
बड़वानी. राष्ट्रीय संत के नाम से मशहूर इंदौर के भय्यू महाराज के आत्महत्या कर लेने से बड़वानी और धार जिले के लोग भी अवाक है। बड़े-बड़े मसलों को बातचीत के जरिए हल करने के लिए केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार भय्यू महाराज पर पूरा भरोसा करती थी। यही वजह थी कि उन्हें प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री का दर्जा भी दिया था। पिछले वर्ष अगस्त में बड़वानी और धार जिले में नर्मदा आंदोलन के दौरान अनशन पर बैठी मेधा पाटकर को मनाने भी भय्यू महाराज ही आए थे। हालांकि मेधा पाटकर ने उनकी बात भी सुनी थी और अपनी भी सुनाई थी। अनशन तो नहीं टूटा था लेकिन भय्यू महाराज अपनी छाप छोडऩे में कामयाब जरूर हुए थे।
मेधा पाटकर अपने कई साथियों के साथ जुलाई २०१७ में अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठी थी। नौ दिनों तक लगातार अनशन के चलते स्थानीय प्रशासन और प्रदेश सरकार भी परेशान थी। ऐसे में दसवें दिन एक प्रतिनिधि मंडल मेधा पाटकर को मनाने के लिए भेजा गया। जिसमें संभागायुक्त संजय दुबे और भय्यू महाराज शामिल थे। बड़वानी से आठ किमी दूर धार जिले के चिखल्दा में अनशन स्थल पर काफी देर तक मेधा पाटकर से बातचीत की थी। करीब तीन घंटे वे क्षेत्र में रहे अपने प्रयास करते रहे थे। लेकिन यहां से उन्हें नाकामयाबी ही मिली थी।
खेत तालाब बनने का अभियान की शुरुआत की
भय्यू महाराज पिछले साल नर्मदा यात्रा के मौके पर सीएम के साथ महेश्वर आये थे। जबकि दो माह पूर्व सपत्नीक महेश्वर पहुचे थे। जहां उन्होंने नर्मदा जी का अभिषेक और आरती की थी। इसी साल जिले में सूर्योदय संस्था के माध्मय से जिले में किसानों के खेतों में खेत तालाब बनाने का अभियान शुरू किया गया।
भय्यू महाराज ने तुड़वाया था अन्ना हजारे का अनशन
भय्यू महाराज चर्चा में तब आए जब अन्ना हजारे के अनशन को खत्म करवाने के लिए तत्कालीन केंद्र सरकार ने अपना दूत बनाकर भेजा था। बाद में अन्ना ने उनके हाथ से जूस पीकर अनशन तोड़ा था। इसके अलावा पीएम बनने के पहले गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी सद्भावना उपवास पर बैठे थे। तब उपवास खुलवाने के लिए उन्होंने भय्यू महाराज आमंत्रित किया था।