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मप्र : जनजातीय मंत्री के गृह जिले में आदिवासी हॉस्टलों में डेढ़ करोड़ की रोटी मेकर मशीनें हो रहीं कबाड़

जनजातीय कार्य विभाग के हॉस्टल-आश्रमों में रोटी मेकर मशीनें पर अधिक खर्च से अधीक्षकों ने उपयोग बंद कर दिया है। इससे लाखों रुपए की मशीनें कबाड़ हो रहीं हैं। जनजातीय कार्य विभाग मंत्री विजय शाह के गृह जिले में 56 हॉस्टल-आश्रमों में मशीनें लगाई गई हैं।
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खंडवा

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Rajesh Patel

Aug 02, 2026

Tribal Hostel

खंडवा : उत्कृष्ट बालक हॉस्टल में स्टोर में रखी रोटी मेकर मशीन हो रही कबाड़।

जनजातीय कार्य विभाग के हॉस्टल-आश्रमों में रोटी मेकर मशीनें पर अधिक खर्च से अधीक्षकों ने उपयोग बंद कर दिया है। इससे लाखों रुपए की मशीनें कबाड़ हो रहीं हैं। जनजातीय कार्य विभाग मंत्री विजय शाह के गृह जिले में 56 हॉस्टल-आश्रमों में मशीनें लगाई गई हैं।

56 हॉस्टल-आश्रमों में लगाई गई हैं मशीनें

अनुसूचित जनजातीय हॉस्टल-आश्रमों में रोटी मेकर मशीनें पर अधिक खर्च से अधीक्षकों ने उपयोग बंद कर दिया है। इससे लाखों रुपए की मशीनें कबाड़ हो रहीं हैं। जनजातीय कार्य विभाग मंत्री विजय शाह के गृह जिले में 56 हॉस्टल-आश्रमों में मशीनें लगाई गई हैं। करीब डेढ़ करोड़ रुपए की रोटी मेकर मशीनें स्टोर में बेकार पड़ी हैं।

गुजरात की कंपनी ने की थी मशीनों की आपूर्ति

जनजातीय कार्य विभाग के हॉस्टलों में 10 माह पहले रोटी मेकर मशीनों को गुजरात की कंपनी ने आपूर्ति की थी। छात्रों को सहूलियत के लिए मशीनों से कम समय में रोटियां तैयार करेंगी। तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं के कारण ज्यादातर हॉस्टलों में मशीनों का उपयोग बंद है। मशीनें स्टोर रूम में धूल फांक रही हैं। और उन पर कबाड़ रखा हुआ है।

मशीन की रोटियां बच्चों को पसंद नहीं

अनुसूचित जनजाति हॉस्टलों में मशीन की रोटियां छात्रों को पसंद नहीं आ रहीं हैं। सर्किट हाउस उत्कृष्ट बालक हॉस्टल के छात्रों का कहना है कि मशीन की रोटियां कच्ची आती हैं। स्वाद भी हाथ से बनी रोटियों जैसा नहीं होता। रसोई में फिर से पारंपरिक तरीके से रोटियां बनाई जा रही हैं।

मशीन में रोटियां बनाने में खर्च अधिक

रसोईया का कहना है कि आटा हाथ से गूथना पड़ता है। मशीन से रोटियां पकाने में अधिक खर्च आता है। बिजली और गैस दोनों की खपत अधिक होती है। अधीक्षक बलराम रावत का कहना है कि मशीन में बिजली के साथ गैस ज्यादा लगती है। बच्चे मशीन की रोटियां नहीं खाते हैं। तवा पर रोटियां बनाई जा रही हैं। अंग्रेजी माध्यम बालक आश्रम की मशीन स्टोर में रखी हुई है।

गैस-बिजली का बढ़ा खर्च, मशीनों का उपयोग बंद

एक सिलेंडर से 10-12 दिन रोटी बनती है। मशीन से रोटी बनाने पर गैस सिलेंडर 7-8 दिन में ही खत्म हो जाती है। इसके अलावा मशीन चालू करने के लिए बिजली बिल भी अधिक आता है। हॉस्टलों के किचन में खर्च बढ़ गया है। इससे अधीक्षकों ने मशीनों का उपयोग बंद कर दिया है।

स्टोर में पड़ी मशीनें हो रहीं खराब

मशीनों उपयोग बंद है। अधिकांश मशीनें स्टोर रूम में रख दी गई हैं। उन पर कबाड़ के साथ किचन की सामग्री रखी हुई है। कई मशीनों के तार चूहों ने कुतर दिए हैं। लंबे समय से उपयोग नहीं होने के कारण मशीनों के उपकरण भी खराब हो रहे हैं।

एक नजर में जाने समस्याएं

56 एसटी हॉस्टल-आश्रमों में लगीं मशीनें।

गुजरात की कंपनी ने की थी सप्लाई ।

गैस और बिजली की अधिक खपत से संचालन महंगा।

स्टोर रूम में रखी मशीनों पर कबाड़ जमा

कई मशीनों के तार और कनेक्शन चूहों ने कुतर दिए।

अधीक्षकों के पास मशीनें संचालित करने बजट नहीं।

इनका कहना :

डॉ नारायण सिंह, प्रभारी सहायक आयुक्त, टाइबल, खंडवा

रोटी मेकर मशीनें बंद नहीं है। मशीनों का उपयोग हो रहा है। इसको चेक कराएंगे। कुछ अधीक्षकों समीक्षा के दौरान यह जानकारी जरूर दी है कि मशीनों में गैस की खपत अधिक हो रही है।