग्रामीणों की सामूहिक मेहनत का नतीजा करीब पांच घंटे में सामने आया। नाले पर ऐसा रास्ता तैयार हो गया, जिससे ग्रामीणों का आवागमन कुछ हद तक आसान हो गया।

ग्रामीणों ने कहा- अस्थायी रास्ता समाधान नहीं

श्रमदान के बाद ग्रामीणों ने साफ कहा कि यह व्यवस्था स्थायी समाधान नहीं है। उन्होंने केवल बारिश के दौरान आवागमन की तत्काल परेशानी को कम करने के लिए यह रास्ता बनाया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब 50 से अधिक लोग मिलकर सिर्फ पांच घंटे में नाले को पार करने का रास्ता तैयार कर सकते हैं तो प्रशासन 15 साल में पक्की पुलिया क्यों नहीं बना सका। उनका कहना है कि गांव के लोगों को हर साल इसी तरह जोखिम उठाने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए।

नवरात्रि से पहले पक्की पुलिया की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि आगामी नवरात्रि से पहले बैजागी नाले पर पक्की पुलिया का निर्माण कराया जाए। इससे ग्रामीणों के साथ मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं और किसानों को भी स्थायी राहत मिल सकेगी। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मांग किसी नई सुविधा की नहीं, बल्कि सुरक्षित आवागमन के लिए जरूरी बुनियादी सुविधा की है। 15 साल से लंबित इस समस्या का स्थायी समाधान अब प्रशासन को करना चाहिए।

Updated on:
04 Oct 2026 07:20 pm
Published on:
04 Oct 2026 07:20 pm