महीनों से क्षतिग्रत हैं डिवाइडर, रेलिंग के पाइप सड़क पर पड़े, डिवाइडर से निकली जानलेवा ग्रिल, सड़कों से उखड़ रहा सरिया
खंडवा. स्मार्ट बनने की दौड़ में शहर भाग रहा है और हकीकत ऐसी कि सड़कों पर जान का खतरा बना है। हर साल यहां विकास के नाम पर करोड़ों रुपए का बजट फूंक दिया जाता है। विकास कहां हुआ यह जानने के लिए शहर वाले भी उत्सुक हैं। लग्जरी गाडि़यों में गुजरने वाले अफसर यहां महज योजनाएं बनाते हैं और बजट का खर्च बताते हैं। लेकिन इन्हीं अधिकारियों को महीनों से टूटे बीच सड़क के डिवाइडर, सड़क पर निकली जानलेवा रेलिंग और ब्रिज से उखड़ रहे लोहे के तार नजर नहीं आते। खतरे भरी इस राह में खंडवा स्मार्ट बनेगा या नहीं इस पर भी सवाल है?
कलेक्टर की नहीं सुनता कोई
जिले के मुखिया कलेक्टर अनूप कुमार सिंह ने महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए नो एंट्री लगाई। इसके लिए पुलिस ने अपनी जिम्मेदारी समझ ली, लेकिन सहयोग करने वाले विभाग अपने काम के लिए अब भी चुप्पी साधे हैं। शहर के बीच की सड़कों पर सुधार के लिए आम जनता कई दफा आवेदन निवेदन कर चुकी है और कलेक्टर भी संबंधितों को निर्देश दे चुके, लेकिन उनकी बात कोई नहीं सुनता।
अब तो चुनाव भी हो गए
चुनाव का बहाना कर यहां नगर पालिक निगम, लोक निर्माण विभाग और एनएउचएआइ के जिम्मेदार अपना पल्ला झाड़ते रहे हैं। चुनाव बीतने के बाद अब इनके पास नए काम की फाइलें अटक गईं और पुराने निर्देश फाइलों में धूल फांक रहे हैं। शहर की नई सरकार बनने के बाद भी कोई ठोस कार्य योजना नहीं बनी। सड़क सुरक्षा समिति की बैठक का भी इंतजार करना पड़ रहा है।
अब तो देख लो साहब
शहर के मुख्य बस स्टैंड और कोतवाली के सामने क्षतिग्रस्त डिवाइडर महीनों से मरम्मत का इंतजार कर रहे हैं। यातायात व्यवस्था के लिहाज से इन डिवाइडर को हटा देना उचित होगा। रेलवे स्टेशन के ठीक सामने रेलिंग के पोल सड़क पर लटके हैं। बाबा अम्बेडकर चौक पर डिवाइडर की रेलिंग ऐसी निकली कि किसी की जान जाते देर नहीं लगेगी। ओवर ब्रिज तो हमेश सुर्खियों में रहा जहां अब सरिया उखड़ कर वाहनों में चुभने लगे हैं।
वर्जन...
सड़क सुरक्षा के लिहाज से नगर निगम को कई बार पत्र दिए हैं। क्षतिग्रस्त डिवाइडर और रेलिंग से वाहन चालकों को परेशानी होती है और जान का खतरा बना रहता है। सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में इन मुद्दों को रखा जाएगा।
- देवेन्द्र सिंह परिहार, सूबेदार, यातायात