दीपावली पर महालक्ष्मी का पूजन करना विशेष फलदायी। एेसे में मप्र के अनूठे मंदिर में विराजित सबसे ऊंची महालक्ष्मी प्रतिमा के दर्शन यहां कीजिए।
खंडवा. प्रदेश में पहला एेसा महालक्ष्मी मंदिर है जहां पर मां लक्ष्मी की सबसे ऊंची प्रतिमा विराजित है। लाल चौकी पर स्थित महालक्ष्मी मंदिर में ५.५ फीट ऊंची मां की प्रतिमा स्थापित है। यहां पर सालभर भक्तों का तांता लगा रहता है। वहीं शुक्रवार के दिन यहां पर बड़ी संख्या में भक्त दर्शन करने के लिए पहुंचते है। वहीं पूरे प्रदेश में बहुत ही कम स्थानों पर महालक्ष्मी मंदिर की प्रतिमा विराजित है।
पांच दिवसीय दीपावली महोत्सव
इस मंदिर में धनतेरस से दूज तक पांच दिवसीय दीपावली महोत्सव मनाया जाता है। पूजन पाठ कर लक्ष्मी माता के अनुष्ठान किए जाते हैं। यह मंदिर दीपावली के दिन व रात में खुला रहा है। मंदिर में सुबह शाम महाआरती के साथ मां का विशेष शृंगार किया जाता है। पं. बसंत महोदय व संजय पगारे ने बताया कि दीपोत्सव के पांच दिन यहां पर शृंगार पूजन पाठ के साथ मां लक्ष्मी के अनुष्ठान किए जाते हंै। दीपावली पर रात में कोशंबा पूजन कर कोसे के वस्त्र के साथ विशेष शृंगार किया जाता है। इस दिन बड़ी संख्या में भक्त यहां दर्शन करने के लिए पहुंचते है।
महालक्ष्मी मंदिर में ये होंगे आयोजन
धनतेरस- 17 अक्टूबर को सुबह 5.30 बजे मंगला आरती, सुबह 6 बजे काकड़ा आरती, शृंगार पूजन, सुबह 9 बजे आरती, सुबह 10 बजे धनवंतरी व ध्वज पूजन, दोपहर 12 बजे मध्यान आरती व नैवेद्य, शाम ५ बजे शृंगार व रात ८ बजे आरती
रूप चतुर्दशी- 18 अक्टूबर को सुबह 5.30 बजे मंगला आरती, सुबह 6 बजे काकड़ा आरती, हनुमान जन्मात्सव चोला शृंगार पूजन, सुबह 7 बजे आरती, सुबह 7.30 बजे लक्ष्मी माता का शृंगार पूजन आरती, दोपहर 12 बजे मध्यान आरती व नैवेद्य, शाम 5 बजे शृंगार व रात 8 बजे आरती
दीपावली- 19 अक्टूबर को सुबह 5.30 बजे मंगला आरती, सुबह 6 बजे महाकाकड़ा आरती, अभिषेक शृंगार पूजन, सुबह ९ बजे आरती, दोपहर 12 बजे मध्यान आरती व नैवेद्य, शाम 5 बजे शृंगार सहस्त्रार्चन व रात 8 बजे महाआरती, कोशांबा पूजन रात्रि स्थिर लग्न में। कोशांबा आरती सुबह 4 बजे.
पड़वा- 20 अक्टूबर को प्रतिपदा के दिन सुबह 5.30 बजे मंगला आरती, सुबह 6 बजे काकड़ा आरती, शृंगार पूजन, सुबह 9 बजे आरती की जाएगी, दोपहर 12 बजे मध्यान आरती व नैवेद्य, शाम 5 बजे विशेष शृंगार व रात 8 बजे मां महालक्ष्मी की आरती की जाएगी।
भाई दूज- 21 अक्टूबर को सुबह 5.30 बजे मंगला आरती, सुबह 6 बजे काकड़ा आरती, अभिषेक, शृंगार पूजन, सुबह 9 बजे आरती, अन्नकूट नैवेद्य व दर्शन शाम 4 बजे।