खंडवा

पत्नी की अर्थी, बेटा-बेटी की अंतिम यात्रा देख टूटे होकमसिंह, खंडवा में चला गया पूरा परिवार

Rajgarh Eco Car Accident: हादसे ने खंडवा में रहने वाले होकमसिंह का परिवार एक झटके में खत्म कर दिया। पत्नी की अर्थी और बेटे-बेटी की अंतिम यात्रा देखकर ग्रामीणों की आंखें भी नम हो गई।
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Aug 12, 2026
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Rajgarh Eco Car Accident: खंडवा में होकमसिंह ने पत्नी और बेटा-बेटी को दी मुखाग्नि (फोटो सोर्स- Patrika)

Rajgarh Eco Car Accident: मध्य प्रदेश के राजगढ़ में रविवार-सोमवार की रात हुए हादसे में एक ही परिवार के 9 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। हादसे में चार बच्चों की भी मौत हो गई थी। नौ मृतकों में से छह देवास के सतवास के रहने वाले थे तो वहीं, तीन मृतक खंडवा के मोहना के रहने वाले थे। देवास में कल जहां एक ही अर्थी पर परिवार के छह सदस्यों का अंतिम संस्कार किया। वहीं, खंडवा में भी दो बच्चों सहित परिवार के तीन सदस्यों की अंतिम यात्रा देख सभी की आंखें नम हो गई। यह परिवार हादसे में बचे दो लोगों में से एक होकमसिंह बंजारा का था। पत्नी की अर्थी और बेटा-बेटी की अंतिम यात्रा देख होकमसिंह टूट गए। गांव में मातम छा गया।

मां की अर्थी, हाथों में बच्चों का शव लेकर निकली गई अंतिम यात्रा

राजगढ़ जिले के पड़ाना बायपास सडक़ हादसे में खंडवा जिले के अटूट खास निवासी होकमसिंह नायक का भी पूरा परिवार खत्म हो गया। हादसे में मृत मां और दो नन्हे बच्चों का अंतिम संस्कार मंगलवार को अटूटखास में कावेरी नदी के तट पर हुआ तो हर आंख नम हो उठी। मां को अर्थी पर और दोनों बच्चों के शव हाथों में लेकर अंतिम यात्रा निकाली गई।

राजगढ में हुआ हादसा, खुद तैरकर बाहर आए, परिवार नहीं बच पाया

अटूट खास निवासी होकमसिंह बंजारा अपनी पत्नी रीनू (30), बेटी जसप्रीत कौर (5) और बेटे राजवीर (3) के साथ अपनी ससुराल राजगढ़ जिले के धांसड़ गांव गए थे। यहां से सोमवार को अपनी सास के इलाज के लिए सतवास के पास देवस्थान जा रहे थे, तभी सारंगपुर-पचोर मार्ग पर पड़ाना बायपास पर हुए सडक़ हादसे में उनका पूरा परिवार उजड़ गया। होकमसिंह इस हादसे में बच गए थे।

पत्नी को दी मुखाग्नि, बच्चों को पूरे रीति-रिवाज के साथ दफनाया

सोमवार शाम को जैसे ही रीनू, जसप्रीत और राजवीर के शव गांव पहुंचे चारों ओर चीखपुकार मच गई। पूरे गांव में रूदन मचा हुआ था, हर आंख नम थी। मंगलवार सुबह तीनों की शव यात्रा निकाली गई। अंतिम संस्कार कावेरी नदी के घाट पर किया गया। यहां होकमसिंह ने रीनू को मुखाग्नि दी। इसके बाद जसप्रीत और राजवीर के शवों को मुक्तिधाम में दफनाया गया। अंतिम यात्रा में परिवार, आसपास क्षेत्र के ग्रामीण, रिश्तेदार ग्रामवासी सैकड़ों की संख्या में शामिल हुए। स्थल पर मौजूद सभी ग्रामीणों के आंसू निकल पड़े।

लकवाग्रस्त मां को लेकर जा रहे थे, रास्ते में ही हो गया हादसा

धांसड़ गांव की निवासी सागर बाई के लकवे का उपचार करवाने के लिए पूरा परिवार देव स्थान जा रहा था। उनके गांव के पूर्व सरपंच ओमप्रकाश पटेल ने बताया कि बेहद सामान्य परिवार से वे लोग थे। कुछ समय पहले सागरबाई का एक्सीडेंट हो गया था, इसके बाद वे लकवाग्रस्त हो गई थीं, कोमा में चली गई थीं। सारंगपुर के पास स्थित उक्त देव स्थान पर जाने से उन्हें आराम मिल रहा था। इसी के चलते पूरे परिवार के लोग इको कार में सवार होकर वहां जा रहे थे।

Updated on:
12 Aug 2026 12:43 pm
Published on:
12 Aug 2026 12:27 pm