
West Bengal News:तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा को लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि Z+ सुरक्षा को घटाकर X श्रेणी करने से पहले आखिर किन बातों को ध्यान में रखा गया था। कोर्ट ने कहा कि राज्य की ओर से ऐसा कोई दस्तावेज सामने नहीं रखा गया, जिससे इस फैसले का आधार साफ हो।
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सुरक्षा को लेकर संभावित खतरे का भी जिक्र किया। कोर्ट ने कहा कि अगर पथराव को छोटा अपराध माना जाए, लेकिन वही पत्थर किसी व्यक्ति को लग जाए तो क्या होगा? ऐसी स्थिति में राज्य को पहले से जरूरी सावधानी रखनी चाहिए।
अभिषेक बनर्जी ने अपनी सुरक्षा को फिर से बढ़ाने की मांग को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया है। उनका कहना है कि पहले उन्हें Z+ सुरक्षा मिली हुई थी, लेकिन विधानसभा चुनाव के बाद इसे घटाकर X श्रेणी कर दिया गया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इसी फैसले का आधार जानना चाहा। कोर्ट का सवाल था कि सुरक्षा कम करने से पहले क्या कोई खतरे का आकलन किया गया था और अगर किया गया था तो उससे जुड़े कागजात कहां हैं। राज्य की ओर से अब तक ऐसा कोई दस्तावेज पेश नहीं किया गया, जिससे यह साफ हो सके कि सुरक्षा का स्तर कम करने का फैसला किस आधार पर लिया गया।
सुनवाई में सुरक्षा से जुड़े खतरे को समझाने के लिए कोर्ट ने पथराव का उदाहरण दिया। कोर्ट ने कहा कि किसी घटना को छोटा मानना अलग बात है, लेकिन अगर उसमें किसी व्यक्ति को चोट लग जाए तो मामला गंभीर हो सकता है।
कोर्ट की इस टिप्पणी का मतलब यही था कि सुरक्षा तय करते समय सिर्फ घटना की कैटेगरी नहीं देखी जा सकती। यह भी देखना होगा कि उससे किसी व्यक्ति को कितना नुकसान हो सकता है।
अभिषेक बनर्जी को पहले Z+ सुरक्षा मिली हुई थी। बाद में विधानसभा चुनाव के बाद उनकी सुरक्षा घटाकर X श्रेणी किए जाने की बात सामने आई। इसके बाद उन्होंने सुरक्षा कम किए जाने पर सवाल उठाते हुए इसे फिर बढ़ाने की मांग की।
उनकी ओर से यह भी कहा गया है कि सुरक्षा घटने के बाद उन्हें कई मौकों पर विरोध और हमलों जैसी स्थितियों का सामना करना पड़ा। हालांकि, इन दावों पर अंतिम तस्वीर मामले की सुनवाई और सामने आने वाले रिकॉर्ड से साफ होगी।
हाईकोर्ट के सवालों के बाद अब राज्य सरकार को यह बताना होगा कि अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा कम करने का फैसला किस आधार पर लिया गया था। खास तौर पर कोर्ट की नजर उस रिकॉर्ड पर है, जिसमें सुरक्षा घटाने से पहले किए गए आकलन की जानकारी हो। आगे की सुनवाई में राज्य की ओर से पेश किए जाने वाले दस्तावेज और जवाब इस मामले में अहम रहेंगे।